डॉ. दिलीप अग्निहोत्री
किसी भी महापुरुष की जन्म जयंती केवल औपचारिकता के निर्वाह तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इस अवसर पर ऐसे कार्य भी होने चाहिए, जिनकी कल्पना उन महापुरुषों ने की थी। प्रायः राजनेता मूर्तियों पर माल्यार्पण और भाषण पर ही फोकस रखते है। चुनाव का समय निकट हो तो, तो फिर कहना क्या। राजनेताओं का निशाना उसी तरफ हो जाता है। लेकिन यह मानना होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसे प्रत्येक अवसर का लोक कल्याण की दृष्टि से उपयोग करते है। उनके अनुसार यही किसी महापुरुष के प्रति सच्चा सम्मान होता है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इसी मार्ग का अनुशरण कर रहे है। डॉ भीमराव रामजी आम्बेडकर जयंती पर मोदी और योगी का यही नजरिया था। उधर छत्तीसगढ़ के वनवासी बहुल जांगला बीजापुर में मोदी ने पिछड़े जिलों के कायाकल्प और आयुष योजना को आगे बढ़ाया, वही लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दलितों, वंचितों के लिए अनेक कार्यक्रम शुरू किए। पहले से चल रहे ऐसे कई कार्यक्रमो को तेजी से पूरा करने का संकल्प लिया।
यह बिडंबना है कि दलितों के नाम पर राजनीति करने वाले स्वयं और उनके परिजन कहा से कहा पहुंच गए। लेकिन वंचित वर्ग केवल वोटर ही बना रह गया। ऐसे नेता आम्बेडकर और कांशीराम का नाम तो लेते है, लेकिन उनके विचारों पर अमल नहीं करते। उन महापुरुषों ने अपने परिजनों को नही पूरे वंचित समाज को महत्व दिया था। लेकिन उनके नाम पर आज राजीति करने वाले क्या कर रहे है, यह जगजाहिर है। ये दूसरों पर आरोप लगाते है कि उन्हें मानसिकता बदलनी चाहिए। जबकि मानसिकता बदलने की जरूरत इन्हें है। इनको परिजनों से ज्यादा समाज को अहमियत देनी होगी। तभी वंचितों के जीवन में सुधार आएगा। यही वह मानसिकता है, जिसमें नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ अलग दिखाई देते है।कुछ वर्ष पहले एक दलित मुख्यमंत्री की सैंडिल विमान द्वारा मुम्बई से मंगाने की चर्चा चली थी। इसकी पुष्टि भले न हो, लेकिन उन्होंने अपने वैभव को दलित उत्थान से खुद ही जोड़ने का कई बार प्रयास किया था। उस समय दलित समाज को इससे भी संतुष्टि मिल जाती थी। बाद में दलितों का एक वर्ग सवाल करने लगा। सवाल यह था कि सत्ता से उनको क्या मिला। सत्ता के गलियारे में अनेक भाई बन्धु बहुत आगे निकल गए । वंचित वही रह गए। दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी है बुजुर्ग वनवासी महिला को अपने हाथों से चप्पल पहनाते है। योगी वंचितों को बराबरी पर लाने का संकल्प लेते है। शायद यही कारण है कि दलित वर्ग की प्रतिष्ठित संस्था योगी आदित्यनाथ को दलित मित्र सम्मान से नवाजती है।

लखनऊ के डॉ भीमराव आम्बेडकर महासभा ट्रस्ट ने योगी को यह सम्मान दिया। ट्रस्ट के अध्यक्ष लालजी प्रसाद निर्मल ने कहा कि योगी ने प्रत्येक कार्यालय में डॉ आम्बेडकर के चित्र लगाने का सराहनीय कार्य किया है। वह कहते है कि जिन्होंने सत्ता में रहते हुए दलित अधिकारियों को चुन चुन कर हटाया, राज्यसभा में पदोन्नति में आरक्षण का विधेयक फाड़कर फेंक दिया, एससीएसटी एक्ट को निष्प्रभावी बनाने का कार्य किया, उनका सम्मान नहीं हो सकता। न ऐसे लोगों से गठबन्धन करने वालों का सम्मान हो सकता है। जबकि योगी आदित्यनाथ अति दलितों व अति पिछड़ों को आरक्षण देने की बात कर रहे है। यह ट्रस्ट ने डॉ आम्बेडकर के पूरे नाम का भी स्वागत किया। उन्होंने बताया कि महासभा परिसर में डॉ आम्बेडकर के अस्थिकलश की स्थापना के समय से ही उनका नाम भीमराव रामजी आंबेडकर लिखा है।
योगी आदित्यनाथ ने एससीएसटी छात्रों के वजीफे में साढ़े सात सौ रुपये की बढोत्तरी और इसकी पात्रता की आय सीमा बढ़ाने का ऐलान किया। एससीएसटी एक्ट के तहत दर्ज मामलों के जल्द निस्तारण हेतु पच्चीस न्यायालय बनाये जायेगे। एससीएसटी विकास कमीशन बनाया जाएगा। सरकारी भूमि पर बसे दलित या भूमिहीन गरीब को उजाड़ा नहीं जाएगा। मुद्रा योजना, स्टैंड अप इंडिया, सुरक्षित भविष्य, उद्यम पूंजी जैसी योजनाओं में दलितों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। ग्राम स्वराज अभियान में दलित बहुल गांवों का कायाकल्प किया जा रहा है। यहां उज्ज्वला योजना से सभी को गैस कनेक्शन, प्रधानमंत्री सहज बिजली सौभाग्य योजना के तहत प्रत्येक घर को बिजली कनेक्शन, उजाला योजना के तहत एलईडी बल्ब वितरण, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना, जनधन योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के तहत दो लाख रुपये का जोखिम बीमा, मिशन इंद्रधनुष के अंतर्गत स्वास्थ सुविधा, स्वछता और समरसता के कार्यक्रम चलाए जायेगे।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजापुर के वनवासी बहुल जंगाला में आयुष्मान भारत स्कीम के अंतर्गत बने पहले स्वास्थ केंद्र का उद्घाटन किया। इसके अलावा केंद्र सरकार एक सौ पन्द्रह पिछड़े जिलों के विकास की विशेष योजना को तेजी से लागू करेगा। प्रत्येक जिले का अपना विकास मॉडल होगा। आयुष्मान भारत स्कीम में इन जिलों को प्राथमिकता दी जाएगी। इस स्कीम में दस करोड़ लोगों को पांच लाख का बीमा दिया जाएगा। इसके अलावा डेढ़ लाख स्वास्थ केंद्र खोले जाएंगे।
जाहिर है कि वंचितों के कल्याण हेतु शुरू किए गए कार्यो से डॉ आंबेडकर की जन्म जयंती कहीं अधिक सार्थक हुई। वह स्वयं ऐसे ही लोगों को आगे बढाने में लगे रहे। जन्म जयंती पर यह उनके प्रति सच्चा सम्मान है।







