दिलीप अग्निहोत्री
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की शांति सौहार्द की पेशकश दिलचस्प है। पाकिस्तानी निजाम को वह बखूबी जानते है। यहां बाकायदा आतंकी संघठन चलते है। इन्हें सेना का प्रशिक्षण और संरक्षण मिलता है। भारत और अफगानिस्तान में सीमापार से आतंक को संचालित किया जाता है। पाकिस्तान के भीतर भी एक एक दूसरे के विरोध में हिंसक हमले हुआ करते है। बड़ी संख्या में आतंकियों ने चुनाव लड़ा था। इसका मतलब है कि व्यवस्था में उनके चुनाव लड़ने और फिर कानून निर्माण प्रक्रिया का हिस्सा बनने पर प्रतिबंध नहीं है। इसी से पाकिस्तान के संवैधानिक तंत्र को हकीकत का अनुमान लगाया जा सकता है। इमरान के शपथ ग्रहण समारोह में भी अनेक दिग्गज आतंकी सरगना शामिल हुए थे। सेना और राजनीतिक पार्टियों के लोगों के साथ वह भी हमराह थे।चुनाव प्रचार में इमरान सेना की हिमायत और नरेंद्र मोदी के विरोध में लगातार बोलते रहे थे। आज भी उन्हें सेना का प्रतिनिधि माना जा रहा है। उंसकी मर्जी ले बिना चलने की हैसियत इमरान में नहीं है। आतंकी संघठनों पर वह कारगर प्रतिबंध नहीं लगा सकते।
यही कारण है कि अमेरिका ने भी पाकिस्तान को आतंकवाद का संरक्षण देने वाला बताया है। अमेरिका का सीधा आरोप है कि आतंकवादी गुटों को पाकिस्तान में सुरक्षित पनाह मिलती है। इमरान को इन संगठनों पर दबाव बनाने के लिए कदम उठाने चाहिए।
कुछ समय पहले आतंकवाद पर अमेरिका के गृह मंत्रालय ने रिपोर्ट जारी की थी। इसमें पाकिस्तान को उन देशों में शामिल किया गया है, जहां आतंकवादियों को सुरक्षित पनाहगाहें दी जाती हैं। कंट्री रिपोर्ट ऑन टेररिज़्म के नाम से जारी इस रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कदम नहीं उठा रहा है। लश्कर-ए तैयबा और जैश-ए मोहम्मद जैसे आतंकवादी संगठनों के खिलाफ भी कोई कार्यवाई नहीं कि गई।
पाकिस्तान से ही इन आतंकवादी संगठनों की फंडिंग हो रही है। भारत की नीति बिल्कुल स्पष्ट है। पाकिस्तान को आतंकवाद रोकना होगा। तभी वार्ता के लिए माहौल बनेगा। करीब तीन वर्ष पहले नरेंद्र मोदी पाकिस्तान गए थे। दस वर्ष बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली पाकिस्तान यात्रा थी। में लाहौर की यात्रा की थी और इसके बारे में पहले से घोषणा नहीं की गयी थी। इस यात्रा से संबंधों में सुधार की उम्मीद थी। लेकिन पाकिस्तान अपनी हरकत से बाज नहीं आया। दो हजार सोलह में भारतीय सैन्य अड्डों पर आतंकवादी हमलों के बाद भारत ने वार्ता रोक दी थी। आतंवाद रोकने की शर्त लगा दी थी।
इमरान खान ने कहा कि अपने सभी पड़ोसियों से अच्छे रिश्ते बनाएंगे। शांति के बिना देश तरक्की नहीं कर सकता है। इसलिए पड़ोसियों से वार्ता की जाएगी। अठ्ठाइस हजार अरब रुपये का कर्ज है। शांति के अलावा हालात सुधारने का कोई विकल्प नहीं है।
पाक के नए विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने भारत के साथ बातचीत की पेशकश रखते हुए दोस्ती का हाथ बढ़ाया। उन्होंने कहा कि भारत और पाक को यथार्थवादी दृष्टिकोण अपनाते हुए आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि पीएम मोदी ने इमरान को पत्र लिखकर दोनों देशों के बीच वार्ता शुरू करने के संकेत दिए हैं। कुरैशी ने कहा कि दोनों देशों के बीच पेचीदा मसले हैं उन्हें हल करने में परेशानी आ सकती हैं। साथ ही यह भी मान लेना चाहिए कि कश्मीर एक सच्चाई भारत ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के उस दावे को खारिज किया है जिसमें उन्होंने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पत्र के जरिए वार्ता को पेशकश की है।
सूत्रों के मुताबिक मोदी ने इमरान को भेजे पत्र में लिखा है कि भारत पाकिस्तान के साथ शांतिपूर्ण पड़ोसी रिश्तों के लिए प्रतिबद्ध है। भारत पड़ोसी पाकिस्तान के साथ सकारात्मक और सार्थक साझेदारी की आशा करता है। चिट्ठी में आतंकवाद मुक्त दक्षिण एशिया के लिए काम करने पर जोर दिया गया है। लेकिन बातचीत शुरु करने के संबंध में फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है।
गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच करीब दो साल से कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है। भारत का कहना ठीक है कि हम पाकिस्तान के साथ बातचीत के लिए हमेशा तैयार है। लेकिन इसकेलिए पाकिस्तान को आतंकवाद पर रोक लगानी होगी। जाहिर है कि इमरान खान को सबसे पहले आतंकवाद को समाप्त करना होगा। यह कार्य केवल बातों से नहीं होगा।







