Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Saturday, September 12
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ब्लॉग»Current Issues

    जब तक ठोकेंगे नहीं तब तक छोड़ेंगे नहीं

    By February 19, 2019Updated:February 19, 2019 Current Issues No Comments5 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    file photo
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 567
    डॉ दिलीप अग्निहोत्री
    पुलमावा की गिनती कश्मीर घाटी के उन शहरों में है, जहाँ अलगाववादियों के लिए अपनी गतिविधियां चलाना आसान होता है। उन्हें यहां बेस मिल जाता है। ऐसे में एक बार यह साबित हुआ कि अलगाववाद और आतंकवाद की समस्या कश्मीर घाटी के चार पांच शहरों तक सीमित है। यह पूरे जम्मू कश्मीर राज्य की समस्या नहीं है। जम्मू और लद्दाख में अलगाववादियों को पनाह नहीं मिलती है। बिडंबना यह कि जम्मू और लद्दाख की अपेक्षा हमेशा कश्मीर घाटी के जिलों को ज्यादा तरजीह मिलती रही है। इस प्रदेश के राजस्व में जम्मू क्षेत्र का योगदान सर्वाधिक है। लेकिन जब व्यय की बात आती है, तब घाटी को वरीयता मिल जाती है। इसी प्रकार जम्मू से ज्यादा विधानसभा क्षेत्र कश्मीर घाटी के लिए रखे गए है। इससे राज्य की विधानसभा में घाटी का दबदबा रहता है। ऐसे में समस्या के समाधान हेतु कुछ बड़े कदम उठाए जाने की आवश्यकता है। इनमें राज्य को तीन हिस्सों में बांटने का निर्णय होना चाहिए। इसके बाद सीमित क्षेत्र में आतंकवादियों के खिलाफ कार्यवाई करना आसान होगा। जम्मू और लद्दाख को भी न्याय मिल सकेगा।
    यह सही है कि आतंक और जिहाद वैचारिक समस्या है। लेकिन यह भी सही है कि चीन की सीमा में यह लाचार हो जाती है। चीन के दो मुस्लिम बहुल प्रदेशों में नमाज, रोजा आदि पर प्रतिबंध है। पुलिस का विशेष दस्ता यह देखता है कि सरकार के इन नियमों का कहीं उल्लंघन न हो। पाकिस्तान में प्रशिक्षित आतंकियों की हिम्मत नहीं है कि चीन की तरफ आंख उठा कर देख लें। नाइन इलेवन को अमेरिका पर आतंकी हमला हुआ। वह दिन और आज का दिन पाकिस्तानी आतंकियों ने अमेरिका की तरफ देखने की हिम्मत नहीं दिखाई। ऐसे ही भारत को कठोरता दिखानी होगी। सीमा पार के आतंकवाद को बर्दाश्त नहीं करना चाहिए। इसके लिए प्रत्येक संभव कदम उठाने होंगे।
    यह सही है कि पुलवामा आतंकी हमले के बाद सरकार राष्ट्रीय भावना के अनुरूप कदम उठा रही है। प्रधानमंत्री ने सेना को निर्णय करने का अधिकार दिया। सरकार ने कश्मीर के छह अलगाववादी नेताओं की सुरक्षा वापस लेने का फैसला किया है। इसके अलावा अलगाववादी नेताओं से अन्य सरकारी सुविधाएं भी वापस ली जाएगी। इन अलगाववादी नेताओं में मीरवाइज उमर फारुक, अब्दुल गनी बट, बिलाल लोन, हाशिम कुरैशी और शब्बीर शाह शामिल हैं। सरकार की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है, किसी भी अलगाववादी को सुरक्षाबल अब किसी सूरत में सुरक्षा मुहैया नहीं कराएंगे। अगर उन्हें सरकार की तरफ से कोई अन्य सुविधा दी गई है, तो वह भी तत्काल प्रभाव से वापस ले ली जाएगी। अलगाववादियों की सरकारी गाड़ियाँ भी वापस ले ली जाएंगी।
    बता दें कि अलगाववादी नेताओं सैयद अली गिलानी और मोहम्मद यासीन मलिक को पहले से ही कोई सुरक्षा नहीं दी गई थी। इनकी सुरक्षा पर करीब ग्यारह करोड़ रुपए सालाना खर्च होता है। पाकिस्तान के खिलाफ आर्थिक मोर्चे पर कड़ी कार्रवाई की है। भारत ने पाकिस्तान से आयात होने वाले सभी सामानों पर सीमा शुल्क यानी कस्टम ड्यूटी तत्काल प्रभाव से बढ़ाकर दो सौ प्रतिशत कर दी है।
    पाकिस्तान को दिए गए मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा भी वापस लिया जा चुका है। सरकार की यह भी कठिनाई है कि उसे विपक्ष का जैसा समर्थन मिलना चाहिए था, वह नहीं मिल रहा है। पुलवामा हमले के बाद राहुल गांधी ने आतंकियों के खिलाफ कार्यवाई पर सरकार को समर्थन देने का वादा किया था। लेकिन सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस सहित कई विपक्षी पार्टियों के स्वर बदल गए। बताया जाता है कि कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस चुनावी समीकरण को महत्व देने लगे। इनका कहना था कि आतंकियों को मारने की जगह गिरफ्तार किया जाए।  क्योंकि ऑपरेशन में बेगुनाह कश्मीरी मारे जा सकते हैंं। जबकि भाजपा ने कहा ऐसे में हमारे जवान मारे जा सकते हैं। कांग्रेस के अनुसार आम कश्मीरी को खतरे में डालने की हिमायत नहीं कि जा सकती।
    अमेरिका सहित अनेक देशों ने इसे मात्र कुछ आतंकियों की गुस्ताखी नहीं माना है। इनके अनुसार पाकिस्तान में सेना और गुप्तचर संस्था आईएसआई के स्तर पर आतंकी संघटनो को संरक्षण और समर्थन मिलता है। पाकिस्तान में बाकायदा उनके प्रशिक्षण शिविर चलते है। जिसमें सेना के लोग उनको हमले की ट्रेनिंग देते है। यह पाकिस्तान का छदम्म युद्ध है। इसके पहले अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस में हुए आतंकी हमलों में पाकिस्तानी संघठनों की भूमिका उजागर हुई थी। अमेरिका ने जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में हुए आतंकवादी हमले की निंदा की है। विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान जैसे देशों से आतंकवादियों को सुरक्षित पनाह और समर्थन नहीं देने की अपील की है।  पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद हमले का गुनाहगार बताया गया है।
    अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि वह किसी भी रूप में आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए भारत सरकार के साथ काम करने को प्रतिबद्ध है। अमेरिका सहित कई अन्य देश लंबे समय से पाकिस्तान पर आतंकवादी गुटों को सुरक्षित पनाहगाह देने का आरोप लगाते रहे हैं। कुछ महीने  पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पाकिस्तान पर अरबों डॉलर हासिल करने के बाद  अमेरिका को धोखा देने का आरोप लगाया था और सुरक्षा सहायता में कटौती की घोषणा की थी।
    यह सही है कि अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार पाकिस्तान को चेतावनी दी है, उंसकी सहायता भी कम की गई है। लेकिन हकीकत जानने के बाद जो कठोरता दिखानी चाहिए थी, वह नहीं दिखाई गई। ऐसे में भारत को इस्राइल का सहयोग लेना चाहिए। वह इसके लिए तैयार भी है। आतंकवाद को जबाब देने में उसे महारथ हासिल है। सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए इस्राइल ने विशेष इंतजाम किए है। भारत और इस्राइल मिलकर बेहतर कार्य कर सकते है। इसके अलावा पाकिस्तान के बलूचिस्तान, सिंध में अलगाववादियों को समर्थन देकर भी पाकिस्तान को सबक सिखाया जा सकता है। युद्ध अंतिम विकल्प हो सकता है। युद्ध के बाद ताशकंद और शिमला जैसे समझौते पाकिस्तान का मनोबल बढाते है।

