सारे देश को गोबर, गाय, बजरंगबली जैसे गैरजरूरी मसलों में उलझा कर आखिरकार निरूपा का (नाम बदल दिया गया है) अंतिम संस्कार कर दिया गया। 15 साल की, दसवीं क्लास की बच्ची के शरीर में चिता पर जलाने को वैसे कुछ बचा नहीं था। आगरा दिल्ली से दूर नहीं है लेकिन निर्भया की लाश का इस्तेमाल कर सत्ता परिवर्तन करने वालों तक निरूपा की चीख पहुंची नहीं।
आगरा के नौमील मुहल्ले की बच्ची मंगलवार 18 दिसंबर को दोपहर के 1:30 बजे स्कूल से घर लौट रही थी. जगनेर रोड पर जा रही थी साइकिल से. जब वो अपने गांव से कुछ 500 मीटर की दूरी पर थी, तब उसे दो लड़कों ने रोक लिया. बाइक पर सवार लड़कों ने उसे धर दबोचा और उस पर पेट्रोल डाल दिया. फिर उस पर आग लगा दी.
लड़कों ने पहचान छुपाने के लिए हेलमेट पहन रखा था. हमला भी पीछे से किया था. कुछ नहीं पता कि वो कौन थे. या किस वजह से लड़की पर हमला किया.
निरूपा के पापा हरेंद्र सिंह जूते के कारखाने में काम करते हैं. उन्होंने बताया कि, ‘जलाने के बाद उसे हाईवे के किनारे खाई में फेंक दिया गया. हमें नहीं मालूम उसे मारने की कोशिश किसने की होगी. हमारी किसी से कोई दुश्मनी नहीं है. वो भी अभी सदमे में है और बोलने की हालत में नहीं है.’
खाई में बहुत देर पड़े रहने के बाद एक व्यक्ति ने उसे बचाया और पुलिस को ख़बर कर दी. पुलिस की मदद से उसे एस. एन. मेडिकल कॉलेज ले जाया गया. जहां पता चला कि उसके शरीर का 70% भाग जल गया है. उसे दिल्ली के सफदरजंग हॉस्पिटल में रेफ़र किया गया है. जहां आज उस बच्ची की मौत हो गयी।
अभी तक अपराधी पकड़े नहीं गए। हालांकि जो पुलिस अपने निरीक्षक की हत्या के आरोपियों को 22 दिन बाद भी पकड़ नहीं पाई वह इस दलित बच्ची की नृशंष हत्या के आरोपियों को क्या पकड़ पाएगी?

आगरा के एसएसपी अमित पाठक कहा कि पुलिस की कई टीमें तैयार की गईं हैं जो इस मामले की जांच करेंगी. एक और अफ़सर ने कहा कि पूनम की क्लास के दो बच्चों से बात हुई है. पुलिस अभी पूछताछ के लिए कई जगहों पर रेड करेगी. एडीजीपी अजय आनंद ने कहा, ‘बहुत ही दुखद घटना है. जिन्होंने भी ऐसा किया उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा. डीजीपी साहब ने भी अपनी संवेदना जताई है और हमें गुनहगारों को जल्दी पकड़ने का आदेश दिया है.
ठीक ऐसी ही एक घटना उत्तरांचल से भी है। यहां तो बच्ची को आग लगा कर अपराधी ने लड़की की मां को फोन कर यह भी कह दिया कि मैंने तुम्हारी लड़की को आग लगा दी वहनों तो बचा लो।
उत्तराखंड: लड़की को जिंदा जलाकर आरोपी ने किया था उसकी मां को फोन, कहा- बेटी जला दी है बचा सकती हो तो बचा लो
पीड़िता की मां ने बताया कि वो अपनी बेटी का इंतजार कर रही थी जो कि कॉलेज में प्रेक्टिकल देने के लिए गई थी। इतने में एक फोन आया और फोन करने वाले ने कहा कि मैंने आपकी बेटी को आग लगा दी है, बचा सकती हो तो बचा लो।
‘आपकी बेटी को आग लगा दी है बचा सकती हो तो बचा लो’
पीड़िता की मां ने बताया कि वो अपनी बेटी का इंतजार कर रही थी जो कि कॉलेज में प्रेक्टिकल देने के लिए गई थी। इतने में एक फोन आया और फोन करने वाले ने कहा कि मैंने आपकी बेटी को आग लगा दी है, बचा सकती हो तो बचा लो। इसके साथ ही पीड़िता की मां ने कहा कि ये पहली बार नहीं है जब आरोपी शख्स ने उसकी बेटी को परेशान किया है। इससे पहले भी करीब ढाई साल पहले बेटी को परेशान किया था लेकिन तब बात खत्म हो गई थी। वो लड़का मेरी बेटी से उम्र में काफी बड़ा है और शादीशुदा भी है। उसने मेंरी दुनिया उजाड़ दी। बता दें कि पीड़िता के पिता की कैंसर के चलते पहले ही मौत हो चुकी है। वहीं घर की आर्थिक हालत भी ठीक नहीं है।
क्या है मामला:
दरअसल पूरा मामला पौड़ी जिले के कफोलस्यूं पट्टी के एक गांव का है। जहां 18 वर्षीय लड़की बीएससी की प्रयोगात्मक परीक्षा देकर स्कूटी से घर लौट रही थी। रास्ते में गहड़ गांव के मनोज सिंह उर्फ बंटी उसका पीछा करने लगा। कुछ देर बाद एक सुनसान जगह में कच्चे रास्ते पर उसने लड़की को रोक लिया और जबरदस्ती करने की कोशिश करने लगा। जिस पर लड़की ने उसका विरोध करना शुरू कर दिया। छात्रा का विरोध से गुस्साए युवक ने छात्रा पर पेट्रोल छिड़क कर आग लगा दी और वहां से फरार हो गया। कुछ देर बाद जब वहां से गुजर रहे एक ग्रामीण ने जली हुई छात्रा को देखा तो इसकी सूचना पुलिस को दी। जानकारी मिलती ही मौके पर पहुंची पुलिस ने 108 एंबुलेंस की मदद से छात्रा को जिला चिकित्सालय पौड़ी भेजा। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद छात्रा को मेडिकल कॉलेज श्रीनगर रेफर किया गया। फिलहाल झुलती छात्रा दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल में भर्ती है और वहीं उसका इलाज जारी है
रौंगटे खड़े करने वाली इन घटनाओं पर दिल्ली मौन है। जाहिर है कि महिलाओं पर अत्याचार के खिलाफ बातें महज नारे, लफ्फाजी और अपना हित साधने के जरिये हैं।
– पंकज चतुर्वेदी







