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    Home»ब्लॉग»Current Issues

    भारत-रूस सहयोग का सार्थक संवाद

    By May 23, 2018 Current Issues No Comments5 Mins Read
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    डॉ दिलीप अग्निहोत्री
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस यात्रा अनेक सन्दर्भो में उपयोगी रही। इसका द्विपक्षीय और वैश्विक महत्व है। इसके माध्यम से मोदी ने राष्ट्रीय हित और स्वतंत्र विदेश नीति को सुनिश्चित किया है। राष्ट्रीय हितों को बढ़ावा देने वाले द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर अनौपचारिक सहमति बनी। वही यह सन्देश भी दिया गया कि किसी अन्य देश की वजह से भारत रूस संबंधों र असर नहीं पड़ेगा। नरेंद्र मोदी  रूस की एक दिवसीय यात्रा पर सोचि पहुंचे थे। यहां दोनों नेताओं की अनौपचारिक शिखर बैठक में ईरान परमाणु डील से अमेरिका के पीछे हटने के फैसले के असर सहित वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों के अलावा ईरान के साथ परमाणु समझौते से अमेरिका के हटने पर खास तौर पर चर्चा की गई। व्लादिमीर पुतिन ने दोबारा राष्ट्रपति चुने जाने बाद  मोदी को अनौपचारिक मुलाकात का न्योता दिया था।  रूस के सोचि में दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच यह मुलाकात कई मायनों में अलग होने की संभावना थी।
    अनौपचारिक वार्ता का मकसद दोनों देशों के बीच दोस्ती और विश्वास के आधार पर अहम वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर साझा राय बनाना था।  इसमें सफलता मिली है । दोनों  नेताओं नेबिना किसी एजेंडे के चार से छह घंटे वार्ता की।  द्विपक्षीय मुद्दों पर विचार-विमर्श बहुत सीमित थे। लेकिन इसके दूरगामी सार्थक परिणाम होंगे।अपनी इस रूस यात्रा को लेकर पीएम मोदी ने ट्वीट रूस के साथ संबंधो में सुधार की उम्मीद व्यक्त की थी।
    उन्होंने ने ठीक कहा कि भारत और रूस के बीच विशिष्ट सामरिक भागीदारी ऊंचाई तक पहुंच गई है।  अनौपचारिक वार्ता के बाद प्रधानमंत्री मोदी और रूस के राष्ट्रपति ने बोचारेव क्रीक से ओलम्पिक पार्क तक नाव पर सैर भी की। पुतिन के साथ बातचीत अत्यंत सफल रही। दोनों नेताओं ने भारत-रूस के रिश्तों के व  विभिन्न वैश्विक मुद्दों पर  विचार विमर्श किया। मोदी और पुतिन की यह पहली अनौपचारिक बैठक थी। इसका आयोजन काला सागर तट के इस शहर में किया गया था। इस यात्रा से  रणनीति भागीदारी और विकास के लिये आगे की दिशा तय करने में मदद मिलेगी। क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर बीच विशिष्ट सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों के बारे में विचार विमर्श हुआ। रणनीतिक भागीदारी के तमाम पहलुओं पर विचार विमर्श किया। अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया  गया।  रूस के साथ रक्षा संबंधों को भारत ने द्विपक्षीय मसला माना है। अमेरिका के एक कानून के तहत रूस से ऊंची कीमत वाले रक्षा सामान खरीदने पर अमेरिकी प्रतिबंध का सामना करना पड़ सकता है। रुसी एस-चार सौ ट्रायंफ प्रक्षेपास्त्र रक्षा प्रणाली खरीदेगा। मोदी ने शंघाई सहयोग संगठन में भारत को स्थाई सदस्यता दिलाने में बड़ी भूमिका के लिए रूस को धन्यवाद दिया। शंघाई सहयोग संगठन में आठ देश सदस्य हैं जिसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सैन्य और आर्थिक सहयोग बढ़ाना है।
    अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलिय और ब्रिक्स पर दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं।  संयुक्त राष्ट्र, ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका को मिलाकर बने ब्रिक्स में भी एक दूसरे का समर्थन सहयोग करेंगे। पिछले वर्ष द्विपक्षीय व्यापार में काफी वृद्धि हुई और इस वर्ष पहले कुछ महीनों में ही इसमें सत्रह प्रतिशत की वृद्धि हुई है। जाहिर है कि चीन के बाद बिना औपचारिक एजेंडे वाली नरेंद्र मोदी की रूस यात्रा सफल रही है। इसका प्रभाव अमेरिका, चीन ,ईरान ,पाकिस्तान,पर भी पड़ेगा। इनसे संबंधित कई मसलों पर भारत को रूस का सहयोग मिलेगा। मोदी का यह दौरा इसलिए भी खास है क्‍योंकि पुतिन ने चौथी बार राष्‍ट्रपति का कार्यकाल संभालने के बाद खुद पीएम मोदी को रूस की यात्रा पर आने का निमंत्रण दिया था।
    मोदी यहां पर पुतिन के रिजॉर्ट गए थे । सोचि में ही पुतिन ने जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल से भी अमेरिका को लेकर बातचीत की है। बीते दस दिनों में पुतिन यहां पर कई देशों के राष्‍ट्राध्‍यक्षों से मुलाकात कर चुके हैं। हालांकि इस वर्ष मोदी और पुतिन के बीच यह पहली बैठक थी।  इस वर्ष के अंत तक राष्‍ट्रपति पुतिन भी भारत की यात्रा पर आएंगे। भारत तेल  जरूरत का काफी तेल ईरान ही सप्‍लाई करता है।  ईरान पर लगे प्रतिबंध से स्थिति में  बदलाव आया है। इसको लेकर भारत नई रणनीति पर विचार कर रहा है।  भारत और रूस दोनों ही आतंकवाद के पीड़ित हैं । इसके खिलाफ रणनीति पर सार्थक चर्चा हुई । स्वभाविक रूप से इसमें पाकिस्तान ,अफगानिस्तान, सीरिया आदि की स्थिति भी शामिल थी। आतंकवादी इस स्थिति का लाभ उठा रहे है।  भारत-रूस के बीच परमाणु क्षेत्र में सहयोग का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। रूस इसमें भारत की मदद कर रहा है। यह ओचारिक एजेंडे पर आधारित यात्रा नहीं थी। इसलिए कोई साझा घोषणापत्र जारी नहीं हुआ। लेकिन  माना जा रहा है कि परमाणु सहयोग को बढ़ाने पर भी सहमति बनी है। मोदी की यात्रा से आतंकवाद के खिलाफ रूस को भारत का समर्थन मिला है। इससे पुतिन का मनोबल बढ़ा है। वह भारत के इस विचार से सहमत है कि आतंकवाद के प्रत्येक रूप खराब है। इनको समाप्त करने के लिए साझा प्रयास की आवश्यकता है।

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