सिद्धू को कांग्रेस का संवेदनहीन समर्थन

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डॉ दिलीप अग्निहोत्री
सिद्धू का पाकिस्तान जाना और मणिशंकर अय्यर की कांग्रेस में वापसी एक ही समय पर हुई। इसी से कांग्रेस के वर्तमान  वैचारिक आधार का अनुमान लगाया जा सकता है। अय्यर ने पाकिस्तान जाकर जयचंद की याद ताजा कर दी। वहां उन्होंने कहा था कि नरेंद्र मोदी को हटाने के लिए आप ही कुछ करिए। सिद्धू पाकिस्तानी सेना प्रमुख को झप्पी देने गए थे। इसका खासतौर पर शहीदों के परिजनों ने विरोध किया है। कांग्रेस ने दोनों के बचाव में मोर्चा भी खोल दिया। इसमें भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही निशाने पर थे। मतलब साफ है। मुद्दा चाहे जो हो, कांग्रेस नेतृत्व नरेंद्र मोदी के अलावा कुछ सोचने की स्थिति में ही नहीं है।
सिद्धू के बचाव में कांग्रेस ने  यह भी नहीं सोचा कि पंजाब में शहीदों के परिजन भी नाराज है। जबकि मुख्यमंत्री अमरिंदर ने सिद्धू की हरकतों को गलत बताया है। पहले भी दोनों में कई बार टकराव हुआ है। इस बार अमरिंदर ने जनमानस की भावनाओं के अनुरूप सिद्धू के खिलाफ मोर्चा खोला है।  पाकिस्तानी सेना प्रमुख जावेद वाजवा गले लगाने की पंजाब में निंदा की जा रही है। दिल्ली में बैठे कांग्रेस हाईकमान ने इसे समझने की कोशिश ही नहीं की। उसने तो इसे भी मोदी के विरोध का मुद्दा मान लिया। कहा कि जब नरेंद्र मोदी पाकिस्तान जा सकते है , तब सिद्धू का जाना अनुचित कैसे है। कांग्रेस की यह दलील उंसकी दयनीय होती सोच का परिणाम है। प्रधानमंत्री जब कोई कार्य करते है ,तब उसे विदेश नीति के संदर्भ में देखने की जरूरत होती है। पंजाब के एक मंत्री से उनकी तुलना वैचारिक दिवालियापन है।
मोदी की पाकिस्तान यात्रा की तुलना सिद्धू से करना बेमानी है। यदि मोदी की यात्रा की तुलना करनी ही है तो पूर्व प्रधानमंत्रियो से करनी होगी। कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र संघ ले जाना, ताशकंद और शिमला समझौता, जिसमें हमारे सैनिकों द्वारा खून बहाकर जीती गई जमीन वार्ता की मेज पर लौट दी गई थी। लेकि सिद्धू का बचाव करते हुए कांग्रेसी प्रवक्ता मोदी तक ही रुक गए। बताना चाहिए कि पूर्व कांग्रेसी प्रधानमंत्रियों से सिद्धू की तुलना क्यों नही की, क्यों मोदी विरोध के चक्कर में शहीदों के परिजनों की भावनाओं को आहत किया गया।
जबकि पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने जमीनी स्थिति समझी। उन्होंने शहीदों के परिजनों की भावनाओं को सम्मान दिया। पाकिस्तान में सिद्धू की हरकतों को अनुचित बताया।
पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने  सिद्धू के जनरल बाजवा से गले मिलने को गलत ठहराया है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख के साथ स्नेह दिखाकर सिद्धू ने गलत किया है। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आगे कहा मेरे अपने रेजिमेंट ने एक मेजर और दो जवान पिछले महीने खोए और हर रोज कोई न कोई जवान गोलियों का शिकार हो रहा है। यह सब जावेद वाजवा के निर्देश से हो रहा है। सिद्धू  कह रहे है कि वह निजी दोस्ती के कारण गए थे। मतलब उनकी नजर में निजी दोस्ती देश के सम्मान से बड़ी होती है। सुनील गवास्कर , कपिल देव आदि दिग्गज इमरान के ज्यादा समकालीन और सिद्धू के मुकाबले ज्यादा अच्छे दोस्त है। सचिन तेंदुलकर भी उनके अच्छे दोस्त है। लेकिन इन सभी ने देश के सम्मान के सामने निजी दोस्ती को महत्व नहीं दिया। एक तो राष्ट्रीय शोक ,दूसरे सीमापार का आतंकवाद , सिद्धू से ज्यादा सम्मानित भारतीय खिलाड़ी वहां नहीं गए। सिद्धू ने कहा कि  इमरान खान के साथ अपनी निजी दोस्ती को लेकर गए थे। कितनी गहरी दोस्ती थी ,यह भी दुनिया ने देख लिया। सिद्धू ने शॉल पहनाया, इमरान ने देखा तक नही।
कांग्रेस ने इसे भी मोदी विरोध की राजनीति का मुद्दा बनाने का प्रयास किया। उसके प्रवक्ता ने कहा अगर पाकिस्तान जाना देशद्रोह है तो सबसे पहले तो हमारे प्रधानमंत्री देशद्रोही हैं। राष्ट्रवाद का पाठ तब याद कराना चाहिए जब प्रधानमंत्री पाकिस्तान जाकर बिरयानी खाते हैं और उनके मंत्री पाकिस्तानी उच्चायोग में जाकर दावत खाते है।
दिल्ली में बैठे कांग्रेसी यदि मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह का बयान देख लेते तो नासमझी की बातों से बच जाते। निजी दोस्ती पर अनेक लोग जाते है। लेकिन सिद्धू की हरकत से शहीदों के परिजन दुखी हुए। अमरिंदर सिंह ने यही कहा है। विश्व में प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति की विदेश यात्रा विदेशी नीति के अनुरूप होती है। नवाज और नरेंद्र मोदी के बीच विश्वास बहाल हुआ था। लेकिन वहां की सेना बाधक बन गई। सिद्धू उसी सेना के प्रमुख से गले मिलकर लौटे है।
कांग्रेस प्रवक्ता नरेंद्र मोदी का नाम लेकर अपरोक्ष रूप से अन्य सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों पर लांछन लगा रहे होते है।  कांग्रेस ने सिद्धू का बचाव करके शहीदों के परिजनों का दुख बढ़ाया है।
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