नीति से प्रेरित राजनीति

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डॉ दिलीप अग्निहोत्री
भारतीय चिंतन में कर्मयोग और सन्यास का वृहत का वृहत विश्लेषण किया है। इन पर अमल करने वालों की अनवरत परंपरा रही है। अपनी अपनी प्रवृत्ति, प्रारब्ध और गुरु की कृपा से लोग विभिन्न मार्गों का अनुशरण करते रहे। इसमें किसी एक पथ का न महिमा मंडन किया गया, न उसी को परमसत्ता तक पहुंचने का एकमात्र उपक्रम घोषित किया गया। यही पंथ और धर्म के बीच अंतर है। उत्तर प्रदेश में इस समय गोरक्षा पीठ के महंत योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री है। पांच बार लोकसभा के सदस्य रहे। इसके बाद भी अपने सन्यास धर्म का भी पालन करते रहे। समाज सेवा और सन्यास दोनों के बीच उन्होंने समन्वय स्थापित किया है। भारतीय परंपरा में यह कोई नई बात नहीं है। इस प्रकार के उदाहरणों की कमी नहीं है।
गोरक्षा पीठ की भी यही विशेषता रही है। यहां के सन्यासियों ने समाज के प्रति अपने दायित्वों का सदैव निर्वाह किया है। यही विशेषता योगी आदित्यनाथ को सन्यास मार्ग पर ले आई। धर्म के प्रति उनका सहज अनुराग था। लेकिन समाज सेवा में भी उनकी रुचि थी। इस कारण सन्यास ग्रहण करने के प्रति उनका संकोच था। कुछ दिन पहले योगी आदित्यनाथ ने स्वयं इसका खुलासा किया। महंत अवैद्यनाथ को उनमें अपने गुरु के दर्शन होते थे। वह उन्हें सन्यासी बनाना चाहते थे। लेकिन तब विद्यार्थी आदित्यनाथ को लगता था कि सन्यासी बनने के बाद कोई कोई कार्य नहीं किया जाता। महंत अवैद्यनाथ ने उन्हें गोरक्षा पीठ आने का निर्देश दिया। यहां आकर योगी आदित्यनाथ ने समाजसेवा के विभिन्न प्रकल्प देखे। इसके बाद उनके विचार बदल गए। उन्होंने सन्यास और समाजसेवा दोनों का व्रत लिया। जिस पर वह आज तक अमल कर रहे हैं।
योद्धा योगी पुस्तक में उनसे संबंधित अनेक जानकारी मिलती है। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने विधान सभा के केंद्रीय कक्ष में आयोजित एक समारोह में वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण कुमार द्वारा लिखित पुस्तक ‘योद्धा योगी’ का लोकार्पण किया। पूर्व में प्रकाशित मूल पुस्तक ‘योगी आदित्यनाथः दाॅ राइज आॅफ सैफरन सोशलिस्ट’ अंग्रेजी में है, जिसका अंग्रेजी से हिन्दी में अनुवाद युवा पत्रकार प्रेम शंकर मिश्र ने किया है। विधान सभा अध्यक्ष श्री हृदय नारायण दीक्षित ने भी सन्यास, योग और समाज पर सारगर्भित विचार व्यक्त किये। राम नाईक ने कहा कि योगी आदित्यनाथ के जीवन पर आधारित पुस्तक सारगर्भित है। यह वह बोलती हुई किताब है, जिसकी भाषा भी सुन्दर है और शीर्षक आकर्षित करने वाला है। पुस्तक इस बात का भी परिचय देती है कि कैसे एक सामान्य व्यक्ति सन्त से लेकर मुख्यमंत्री पद तक की यात्रा करता है। योगी जी समाज कार्य करने वाले सन्त हैं। उनकी कार्यशैली प्रभावित करने वाली है तथा दूसरों के अच्छे एवं तर्कसंगत सुझाव मानना उनके व्यक्तित्व का अद्भुत पक्ष है।
उन्होंने कहा कि पुस्तक को दो भाषाओं तक सीमित न रखते हुए अन्य भाषाओं में भी अनुवाद होना चाहिए। राज्यपाल ने इलाहाबाद का नाम कुम्भ से पहले प्रयागराज करने के निर्णय की सराहना की। राम नाईक ने मुख्यमंत्री के गुरू महन्त अवैद्यनाथ को याद करते हुए कहा कि वे लोक सभा में उनके सहयोगी रहे हैं। महन्त अवैद्यनाथ वास्तव में योगी जी के शिल्पकार हैं और समाज सेवा का संकल्प योगी जी को अपने गुरू से विरासत में मिला है। योगी जी पांच बार लोक सभा के सदस्य रहे हैं।
उनका एक साहित्यिक पक्ष भी है, उन्होंने गोरखनाथ मंदिर से प्रकाशित योगवाणी सहित हठयोगः स्वरूप और साधना सहित अन्य कई पुस्तकें भी लिखी हैं। वे सन्त के साथ-साथ एक लोकप्रिय जनप्रतिनिधि भी हैं इसलिए आम आदमी को उनके जीवन की जानकारी होना आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस का आयोजन किया। राम नाईक समारोह के माहौल को खुशनुमा बनाने में निपुण है। यहां भी उन्होंने ऐसा ही उलाहना दिया। कहा कि पुस्तक में उनका मात्र एक चित्र है। इसके अलावा और कहीं नाम तक नहीं है।जबकि संविधान के अनुसार राज्यपाल ही मुख्यमंत्री को नियुक्ति करता है और पद की शपथ भी दिलाता है। इसलिए उनको भी श्रेय मिलना चाहिए।
विधान सभा अध्यक्ष शहृदय नारायण दीक्षित ने पुस्तक की सराहना करते हुुए कहा कि देश के ऐसे व्यक्तित्व पर पुस्तक लिखी गई है जिसके बारे में लोग विदेश में भी जानना चाहते हैं। पुस्तक में योगी आदित्यनाथ के जीवन के विभिन्न पक्षों पर प्रकाश डाला गया है। योगी आदित्यनाथ इसलिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वे राष्ट्रवाद और भारतीय संस्कृति के पक्षधर हैं।
 आज राजनीति में निजी हैसियत की आकांक्षा से प्रेरित होकर आने वालों की कमी नहीं है। जबकि विशुद्ध समाजसेवा की भावना का होना अपरिहार्य है। अन्यथा व्यक्ति समाज सेवा के नाम पर अपने और अपने परिवार की सेवा में लगा रहता है। योगी आदित्यनाथ को गोरक्षा पीठाधीश्वर के रूप में बड़ी प्रतिष्ठा प्राप्त है। वह राजनीति में इसके लिए नहीं आये है। समाज के प्रति अपने दायित्वों के विस्तार की भावना से उन्होंने यह क्षेत्र भी चुना है। सन्यास का पालन करते हुए उन्होंने संसद से सड़क तक जनहित को अपनी दिनचर्या में शामिल किया था। आज मुख्यमंत्री के रूप में वह प्रदेश को विकसित बनाने के लिए दिन रात मेहनत कर रहे हैं।

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