कहीं कोई अंदर का तो नहीं?

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श्रीलंका में हुए सीरियल ब्लास्ट से भारत को चिंतित होने की वाकई जरुरत है। हमला कही भी हो उसकी निंदा जरुरी बेहद है, अब भारत की सुरक्षा के लिए सर्वाधिक चिंता की बात है कि पिछले सप्ताह श्रीलंका की राजधानी कोलंबो सहित कई नगरों में हुए सिलसिलेवार बम विस्फोटों के तार भारत के केरल से जुड़ गए हैं। इस हमले में आईएस का हाथ साबित हो रहा है, जिसके बारे में कहा जा रहा था कि इराक और सीरिया से उसके पांव उखड़ गए हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अपनी जांच के सिलसिले में केरल के कासरगोड और पल्लकड़ में बीते रविवार को छापे मारे।

श्रीलंका पुलिस का मानना है कि एक आत्मघाती हमलावर मोहम्मद हाशिम का भारत के कई राज्यों में आना-जाना रहा है। एनआईए ने इसी पृष्ठभूमि के आधार पर छापेमारी की। माना जा रहा है कि छापों में मोबाइल फोन, सिम कार्ड, मेमरी कार्ड, पेन ड्राइव, मलयालम और अरबी में लिखी डायरियों के साथ विवादित इस्लामी प्रवचनकर्ता जाकिर नाईक की पुस्तकें और धार्मिक भाषणों वाली डीवीडी बरामद हुई हैं। बांग्लादेश में आतंकी घटनाओं के बाद जाकिर को भारत छोड़ना पड़ा। फिलहाल उसने मलेशिया में शरण ले रखी है।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि श्रीलंका में हुए बम विस्फोट इस दृष्टि से भी भारत की सुरक्षा के लिएपरेशानियां पैदा कर सकते हैं कि हमले के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार आतंकी समूह नेशनल तौहीद जमात (एनटीजे) वैचारिक रूप से तमिलनाडु तौहीद जमात से प्रेरित है। यह संगठन कट्टरपंथी विचार बहावी का प्रचार-प्रसार करता है, और इसे सऊदी अरब धन मुहैया कराता है। हालांकि इस संगठन की प्रकृति और कार्यपण्राली को ऊपरी तौर पर देखने से इसे आतंकी नहीं कहा जा सकता लेकिन इसके माध्यम से जो धर्म प्रचार हो रहा है, उसकी परिणति जेहाद के रूप में सामने आ रही है।

चिंता की बात यह भी है कि बहावी विचारधारा का मुख्य स्रोत सऊदी अरब का समर्थन अमेरिका और पश्चिमी देश करते हैं। जाहिर है कि इससे आतंकवाद के विरुद्ध नियंतण्र लड़ाई की धार कुंद हो रही है। अमेरिका द्वारा कुछप्रमुख देशों को ईरान से तेल आयात नहीं करने के आदेश को भी इसी आलोक में देखा जा रहा है।

ईरान से तेल आयात नहीं करने का आशय सऊदी अरब से तेल खरीदना है। प्रकारांतर में इस अमेरिकी नीति की अंतिम परिणति जेहादी आतंकवाद को ही मजबूत करेगी जो सऊदी अरब के बहावी आंदोलन से ओत प्रोत है। यह खतरा बड़ा है इसलिए भारत को अपनी सुरक्षा को चाक-चौबंद रखने के लिए ऐसे संगठनों को प्रतिबंधित करना होगा जो धर्म के नाम पर जेहाद का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। 

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