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    Home»उत्तर प्रदेश

    चलते रहने की प्रेरणा

    By July 14, 2019 उत्तर प्रदेश No Comments9 Mins Read
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    Post Views: 604
    डॉ दिलीप अग्निहोत्री
    ऐसे अनेक लेखक है जिन्हें केवल एक पुस्तक के कारण अपार ख्याति मिली। इस सूची में राम नाईक का नाम भी शामिल हुआ। उनकी पुस्तक चरैवेति चरैवेति को उल्लेखनीय चर्चा मिल रही है। साहित्य का क्षेत्र बहुत व्यापक होता है। इस पुस्तक ने साहित्य की संस्मरण विधा में गौरवशाली स्थान बनाया है। स्वतंत्रता के बाद राजनीति से जुड़े लोगों की किसी पुस्तक के इतने कम समय में ग्यारह भाषाओं और ब्रेल लिपि की तीन भाषाओं के संस्करण प्रकाशित नहीं हुए। इतना ही नहीं इसके विभिन्न संस्करणों के लोकार्पण समारोहों और उनमें राष्ट्रपति से लेकर विशिष्ट व साहित्य प्रेमी जनों की भागीदारी का भी कीर्तिमान बना।
    दिलचस्प यह कि राम नाईक अपने को एक्सिडेंटल राइटर ही मानते है। उनका कहना है कि वह लेखक नहीं है। शायद राजनीति और समाजसेवा में उन्हें इसके लिए समय भी ना मिला हो। मराठी के दैनिक साकाल ने उनसे संस्मरण लिखने का आग्रह किया था। इसमें उनके जो संस्मरण प्रकाशित हुए, चरैवेति चरैवेति उन्हीं का संकलन है। राम नाईक अपने को भले ही एक्सिडेंटल राइटर मानते हों, लेकिन पुस्तक की विषयवस्तु, भाषा शैली आदि सभी बहुत स्तरीय और रोचक है।
    यहां तक कि दृष्टिबाधित दिव्यांगजन हेतु भी अब यह पुस्तक उपलब्ध है। चरैवेति चरैवेति के ब्रेल लिपि संस्करणों हिन्दी, अंग्रेजी एवं मराठी भाषा का लोकार्पण मुंबई में हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस इसका लोकार्पण किया। पुस्तक के ब्रेल लिपि संस्करणों का प्रकाशन नेशनल एसोसिएशन फाॅर ब्लाइंड, इण्डिया द्वारा किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल  राम नाईक सहित उनकी पत्नी  कुंदा नाईक, पुत्रियाँ सुश्री निशिगंधा, विशाखा कुलकर्णी, महाराष्ट्र सरकार के शिक्षा मंत्री आशिष शेलार, नैब इण्डिया के अध्यक्ष हेमंत टकले, महासचिव सत्य कुमार सिंह, सचिव डॉ विमल कुमार डेंगला एवं बड़ी संख्या में विशिष्टजन और दृष्टिबाधित भाई बहन उपस्थित थे।
    इस अवसर पर राम  नाईक ने बताया कि कार्यक्रम के अध्यक्ष केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं सशक्तीकरण मंत्री  थावरचंद गेहलोत संसद सत्र चलने और राज्यसभा ने नेता होने तथा राज्यसभा में आवश्यक कार्य के कारण उपस्थित नहीं हो सके हैं। कहा कि वे पुस्तक के लेखक के रूप में मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस से पहले बोल रहे हैं। वह एक्सीडेंटल लेखक हैं। यह सुखद संयोग है कि आज ही हेलन केलर का जन्म दिवस है। मूक बधिर और दृष्टिहीन हेलन केलर पहली महिला थी।  जिन्होंने स्नातक डिग्री प्राप्त की। उनकी शिक्षिका एनी सुलीवान ने उनको शिक्षित किया था। जीवन में बाधाएं आती हैं तो तलाशने पर उनके समाधान भी प्राप्त होते हैं। दिव्यांगजन निराश न हों।