    Keep Reading

    The future belongs to clean, green, and sustainable energy: A. K. Sharma

    आने वाला समय स्वच्छ, हरित व टिकाऊ ऊर्जा का: ए. के. शर्मा

    नालसा का एलएडीसी सिस्टम खत्म करने का फैसला: क्या गरीब कैदियों से छिन जाएगा न्याय का सहारा?

    68,500 Teacher Recruitment: Candidates lay siege to Minister's residence, demanding implementation of reservation orders.

    68500 शिक्षक भर्ती: आरक्षण आदेश लागू करो, मंत्री आवास पर अभ्यर्थियों का घेराव

    Nepal Flood Tragedy: The Most Harrowing Incident of Devastation

    नेपाल बाढ़ त्रासदी: तबाही का सबसे दर्दनाक हादसा

    रक्षाबंधन: परंपरा, पहचान और बाजारवाद का संगम

    सिद्धांतों की बलिवेदी में सत्ता का बलिदान देने वाला जननायक

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    Bollywood’s ‘Singham’ Ajay Devgn brings prestige to Haridwar International Ayurveda.

    बॉलीवुड के ‘सिंघम’ अजय देवगन ने बढ़ाया हरिद्वार इंटरनेशनल आयुर्वेद का गौरव

    September 11, 2026
    New NIXI-APNIC Partnership to Strengthen Internet Security in India

    14 साल बाद भारत में लौटा APNIC सम्मेलन, NIXI के साथ नई साझेदारी से मजबूत होगी देश की इंटरनेट सुरक्षा

    September 11, 2026
    Prime PR honored as ‘Best PR Agency’ at the Quality Mark Awards 2026.

    प्राइम पीआर को क्वालिटी मार्क अवॉर्ड्स 2026 में मिला ‘बेस्ट पीआर एजेंसी’ का सम्मान

    September 11, 2026
    The divine devotion of Chhath showcased on the big screen for the first time; Tamannaah Bhatia wins hearts in the song 'Chhathi Maiya' from the film 'The Vvaan'.

    बड़े पर्दे पर पहली बार दिखी छठ की अलौकिक आस्था, ‘द व्वान’ के गाने ‘छठी मैया’ में तमन्ना भाटिया ने जीता दिल

    September 11, 2026
    'The Shape of Belonging': A documentary exploring new perspectives beyond ramps and lifts.

    ‘द शेप ऑफ बिलॉन्गिंग’: रैंप और लिफ्ट से आगे बढ़कर नई सोच तलाशती डॉक्यूमेंट्री

    September 11, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading