अब नहीं उड़ाऊंगा बीवी का उपहास

0
642

एक शादीशुदा स्त्री को रात को सपने में भगवान आये, बोले कहो पुत्री क्या वरदान मांगती हो मैं बोली प्रभु मेरे पति को मैं बना दो और मुझे उनका पति प्रभु बोले तथास्तु!

अब हुयी सुबह, आइये देखते हैं सुबह का हाल, सुबह अलार्म बजा और मैं जोर से चिल्लाई! अरे बंद करो इसे नींद खराब हो रही हैं!

तो पतिदेव उठे और अलार्म बंद किया। किचन में जाके सुबह के नाश्ते की ,लंच की तैयारी की,फिर जा के मेरे लिए चाय बना के लाये ,अख़बार लाये ..और मैं मजे से उनके 3-4 बार उठाने पर उठी ..मस्त बिस्तर पर चाय की प्याली, अख़बार, कितना मजा आ रहा था।

फिर मैं गयी ऑफ़िस को तैयार होने और पतिदेव उनके रोजमर्रा के कामों में हम ऑफ़िस को रवाना, और पीछे पतिदेव ने बच्चो को तैयार करके स्कूल भेजा,सास ससुर को चाय नाश्ता दिया, सारे घर की साफ सफाई, झाड़ू पोंछा! कपडे धोना, बर्तन मांजना, सब काम किया।

फिर बच्चो को स्कूल से लाये ,सास ससुर को खाना परोसा ,बच्चो को खिलाया, खुद खाया ,फिर से बर्तन साफ़ किये, तब तक तीन बज गए तब थोड़ी देर के लिए उन्हें सोने को मिला।

शाम को उठ कर वही सब घर के काम, सबको चाय देना ,बच्चो का होमवर्क,उन्हें गार्डन ले जाना आदि तब तक हमारे ऑफ़िस से आने का समय हो गया तो देखा पतिदेव अब लग गए किचन में, रात के खाने की तैयारी, बीच में हमें चाय बना कर दी , हमारा सामान हेलमेट, टिफिन वगैरह जगह पर रखा।

फिर सास ससुर को खाना परोसा और बच्चो को खिलाया तब तक हम अपना मन पसंद टीवी प्रोग्राम देख रहे थे। फिर हम दोनों ने साथ खाना खाया उसके बाद हम सब लग गए बच्चो के साथ गप्पे मारने में और पतिदेव बर्तन समेटने और रसोई की साफ़ सफाई में सब काम करके सबका दूध लेकर आये। सबको पिलाया। बच्चो को सुलाया।सुबह की थोड़ी बहुत तैयारी की, तब तक हम टीवी पर अपनी मनपसंद मूवी आधी ऊपर देख चुके थे।

पतिदेव आये कमरे में, थकान से चूर, हमसे पूछा कुछ चाहिए तो नहीं। हमने कहा बस एक कप कॉफ़ी मिल जाये मजा आ जाये। वो गए कॉफी बनाने।

कॉफी आते ही हम लेने लगे कॉफी की चुस्किया और तभी पतिदेव बोले। आज माँजी ने बहुत कुड़ कुड़ की  हर काम में नुक्स ऐसे नहीं वैसे टोका टाकी ..मैंने भी डायलॉग मार दिया बड़े हैं नेग्लेक्ट कर दो ध्यान मत दो पति बोले पर मैं परेशान हो जाती हूं….तो मेंने बड़े गर्व से कहा सहन करो और क्या ? उनका सम्मान तो करना ही होगा।

वो बोली आप मेरी तो कभी सुनते ही नहीं मैं मन में बड़ी खुश अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे-

ऐसे ही 1 हफ्ता बीत गया, भगवान जी फिर आये इस बार पतिदेव के सपने में बोले वत्स माँगो वो बोले मुझे फिर से पति बना दो।

प्रभु बोले क्यों? ये तो तुम्हारा अपना घर हैं। अपने माता पिता, उनके साथ तुम्हें क्या परेशानी,चाहे पति रूप में रहो या पत्नी में।

पतिदेव बोले नहीं प्रभु, चाहे सारी दुनिया की दौलत दो तो वो भी नहीं चाहिए, कभी नौकरी में प्रमोशन न दो पर फिर से पति बना दो।

प्रभु बोले पर पत्नी बनने में क्या परेशानी तुम ही तो कहते हो तुम करती क्या हो थोड़ा सा काम और दिन भर आराम ,मजे हैं तुम्हारे तो थोड़े मजे तुम भी ले लो।

पतिदेव नहीं प्रभु-

अब हो गया मुझे गलती का अहसास।

अब नहीं उड़ाऊंगा बीवी का उपहास।

घर के काम नहीं होते आसान।

ऊपर से बंदिश और झंझट हज़ार।

मांगता हूँ माफ़ी अपनी पत्नी से बार बार।

तुम बनो मेरी रानी ,मुझे बना दो अपना गुलाम।

और तभी फिर से अलार्म बजा पतिदेव हड़बड़ा कर उठे तो देखा वो फिर से पति बन गए। अपने घर का बेटा आईने के सामने से हटे नहीं घंटों तक तभी में आयी चाय का प्याला और हाथ में अख़बार लेकर उनसे पूछा क्या हुआ ?

आईने के सामने क्यों खड़े हो? आज बिना मेरे उठाये कैसे उठे हो ?

पतिदेव बोले-

जानू, तुम ही मेरे घर की रौनक, मेरी जान हो।

तुम्हारे बिना न ये घर, न होता कोई काम हैं।

एक डरावना सपना देखा था मेंने रात को,

जब में बन गया था तुम और समझ गया हर बात को।

अब न तुम पर रोब दिखाऊंगा, न तुम्हें धमकाऊँगा।

घर के काम में हाथ बटाउंगा और मम्मी पापा को भी समझाऊंगा।

हम हैं बराबर के साथी।

जैसे दिया और बाती।