डॉ दिलीप अग्निहोत्री
प्रधानमंत्री की उत्तर प्रदेश यात्रा करीब चौबीस घण्टे की थी, लेकिन इसकी गूंज आगामी आम चुनाव तक सुनाई देगी। आजमगढ़, काशी और मिर्जापुर से जहाँ उन्होंने विकास की सौगात दी, वही विपक्ष को भी निशाने पर लिया। ऐसा लगता है कि चुनौती बढ़ने से नरेंद्र मोदी अधिक उत्साहित हो जाते है। इधर योगी आदित्यनाथ के तेवर भी ऐसे ही रहते है। यह माना जा रहा था कि विपक्षी गठजोड़ से भाजपा नेताओं की परेशानी बढ़ेगी। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हौसले इस बात से अप्रभावित दिखाई दिए। उनकी आजमगढ़, काशी और मिर्जापुर यात्रा से यही प्रमाणित हुआ।
उन्होंने विकास को अपना प्रमुख मुद्दा बनाये रखा , इसी के बल पर विपक्षी गठजोड़ से मुकाबले का सन्देश भी दिया। जहाँ तक विकास की बात है, नरेंद्र मोदी की यात्रा ऐतिहासिक मानी जायेगी। खासतौर पर पूर्वांचल एक्सप्रेस वे, और वाण सागर बांध के लोकार्पण का सुरगामी प्रभाव दिखाई देगा। इसके अलावा काशी और मिर्जापुर में हजारों करोड़ रुपये की योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास इस पूरे क्षेत्र के विकास को नया आयाम देगा। इसी के साथ नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ ने चुनावी बिगुल भी फूंका है। इन्हें अपने कार्यो पर भरोसा है, वाहीन विपक्ष की उम्मीद गठजोड़ पर कायम है।
नरेंद्र मोदी ने आजमगढ़ में मुस्लिम महिलाओं की समस्या उठाई। सरकार उन्हें सम्मान और अधिकार दिलाना चाहती है। कांग्रेस के लिए यह वोट बैंक की सियासत का हिस्सा है। बाणसागर बांध को लेकर मोदी ने पिछली सरकारों के काम करने के ढंग पर सवाल उठाए। वह योजनाएं बना देते थे, आधी अधूरी तैयारी के साथ शिलान्यास करने को अपनी उपलब्धि समझते थे। लेकिन समय पर योजनाओं को पूरा करने में उनकी दिलचस्पी नहीं रहती थी। वाण सागर योजना ऐसी ही थी। मोदीं ने किसानों का मुद्दा भी उठाया। इसे लेकर विपक्ष पर निशाना लगाया।
मोदी ने मिर्जापुर के विकास की चार हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। जिनमें बाणसागर नहर परिजना और मेडिकल कॉलेज है। मिर्जापुर मेडिकल कॉलेज की आधारशिला रखा। परियोजनाओं में देरी का देश को भी आर्थिक रूप से नुकसान सहना पड़ता है। लगभग तीन सौ करोड़ के बजट से शुरू हुई ये परियोजना लगभग पैतीस हज़ार करोड़ रुपये लगाने के बाद पूरी हुई है। यहां सौ जन औषधि केंद्रों का भी लोकार्पण किया गया है। इससे गरीबों को बड़ी राहत मिलेगी। इस योजना की शुरुआत तत्कालीन बीजेपी शासनकाल में की गई थी। इस परियोजना का मुख्य बांध मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में बनाया गया था। दो हजार छह में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसका उद्घाटन किया था। इसके अंतर्गत उत्तर प्रदेश के जनपद मिर्जापुर में पच्छत्तर हजार हेक्टेयर जमीन तथा इलाहाबाद जनपद में चौहत्तर हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी और लगभग सत्रह लाख किसान इससे लाभान्वित होंगे। अन्न उत्पादन में भी भारी वृद्धि होगी।
इसके पहले नरेंद्र मोदी ने काशी में करीब एक हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। चुनार पुल का भी मोदी ने लोकार्पण किया। बालूघाट से मेडिया घाट पर पक्का पुल का शिलान्यास दो हजार सात में तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने किया था। उस समय तीन हजार नौ सौ पैंतालीस प्वाइंट ग्यारह लाख थी लेकिन कार्य में विलंब होने के कारण इस लागत बढ़कर छह हजार उनतीस प्वाइंट इक्यावन लाख रुपये हो गई। शिलान्यास के समय ही इस पुल का नामकरण क्षेत्र के प्रथम विधायक राजनारायण सिंह के नाम पर राजनारायण सिंह सेतु रखने की घोषणा की गई थी। इसके अलावा मोदी ने ढाई सौ करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले मेडिकल कॉलेज की मिर्जापुर में आधारशिला रखी।
इस प्रकार यह तय हुआ कि मोदी विकास के बल पर विपक्ष को जबाब देने के लिए तैयार है। सपा की मुलायम सिंह यादव सरकार ने चुनार पुल का शिलान्यास किया था। इसके बाद पांच वर्ष बसपा और पांच वर्ष सपा की सरकार रही। इसका निर्माण पूरा नहीं हो सका। अब यदि शिलान्यास के हिसाब से मुलायम इसे अपना पुल बताए तो बेतुका ही लगेगा। इसी प्रकार यूपीए, सपा ,बसपा बाणसागर नहर परियोजना पूरी नहीं कर सकी। पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर भी स्थिति स्पष्ट हो गई है। इस प्रकार मोदी और योगी को पिछली सरकारों की कार्यशैली पर प्रश्न उठाने का मौका मिला। सिंचाई परियोजनाओं के प्रति उनकी गंभीरता नहीं थी। मोदीं ने सामाजिक मुद्दे भी उठाए। आरोप लगाया कि विपक्ष के अड़ंगे से मुस्लिम महिलाओं के साथ इंसाफ नहीं हो रहा है। इस प्रकार सबका साथ और सबका विकास के आधार पर भाजपा पुनः जनविश्वास हासिल करने का मंसूबा बना रही है।