    प्रयास और इच्छाशक्ति से नये रास्ते खुलते हैं। राज्यपाल ने अपने जीवन के संघर्षो का उल्लेख किया। बताया कि उन्होंने के सी  कालेज से विधि की पढ़ाई की है। मुंबई में रहने और खाने के लिये उन्हें मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। आने जाने के लिये साईकिल का प्रयोग भी उन्होंने किया। सामाजिक क्षेत्र में कार्य करते हुये वे तीन बार विधायक और पांच बार सांसद बने। लोगों के प्रेम और मुंबई ने उन्हें बहुत कुछ दिया। राज्यपाल ने कहा कि उनके जीवन से जुड़े इन्हीं संस्मरणों का संकलन है
    पुस्तक चरैवेति चरैवेत मराठी भाषी संस्मरण संग्रह चरैवेति चरैवेति का विमोचन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री  देवेन्द्र फडणवीस द्वारा ही पच्चीस अप्रैल दो हजार सोलह  को मुंबई में किया गया था। हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू तथा गुजराती संस्करणों का लोकार्पण नौ नवम्बर दो हजार सोलह को राष्ट्रपति भवन नई दिल्ली में, ग्यारह नवम्बर दो हजार सोलह  को लखनऊ के राजभवन में तथा गुजराती भाषा संस्करण का तेरह नवम्बर दो हजार सोलह  को मुंबई में हुआ। छब्बीस मार्च दो हजार अठारह  को संस्कृत नगरी काशी में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा संस्कृत संस्करण का लोकार्पण हुआ।
    पुस्तक के सिंधी संस्करण का लोकार्पण इक्कीस फरवरी दो हजार उन्नीस को लखनऊ एवं बाइस  फरवरी दो हजार उन्नीस  को अरबी एवं फारसी भाषा में नई दिल्ली में हुआ। मराठी, हिन्दी, उर्दू, अंग्रेजी, गुजराती, संस्कृत, सिंधी, अरबी एवं फारसी सहित नौ भाषाओं में तथा अब ब्रेल लिपि के तीन संस्करणों हिन्दी, अंग्रेजी और मराठी में प्रकाशित हो चुकी है। पुस्तक के जर्मन संस्करण का लोकार्पण तीस जून दो हजार उन्नीस को पुणे विश्वविद्यालय और असमिया भाषा संस्करण का छह जुलाई को गौहाटी में लोकार्पण हुआ। पुस्तक चरैवेति चरैवेति  के लोकार्पण समारोह में दो  राष्ट्रपति, तीन मुख्यमंत्री एवं सात राज्यपालों के साथ मंच साझा करने का अवसर मिला है।
    महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री  देवेन्द्र फडणवीस ने कहा कि व्यक्ति जीवन में संघर्ष कर कैसे नायक के रूप में उभरता है उसका उदाहरण है राम भाऊ का जीवन। साधारण व्यक्ति असाधारण काम कैसे करता है वे उसका उदाहरण है। वे कभी रूके नहीं। सदैव प्रयास व चेष्टा करते रहे। उन्होंने यशस्वी कार्य किया है। पुस्तक चरैवेति चरैवेति सामाजिक क्षेत्र में कार्य करने वालों के लिये महत्वपूर्ण है। ब्रेल लिपि में पुस्तक दृष्टिहीन भाई-बहनों के लिये प्रेरणा स्रोत का कार्य करेगी और वे लाभान्वित होंगे। राम नाईक ने जनप्रतिनिधि, मंत्री और राज्यपाल रहते हुए कुष्ठ पीड़ितों के लिये बहुत कार्य किये हैं। प्रधानमंत्री का सपना है कि दिव्यांगों को विकास की मुख्यधारा में जोड़कर योजनाओं का लाभ दिलाया जाये। ब्रेल लिपि में पुस्तक प्रकाशन के लिये नैब इण्डिया का आभार व्यक्त करते हुये उन्होंने कहा कि संस्था ने केवल देश की भाषा नहीं बल्कि विश्व की भाषा में प्रकाशन कराया, यह अपने आप में रिकार्ड है। महाराष्ट्र के शिक्षा मंत्री आशिष शेलार ने कहा कि शिक्षा मंत्री के रूप में पुस्तक विमोचन का यह उनका पहला कार्यक्रम है।
