लंका में फिदाइन रावण का हमला

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श्रीलंका में आतंकवादी हमलों के बाद की स्थिति में अभी कोई सुधार नहीं देखने को मिला है। नफरत के सौदागरों ने लंका को फिर दहलाने में कोई कोर- कसर नहीं छोड़ी है। इस बार दोबारा हुए फिदायन हमले में 15 लोगों की मौत हो गयी है जिसमे मरने वालों में 6 बच्चे और 3 महिलाएं भी शामिल हैं। बता दें कि श्रीलंका सरकार ने सीरियल ब्लास्ट से जुड़े संदिध की तलाश और तेज कर दी हैं।

शनिवार को सुरक्षाबलों ने बट्टी कलोवा में सीरियल ब्लास्ट की जिम्मेदारी लेने वाले आतंकी संगठन आईएस और नेशनल तौहीद जमात एनटीजे से जुड़े ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापे मारे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान आतंकियों में सुरक्षाबलों पर गोलीबारी भी कर दी। एक हमलावर ने खुद को भी उड़ा लिया इसमें 15 लोगों की मौत हो गई। वहीं नेशनल तौहीद जमात और ‘जमाते मिलातू इब्राहिम’ नाम के दो संगठन सरकार ने बैन कर दिए हैं।

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फ़िलहाल पडोसी श्रीलंका में आतंकवादी हमलों के बाद स्थिति अभी तक डरावनी बनी हुई है। तीन दिनों के अंतराल के बाद फिर विस्फोट होना बताता है कि जेहादी आतंकवाद वहां किस तरह पांव पसारने में सफल हो गया था। राजधानी कोलंबों से 40 किलोमीटर दूर पूर्वी शहर पुगोदा में न्यायालय के खाली भूमि पर हुए विस्फोट में यद्यपि कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन है तो यह गंभीर घटना ही। ईस्टर पर्व के मौके पर आतंकवादी वारदातों के बाद तीन विस्फोट हो चुके हैं और जगह-जगह विस्फोट बरामद हो रहे हैं।

खतरा इतना बड़ा है कि अंतत: नागरिक विमानन प्राधिकरण ने श्रीलंका के हवाई क्षेत्र में ड्रोन और मानव रहित विमानों के उड़ानों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का निर्णय लिया है। जितनी सूचनाएं श्रीलंका केंद्रित आतंकवादी खतरों के बारे में मिल रही है उसमें धरती, आकाश और समुद्र तीनों ओर से सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता किया जाना अपरिहार्य हो गया है। देश भर से अब तक करीब 80 संदिग्धों के गिरफ्तार होने की सूचना है। इनसे पूछताछ की जितनी सूचनाएं बाहर आई हैं वो हैरत में डालतीं हैं।

आतंकवादी नेटवर्क पूरे देश में फैलता रहा और सुरक्षा एजेंसियों को भनक तक नहीं लगी। नेशनल तौहीद जमात या एनटीजे की गतिविधियों की सूचनाएं पुलिस एवं प्रशासन को मिलती रही, कई जगह उनके बारे में लिखित शिकायत भी दर्ज कराई गई मगर पता नहीं क्यों इसे गंभीरता से नहीं लिया गया? लापरवाही का आलम ही था कि भारत द्वारा तीन बार हमलों की चेतावनी को भी हल्के में लिया गया। जाहिर है, रक्षा सचिव एवं पुलिस प्रमुख के बाद पुलिस के नीचे स्तर के अधिकारियों पर कार्रवाई होने वाली है।

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अब ऐसा लग रहा है कि श्रीलंका सरकार ने एक बार देश की पूरी तरह सफाई करने का अभियान चला दिया है। हजारों की संख्या में सेना को उतारा जाना और व्यापक तलाशी अभियान से यह पता चलता है लिट्टे के अंत के बाद सुरक्षा को लेकर लापरवाह हो चुका देश जैसे आतंकवादी हमलों का आघात लगते ही चौकस हो गया है। सीमा पार की गतिविधियों पर किसी देश का वश नहीं हो सकता है किंतु अपनी भौगोलिक सीमाओं के अंदर तो वह कार्रवाई कर ही सकता है।

श्रीलंका की दशा में भारत के लिए भी सबक छिपा है। हमारे यहां भी आतंकवाद और सुरक्षा को लेकर बड़ा वर्ग विकृत धारणा रखता है। इसे मुद्दों से ध्यान भटकाने की चाल कहा जा रहा है। यह मानसिकता ठीक नहीं। श्रीलंका में आतंकी हमला और उसके बाद आ रही सूचनाओं के मद्देनजर भारत को भी अपने रवैये में बदलाव की जरूरत है। 

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