24 साल पहले इसरो के जिस शीर्ष वैज्ञानिक को पुलिस अपराधियों की तरह हाथों मे हथकड़ी लगाकर अपनी जीप में उठा ले गई थी और ठूँस दिया था जेल में, उस वैज्ञानिक को आज सरकार ने अपनी गाड़ी में बैठाकर बाइज़्ज़त घर भेजा। वो भी पचास लाख रुपये के ‘पश्चात्तापी चेक’ के साथ। तस्वीर में सरकारी गाड़ी से उतर रहे शख्स हैं नंबी नारायण। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के कमाल के वैज्ञानिक रहे नारायणन 1994 में बड़ी साजिश का शिकार हुए थे। जब उनकी प्रतिभा और अनुसंधान से खार खाए देसी-विदेशी ग़द्दारों ने उन्हें जेल भिजवा दिया था। पाकिस्तान को अंतरिक्ष तकनीक से जुड़ी ख़ुफ़िया सूचनाएँ देने का आरोप लगा था। सीबीआई जाँच बैठी तो मामला झूठा साबित हुआ और नारायणन बरी हुए।
देशद्रोह जैसे आरोप से देश की इस प्रतिभा का करियर तबाह हो गया। इस बीच नारायणन ने मुआवज़ा माँगा तो केरल सरकार के कानों मे जूँ तक न रेंगी। बाद मे कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाना पड़ा। बीते दिनों जस्टिस दीपक मिश्रा ने केरल सरकार को पचास लाख रुपये का मुआवज़ा देने के लिए कहा।उसी आदेश के क्रम में केरल के मुख्यमंत्री पी विजयन ने नंबी नारायणन को आज न केवल क्षतिपूर्ति का चेक सौंपा, बल्कि सरकारी गाड़ी से प्रोटोकॉल के तहत घर भेजकर पश्चात्ताप करने की कोशिश की। नंबी नारायणन ने अपने फेसबुक पर लिखा-अभी बहुत से लंबित काम निपटाने हैं…
सोचिए यह कैसा देश है…जिस वैज्ञानिक को सर-आँखों पर बिठाना चाहिए था, उसे हमने फ़र्ज़ी ख़ुफ़िया इनपुट पर जेल भेजकर ज़लील किया। जिस वैज्ञानिक के दिन प्रयोगशालाओं में बीतने चाहिए थे, उसे तमाम दिन और रातें सलाखों के भीतर काटनीं पड़ीं।
जिस वैज्ञानिक के काम पर कभी अमेरिका और रूस की अंतरिक्ष एजेंसियाँ फ़िदा रहीं हों, उसे देशद्रोह के झूठे केस में अंदर करने की क़ीमत सिर्फ 50 लाख।