    पुस्तक से जीवन में निरंतर कर्म करते हुये आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। श्री नाईक का जीवन चरैवेति चरैवेति  का उदाहरण है। समाज के सभी वर्ग के लिये पुस्तक लाभदायी है। नैब इण्डिया के महासचिव  सत्य कुमार सिंह ने राज्यपाल  राम नाईक का आभार व्यक्त करते हुये कहा कि उन्होंने अपनी पुस्तक का ब्रेल लिपि में प्रकाशन का निर्णय लिया। पुस्तक प्रकाशन में उनकी पुत्री श्रीमती विशाखा का बहुमूल्य सहयोग प्राप्त हुआ। नैब इण्डिया के कार्यकलाप के बारे में बताते हुये  सत्य कुमार सिंह ने कहा कि संस्था ग्रामीण क्षेत्र में दृष्टिबाधित बच्चों को शिक्षा प्रदान करने, सरकारी नौकरी के लिये सहयोग करने सहित ब्रेल लिपि प्रकाशन का भी कार्य करती है। उन्होंने कहा कि दृष्टिबाधित भी देश के विकास में अपना सहयोग दे सकते हैं। इसकी प्रस्तावना  मोहन भागवत द्वारा लिखी गयी है।
     तीस जून दो हजार नौ को पुणे विद्यापीठ में चरैवेति चरैवेति के जर्मन संस्करण का लोकार्पण हुआ। राम नाईक यहां आकर भावुक हुए। इस विद्यापीठ एवं पुणे से उनकी पुरानी स्मृतियाँ जुड़ी है। उन्होंने यहाँ से बी काम की परीक्षा  उन्नीस सौ चौवन में उत्तीर्ण की थी। इसी एम्पी थियेटर में विद्यार्थी के रूप में पढ़ाई करते थे। उनके  जीवन में सहयोग देने वाले अनेक मित्र एवं सहयोगियों मुझे पुणे में मिले, जिनमें सी जी वैद्य, राजाभाऊ चितले, रामभाऊ म्हालगी, ग दि  माडगूलकर सम्मिलित हैं।
    अपने कालेज में आना आनंद का विषय है। सावित्रीबाई फुले विद्यापीठ जर्मन भाषा मेें शिक्षा प्रदान करने का उत्कृष्ट केन्द्र है। सावित्रीबाई फुले विद्यापीठ, पुणे के फग्र्यूसन महाविद्यालय के एम्पी थियेटर में चरैवेति चरैवेति के जर्मन संस्करण के लोकार्पण शानदार रहा। समारोह में  मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के अध्यक्ष एवं राज्यसभा सदस्य डाॅ विनय सहस्रबुद्धे, सावित्रीबाई फुले विद्यापीठ के प्राचार्य डाॅ नितीन करमलकर एवं कुलसचिव डाॅ प्रफुल्ल पवार, पुणे जिला पालक मंत्री  चंद्रकांतदादा पाटील, लोकसभा सदस्य  गिरीश बापट, पुणे की महापौर  मुक्ता तिलक, दैनिक समाचार पत्र ‘सकाल’ के सम्पादक सम्राट फडणीस, डाॅ  चिं.ग. वैद्य सहित बड़ी संख्या में विशिष्टजन उपस्थित थे।
     लखनऊ विश्वविद्यालय चरैवति चरैवेति के उर्दू संस्करण पर आयोजित परिचर्चा कार्यक्रम में बर्लिन विश्वविद्यालय के उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो आरिफ नकवी भी उपस्थित थे। बाद में जर्मनी लौटने पर प्रो नकवी ने राम नाईक को  फोन कर पुस्तक के जर्मन भाषा में प्रकाशन की अनुमति मांगी। यह पूछने पर कि जर्मन भाषा में कौन इसे पढ़ेगा, प्रो आरिफ नकवी ने कहा कि पुस्तक में मानवीय मूल्यों का समावेश है। जर्मन में पुस्तक प्रकाशन होने पर वहाँ लोगों को यह जरूर पसंद आयेगी। यह तर्क सुनकर उन्होंने स्वीकृति प्रदान कर दी। राम नाईक ने बताया कि वह आज जो कुछ भी है उसका श्रेय रामभाऊ महाल्गी को जाता है। वह मेरे राजनैतिक जीवन के शिल्पकार थे। एक आदर्श जनप्रतिनिधि कैसा होता है उन्होंने समझाया था।  अटल जी ने  राम नाईक से कहा था कि कैंसर के बाद मिला बोनस जीवन समाज सेवा के लिये समर्पित करें। वह आज भी समाजसेवा के प्रति समर्पित भाव से कार्य करते है।
