आतंक से आज़ाद कश्मीर !

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file photo

कश्मीर घाटी में आतंकवाद से निपटने की दिशा में एक बड़ी कामयाबी का संकेत तब मिला। जब यह खबर आई कि पाकिस्तान पोषित आतंकी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन और लश्कर-ए-तैयबा का गढ़ रहे कश्मीर घाटी के बारामुला जिले को रक्षा मंत्रालय ने आतंकवाद मुक्त पहला जिला घोषित कर दिया है।

बारामुला के सफियाबाद में बुधवार को लश्कर-ए-तैयबा के तीन आतंकियों को मार गिराए जाने के बाद सेना ने कहा कि अब इस जिले में एक भी आतंकी जिंदा नहीं बचा है। इस सिलसिले में सेना ने रक्षा मंत्रालय को इस आशय की जानकारी में भेजी रिपोर्ट में भी ऐसा ही दावा किया है। बारामुला और सोफिया में अलग-अलग तलाशी अभियान चलाया गया। जिसके दौरान छह आतंकियों को मार गिराया। बारामूला में मारे गए तीन आतंकियों में एक लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर और दो पाकिस्तानी नागरिक थे। यदि ऐसा है तो निश्चित रूप से यह भारतीय सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी मानी जाएगी।

सुरक्षाबलों के पिछले 3 सालों तक चले अभी तलाशी अभियान और आतंकी ठिकानों पर कड़ी निगरानी का ही नतीजा है कि वहां स्थानीय दहशत गर्दी पर काफी हद तक अंकुश लग सका है। आतंकी हमलों में भी निरंतर कमी आती गयी है।

यह स्थानीय दहशतगर्दों के हौसले पस्त होने का ही संकेत है कि बारामुला जिला आज आतंकवादियों से मुक्त हो गया है। अभी तक जम्मू में आतंकियों का अपने मकसद में कामयाबी इसलिए भी मिल जाती थी क्योंकि उन्हें स्थानीय लोगों का समर्थन भी मिल जाया करता था। कुछ धार्मिक कट्टरपंथी स्थानीय युवाओं को भी आतंक से प्रेरित कर उन्हें हाथ में पत्थर और बन्दुक उठाने के लिए प्रेरित करते रहे थे लेकिन जब से सीमा पार से आतंकवादियों के लिए आने वाले पैसे पर रोक लगाने में सफलता मिली है और मुठभेड़ में मारे जाने वाले नौजवानों के जनाजे की नमाज में तकरीर और सोशल मीडिया पर प्रसारित करने वाले सन्देश पर प्रतिबन्ध लगा है उससे युवाओं को गुमराह करने के तरीके में कमी आयी है।

अब वहां चाकू व पत्थरबाजी की भीड़ दिखाई नहीं देती और अलगाववाद के नारे नहीं लगते हैं और आतंकियों की धमकी के बावजूद साने युवा सेना और पुलिस में भर्ती हो रहे हैं। यह सारे संकेत यही साबित करते हैं कि वहां के सारे लोगों का मन अब बदल रहा है और वह मुख्या धारा में लौट रहे हैं।

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