डॉ दिलीप अग्निहोत्री
राफेल विमान के सहारे कांग्रेस चुनावी उड़ान की रणनीति बना रही थी। फ्रांस के साथ हुए समझौते में घोटाले के आरोप लगाकर वह एक तीर से दो निशाने साधने के प्रयास कर रही थी। पहला उसे लगा कि नरेंद्र मोदी सरकार पर घोटाले का आरोप लगा कर वह अपनी छवि सुधार लेगी। दूसरा यह कि उसे लगा कि वह इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बना सकेगी। लेकिन इस संबन्ध में नई जानकारी ने कांग्रेस को ही कठघरे में पहुंचा दिया है। इसके अनुसार उसके मुकाबले मोदी सरकार ने राफेल पर सस्ता और बेहतर समझौता किया है।यूपीए सरकार में एक राफेल की कीमत करीब सत्रह सौ करोड़ रुपए होती। वहीं भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में यह कीमत सोलह सौ छियाली स करोड़ रुपए तय की गई है। इस तरह एनडीए सरकार ने जहां छत्तीस राफेल फाइटर जेट की डील उनसठ हजार करोड़ रुपए में की है, वहीं यूपीए सरकार इसके लिए एक लाख उनहत्तर हजार लाख करोड़ रुपए का भुगतान करती। भारत की सुरक्षा जरुरतों को पूरा करने के लिए मोदी सरकार एक फाइटर जेट की मूल कीमत के ऊपर नौ हजार आठ सौ पचपन करोड़ रुपए अतिरिक्त खर्च कर रही है। इसके अलावा फ्रांस अब भारत को मुफ्त में बत्तीस जगुआर बमवर्षक विमान देगा।
राफेल लड़ाकू विमान का समझौता तो यूपीए शासन के दौरान हो जाना चाहिए था। लेकिन वह दस वर्षों में इसको अंजाम तक नहीं पहुंचा सकी। जबकि सुरक्षा के मद्देनजर उंसकी जरूरत थी। जाहिर है कि यूपीए सरकार ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह नहीं किया। उसके द्वारा छोड़े गए अनेक कार्यों को वर्तमान सरकार ने पूरा किया। राफेल समझौता भी इसी में शामिल है। कांग्रेस अपनी नाकामी के कारण हींन भावना से ग्रसित है। इसीलिए राफेल समझौते में मीन मेख निकाल रही है। जबकि यह किसी कंपनी के साथ नहीं बल्कि दो देशों के बीच का समझौता था।
लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव के दौरान हुई फजीहत से कांग्रेस ने कोई सबक नहीं लिया है। संसदीय इतिहास में पहली बार विपक्षी नेता के बयान पर दो देशों को अधिकृति सफाई देनी पड़ी। इसके आधार पर राहुल गांधी का बयान गलत साबित हुआ। उन्होंने फ्रांस के राष्टपति से अपनी कथित मुलाकात की चर्चा की थी, जिसमें उन्होंने समझौते की गोपनीयता से इनकार किया था। लेकिन फ्रांस के राष्ट्रपति ने ऐसी किसी मुलाकात से ही इनकार कर दिया। वैसे भी सामरिक समझौतों की जानकारी राहुल गांधी को देने का कोई औचित्य भी नहीं था।
राहुल गांधी कहते है कि यूपीए में इस विमान के लिए पांच सौ बीस करोड़ में डील हुई थी। मोदीं जी फ्रांस जाते है। वहाँ जाने क्या होता है, जादू से कीमत बढ़ जाती है। एक सामान्य समझ तो यही है कि करीब दस वर्ष में कीमत एक जैसी नहीं रहती। दूसरे राहुल की सरकार इतनी ईमानदार और धन बचाने वाली थी तो विमान आये क्यों नही ।राहुल गांधी के बयान पर फ्रांस ने कहा कि भारत के साथ दो हजार आठ में किया गया सुरक्षा समझौता गोपनीय है।दोनों देशों के बीच रक्षा उपकरणों की संचालन क्षमताओं के संबंध में इस गोपनीयता की रक्षा करना कानूनी रूप से बाध्यकारी है।कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सदन को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए पीएम मोदी और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया। सदन में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से लोकसभा अध्य्क्ष सुमित्रा महाजन को दिए गए इस नोटिस में आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री मोदी ने बीस जुलाई को अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए सदन को गुमराह करने वाला बयान दिया। खड़गे ने कहा लोकसभा में कार्यवाही एवं प्रक्रिया के नियम दो सौ बाईस के तहत सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया है।
यूपीए सरकार के रक्षा मंत्री ए के एंटनी और प्रणब मुखर्जी ने सदन में छह बार कहा था कि सुरक्षा के चलते वो इस डील के बारे में जानकारी नहीं दे सकते।
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के आरोपों को रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने खारिज कर दिया था। मोदी ने भी साफ कर दिया था कि डील पूरी तरह पारदर्शी हुई है। लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने बताया कि उन्हें राहुल गांधी के खिलाफ इस मसले पर चार विशेषाधिकार हनन नोटिस प्राप्त हुए हैं. उन्होंने बताया कि वह नोटिस के आधार पर कार्रवाई के बारे में अभी निर्णय लेंगी।
राफेल डील के मुद्दे पर बीते अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के दौरान राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर सीधे आरोप लगाए लगाया था। कहा कि अपने कारोबारी मित्रों को फायदा पहुंचाने के लिए सीक्रेसी का हवाला देकर सरकार सच्चाई छुपा रही है। वहीं, दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण के खिलाफ विशेषाधिकार हनन नोटिस दिए गए है। पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी और कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि प्रधानमंत्री और रक्षामंत्री ने राफेल डील पर संसद को गुमराह किया है और ये विशेषाधिकार का हनन है। इसलिए कांग्रेस इसे लेकर लोकसभा में नोटिस देगी। लेकिन कांग्रेस की यह रणनीति उल्टी पड़ रही है। वस्तुतः भ्र्ष्टाचार या घोटाले के विरुद्ध जंग के लिए नैतिक बल की जरूरत होती है। कांग्रेस ने पहले राफेल के दाम पर अपना दमन चमकना चाहा। यह दांव नही चला तो मुकेश अंबानी का नाम ले आई। मुकेश विश्व में विशिष्ठ स्थान रखने वाले उद्योगपति है। यदि उनका नाम किसी बाहरी समझौते से जुड़ता है तो इसमें क्या गलत है। कांग्रेस में इसका घोर अभाव है। इसलिए उसके सभी अस्त्र उंसकी मुसीबत बढ़ाने वाले साबित होते है। दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी की निजी विश्वसनीयता आज भी कायम है।