    चरैवेति चरैवेति  के असमिया संस्करण का लोकार्पण गुवाहाटी में छह जुलाई दो हजार नौ को हुआ। इसमें छह राज्यपाल और दो  मुख्यमंत्री सहित अनेक विशिष्टन उपस्थित थे। बांग्ला, कश्मीरी एवं तमिल भाषाओं में अनुवाद के प्रस्ताव राज्यपाल राम नाईक को प्राप्त हुये हैं। यह उम्मीद करनी चाहिए कि इन भाषाओं के संस्करण भी निकट भविष्य में प्रकाशित होंगे।
    गौहाटी का लोकार्पण शानदार रहा। इसमें असम एवं मिजोरम के राज्यपाल जगदीश मुखी, असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस, सिक्किम के राज्यपाल गंगा प्रसाद, अरूणाचल प्रदेश के राज्यपाल डाॅ बीडी मिश्रा, मेघालय के राज्यपाल तथागत राॅय, उत्तर प्रदेश सरकार के ग्राम्य विकास एवं स्वास्थ्य राज्यमंत्री डॉ महेन्द्र सिंह, चाणक्य वार्ता के संरक्षक लक्ष्मी नारायण भाला सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे। इस अवसर पर राम नाईक ने कहा कि भाषायें जोड़ने का काम करती हैं।
    यह सुखद संगम आज पुस्तक विमोचन समारोह में देखने को मिल रहा है। चरैवेति चरैवेति का अब तक मराठी सहित हिन्दी, उर्दू, अंग्रेजी, गुजराती, संस्कृत, सिंधी, अरबी, फारसी तथा जर्मन भाषा और ब्रेल लिपि में हिन्दी, अंग्रेजी एवं मराठी में लोकार्पण हुआ है। अब असमिया भाषा में प्रकाशन होने से पुस्तक ग्यारह भाषाओं तथा ब्रेल लिपि तीन भाषाओं में पाठकों के लिये उपलब्ध है। किसी संस्मरणात्मक पुस्तक का इतनी भाषाओं में प्रकाशन एक उपलब्धि के समान है।
    राम नाईक ने चरैवेति चरैवेति के श्लोक का मर्म बताते है। जीवन में निरंतर चलने वाले को ही सफलता प्राप्त होती है। संसद में पहली बार ‘जन-गण-मन’ एवं ‘वंदे मातरम् का गायन उनके प्रयास से प्रारम्भ हुआ। बाम्बे को उसका मूल नाम मुंबई कराया जिसके बाद अनेक स्थानों के नाम परिवर्तित हुये। कारगिल युद्ध में चार सौ उनतालीस शहीद सैनिकों के परिजनों को सरकारी खर्चे पर पेट्रोल पम्प एवं गैस एजेन्सी का आवंटन कराया। सांसद निधि की शुरूआत करायी।
    आसाम के मुख्यमंत्री सोनोवाल ने सभी अतिथि राज्यपालों एवं मुख्यमंत्रियों का स्वागत करते हुये कहा कि सुखद संयोग है कि आज डाॅ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती है और आज ही पुस्तक का विमोचन हो रहा है। पुस्तक में प्रस्तावना लिखवाने पर राम नाईक का अभिनन्दन किया।
    महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने कहा कि पुस्तक प्रेरणादायक है। पुस्तक विमोचन के दो समारोह में उपस्थित हुआ हूँ और आगे यदि अन्य भाषा में पुस्तक का प्रकाशन होता है तो वहाँ भी जरूर उपस्थित रहूंगा।

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