नेहरु आज भी लोगों के दिलों में ज़िंदा हैं

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संस्मरण : पंकज चतुर्वेदी

आज पंडित जवाहरलाल नेहरु का जन्मदिन है, आज उनकी 119वीं जयंती है। कभी सारे मुल्क में इसे “बाल दिवस” के रूप में मनाया जाता “था “। मनाया तो आज भी जाता है लेकिन आज महज खानापूर्ति है। नेहरु से जुडी दो घटनाएँ – सन 2007 में पाकिस्तान के अक्राची के पुस्तक मेले के उद्घाटन अवसर पर सिंध असेम्बली के स्पीकर चीफ गेस्ट थे। उन्होंने अपने भाषण में पाकिस्तान के युवाओं को भारत से सीखने की सलाह दी, बेहद हिम्मत का काम था। अपने चिरपरिचित दुश्मन से सीख की बात करना, खाने की मेज पर अनौपचारिक चर्चा में उनसे मैंने पूछा कि सन 47 में अफसरशाही, सेना, पुलिस, आवाम सब कुछ एक ही तरह की ट्रेनिंग का था जो दोनों तरफ बाँट गया लेकिन पाकिस्तान पिछड क्यों गया ? उनका जवाब था – ” आपके यहाँ नेहरु थे। जिन्होंने संस्थाएं बनायीं, उनमे से कई को काम करने कि ऑटोनोमी दी।

आपके यहाँ इंसान से ज्यादा मजबूत संस्थाएं हैं, सो आप मजबूत हैं और उसका कारण नेहरु का विजन था।
पिछले साल मिस्र यानि इजिप्ट गया था, वहाँ पुस्तक मेला के दरवाजे पर जो फिल्म चल रही थी। उसमें नासेर के साथ नेहरु ही थे, वहाँ भारत की पहचान बम्बई के सिनेमा और पंडित नेहरु हैं, युवा पीढ़ी भी गुटनिरपेक्ष आंदोलन, नेहरु और इजिप्ट से ताल्लुक को याद करती हैं। एक 24 साल का युवा ऐसा भी आया जिसका नाम नेहरु था — कालेज के रिकार्ड में भी।

कुछ लोग नेहरु से चिढते हैं। उन्हें बदनाम करने के लिए किस्से व फोटो गढते हैं, असल में उनकी खीज का कारण आज़ादी के बाद भारत का धर्म निरपेक्ष स्वरुप, हिंदू एक्ट में ऐसे बदलाव जिसमें औरतों को सामान अधिकार तथा पोंगापंथ के स्थान पर वैज्ञानिक सोच की स्थापना के लिए नेहरु द्वारा किये गए प्रयास हैं। नेहरु ने अपने जीवनकाल में जितनी संस्थाएं स्थापित कीं। वह आज भी भारत का गौरव विश्व में बढ़ा रही हैं।

कभी दिल्ली में स्कूलों में बाल दिवस पर मेले लगते थे, इंडिया गेट पर बुक फेयर लगता था लेकिन राजनीतिक विद्वेषता के चरम में नफरत ने यह भुला दिया कि नेहरु जी भारत की आज़ादी के सिपाही रहे वह भी कोई 35 साल तक, उन्होंने ग्यारह साल से ज्यादा जेल में बिताया और आज़ाद भारत के पहले प्रधान मंत्री थे .
नेहरु को समझने के लिए नेशनल बुक ट्रस्ट की कुछ किताबे जरुर पढ़ें व बच्चों को अवश्य पढाएं

अविस्मरणीय नेहरु – पी डी टंडन
नेहरु : संघर्ष के दिन (संपादन अर्जुन देव)
जवाहर लाल नेहरु – तारा अली बेग

देशराज गोयल की दो किताबें – बात जवाहरलाल की और याद जवाहर लाल की
इस देश को आधुनिक, वैज्ञानिक और समर्थ नज़रिया और दिशा देने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु को नमन –उन्हें पढ़ें , उन्हें कर्म में जिन्दा रखें।
प्रस्तुतु फोटो – नेहरु जी के बचपन का है, दूसरा फोटो कम देखने को मिलेगा जिसमें बाल जवाहर का उपनयन यानि जनेऊ संस्कार हो रहा है , तीसरे में वे अपनी बहन विजयलक्ष्मी पंडित के साथ हैं।

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