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    ताज को बंद कर दो या जमींदोज कर दो

    By July 13, 2018 Current Issues No Comments3 Mins Read
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    सही मायनों में कहा जाये तो किसी भी समाज में विरासत का अपना एक अलग महत्व है। क्योंकि विरासत ही हमें अपने अतीत के प्रति गर्व का बोध कराती है, तो उत्कृष्ट कार्यों के लिए प्रेरित भी करती है। भारत जैसे देश में यह बात और भी महत्वपूर्ण तब हो जाती है जब यहां पर ऐसी विरासतों की भरमार हो, जो देशवासियों को ही नहीं विदेशियों को भी चमत्कृत करती हैं।

    कहने का तात्पर्य हर विरासत का अपना इतिहास अपनी उत्कृष्टता अपना महत्व अपनी शान है जो श्रेष्ठतम कार्यों के लिए प्रेरित करते हैं और गौरव कि भी अनुभूत कराती है। प्रधानमंत्री ने बेहद सीधे शब्दों में इस बात को यूं कहा कि हमें अपनी विरासत के प्रति गर्व और उसके संबंध में जानकारी होनी चाहिए ।

    उन्होंने विरासत से संरक्षण को भी रेखांकित किया है ऐसे में यह विडंबना ही है कि दुनिया की गिनी-चुनी अनोखी विरासतों में एक ताजमहल की देखभाल के प्रति लगातार बढ़ती जा रही उदासीनता से क्षुब्ध होकर सर्वोच्च न्यायालय को कहना पड़ा कि ताजमहल की सलामती के लिए, अगर इसकी देखभाल नहीं कर सकते तो इसे बंद कर दो या जमींदोज कर दो।

    यह समस्या अचानक पैदा नहीं हुई आगरा के चमड़ा उद्योग से उत्सर्जित अपशिष्ट पदार्थों के कारण पैदा विभिन्न प्रकार के प्रदूषण के कारण ताज के अस्तित्व को खतरा बनने के बाद बहुत पहले से की जा रही है। कुछ वर्षों पूर्व इसकी इमारत को हो रही क्षति दिखाई भी दे रही थी। जिसे फौरी तौर पर तो ठीक कर दिया गया, लेकिन इस की सलामती के मुकम्मल इंतजाम आज भी नहीं किया गए हैं। यह तब जबकि हाल के वर्षों के दौरान प्रदूषण की समस्या और अधिक गहरी हुई है।

    ताज की विशेषता कई मायनों में अलग स्थान रखती हैं जहां एक और इससे एक बादशाह की मोहब्बत की दास्तान जुड़ी है वहीं इसके निर्माण स्थापत्य कला आदि पक्षों ने भी इसे दुनिया में अलग पहचान दी हैं यही कारण है कि विदेशों से भारत आने वाले साधारण और विशिष्ट दोनों ही प्रकार के लोग ताज का दीदार करना नहीं भूलते। यह बेवजह तो नहीं है। उनके लिए आज भी अपनी जिंदगी में ताज को देखना और उसकी यादों को अपने साथ ले जाना कहीं ना कहीं राहत का एहसास दिलाता है।

    राजनितिक द्वेष वश कुछ लोग आज भी इसके इतिहास पर दावेदारी करने में जुटे हैं यह बात मूल समस्या से कहीं न कहीं ध्यान हटाती है। ताजमहल जैसी विरासतें तो सही मायने में पूरे समाज के लिए कीमती धरोहर हैं। उसमें विवाद कैसा! मिलकियत का दवा कैसा! ध्यान रखने की बात तो यह है कि ताजमहल में होने वाले नुक्सान और उसकी इमारत से ज्यादा भारतीय व्यवस्था की समझ को और समर्थन का प्रतीक है। उसका सम्मान घटाता है किसी भी दृष्टि से अच्छी बात नहीं कही जा सकती। इसलिए जरूरी है कि ताज की सलामती के लिए जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए।

    -नीतू सिंह

    @taj mahal

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