संप्रग पर लागू ओलांदे का कथित साक्षात्कार

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डॉ दिलीप अग्निहोत्री
राफेल सौदे को लेकर कांग्रेस बदहवासी के आलम में है। कहीं कोई आहट होती है, वह आंख बंद करके दौड़ पड़ती है। उधर फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति का बयान आया। कांग्रेस ने उसकी सच्चाई और समय जानने की भी जहमत नहीं उठाई। एक तो पूर्व राष्ट्र्पति ओलांदे का बयान ही प्रमाणिक नहीं है। दूसरे उसमें उल्लखित समय यूपीए की मनमोहन सरकार पर लागू होता है। लेकिन राहुल ने हमेशा की तरह अतिउत्साह में न जाने कहाँ निकल गए। जो बात मनमोहन सिंह पर लागू होती थी, उससे नरेंद्र मोदी का नाम जोड़ दिया।
फ़्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के बयान पर कांग्रेस उछल पड़ी। लेकिन उसने यह नहीं देखा कि उस समय भारत में उसी की सरकार थी।
जहां तक रिलायंस से पुर्जे बनवाने की बात है, यह निर्माता कंपनी का अपना निर्णय है कि वह किस कम्पनी की सेवाएँ लेती हैं। वैसे भी रिलायंस का नाम मोदी के प्रधानमंत्री बनने से बहुत पहले दिसंबर दो हजार बारह में ही तय हो चुका था। उस समय नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे। राहुल ने नरेंद्र मोदी के लिए जिस शब्द का प्रयोग किया, वह मनमोहन सिंह पर लागू होता है।
 पत्रकार प्लेनेल ने एक नरेंद्र मोदी के विरोधी भारतीय चैनल को यह जानकारी छह वर्ष बाद दी। यह साक्षत्कार पर साक्षत्कार का दिलचस्प प्रकरण है। भारतीय न्यूज़ चैनल ने फ्रांसीसी वेब पोर्टल पत्रकार प्लेनेल का साक्षात्कार लिया, इसमें उसने ओलांदे से लिये गए सपने साक्षात्कार का उल्लेख किया। इसके अनुसार ओलांद ने  उसे बताया था कि भारत की सरकार ने, राफ़ेल सौदे में भारतीय पार्टनर के रूप में अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस का नाम शामिल करने को कहा था।
ओलांदे का यह बयान प्लेनेल के ब्लॉग में चला था। वैसे प्लेनेल के पास भी इस साक्षात्कार के कोई अन्य प्रमाण नहीं है। ओलांदे का कथित साक्षत्कार दो हजार बारह में लिया गया था। इसे एक ब्लॉग में ही देखा गया था। इस समय वह फ्रांस के राष्ट्रपति और मनमोहन सिंह भारत के प्रधानमंत्री थे। राफेल डील को यूपीए सरकार ने पहले खुद दस साल तक लटकाया और फिर अंत में रीइग्जैमिन कर रद्द कर दिया। कानून मंत्री ने कहा कि यह सब घूस न मिलने की वजह से किया गया था। फिलहाल सिर्फ छतीस  राफेल इसलिए लिए जा रहे हैं क्योंकि बाकी भारत में बनेंगे, जिससे नौकरी के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने बताया कि डिसॉल्ट अपने बयान में बता चुका है कि बाकि विमानों को रिलायंस की जगह अलग-अलग कंपनियों के साथ बनाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि अरुण जेटली पहले ही बता चुके हैं कि राफेल विमान यूपीए सरकार के सौदे से नौ प्रतिशत सस्ता है और हथियार लगाकर इसकी कीमत फिलहाल बीस प्रतिशत कम है। रविशंकर प्रसाद ने यह भी कहा कि राहुल बार-बार राफेल की कीमत पूछते हैं, ताकि दुश्मन अलर्ट हो जाएं। वह पाकिस्तान की मदद करना चाहते हैं। रिलायंस और डिसॉल्ट के बीच समझौता मोदी सरकार आने से पहले ही हो गया था। इस बात की पुष्टि करने के लिए उन्होंने एक पुरानी खबर की कटिंग भी दिखाई। पूर्व राष्ट्रपति फ्रांक्वा ओलांद के बयान के बाद बढ़े विवाद के बीच फ्रांसीसी विमानन कंपनी दसॉल्ट एविएशन ने राफेल सौदे पर रिलायंस समूह  भारत सरकार के स्टैंड की पुष्टि की है।
कंपनी ने कहा कि उसने खुद इस सौदे के लिए रिलायंस डिफेंस को चुना था। कंपनी ने अपने बयान में कहा कि रिलायंस समूह को रक्षा खरीद प्रक्रिया नियमों के अनुपालन की वजह से चुना गया था। दसॉल्ट एविएशन ने आगे स्पष्ट करते हुए कहा कि राफेल सौदा भारत और फ्रांस सरकार के बीच एक अनुबंध था, लेकिन यह एक अलग तरह का अनुबंध था जिसमें दसॉल्ट एविएशन खरीद मूल्य के पचास प्रतिशत निवेश भारत में बनाने के लिए प्रतिबद्ध था। इसमें मेक इन इंडिया की नीति के अनुसार, दसॉल्ट एविएशन ने भारत के रिलायंस समूह के साथ साझेदारी करने का फैसला किया। यह दसॉल्ट एविएशन की पसंद थी। इस साझेदारी में दसॉल्ट रिलायंस एयरोस्पेस लिमिटेड संयुक्त उद्यम के निर्माण की शुरुआत की।
इस प्रकार की सतही राजनीति कांग्रेस की छवि को बिगाड़ने वाली साबित होगी। राहुल गांधी राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष है। उन्हें सच्चाई जानने के बाद ही किसी मुद्दे पर मोर्चा खोलना चाहिए। लेकिन प्रधानमंत्री , भारत सरकार का नाम देखते ही नरेंद्र मोदी पर हमला बोल देते है। इस बार भी यही हुआ। छह सात वर्ष पुराने भारत सरकार के नाम में मोदी कैसे आ जायेंगे। लेकिन यह कमल राहुल कर सकते है। उनका समर्थन करना कांग्रेस के नेताओं की मजबूरी है। लेकिन अनेक विपक्षी नेता भी राहुल के झांसे में अपनी स्थिति हास्यस्पद बना लेते है।

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