डॉ दिलीप अग्निहोत्री
ऐसा लगता है जैसे कांग्रेस ने अपने कुछ नेताओं को तीर्थयात्रा और कुछ को पाकिस्तान से हमदर्दी जताने पर लगाया है। पाकिस्तानी विदेश मंत्री के संयुक्त राष्ट्र संघ भाषण पर शशि थरूर का बयान ठंडा भी नहीं पड़ा था, नवजोत सिंह सिद्धू दुबारा सामने आ गए। उनकी नजर में पाकिस्तान बहुत अच्छा है, जबकि अपने ही देश का दक्षणी हिस्सा उन्हें नापसंद है।वैसे सिद्धू की इस बात के लिए प्रशंसा करनी चाहिए कि वह अपमानित होने के बाद भी हंसते रहते थे। पाकिस्तान ने उन्हें झूठा तक करार दिया था। लेकिन सिद्धू आज तक हंस रहे है। उन्हें इसके लिए कोई ग्लानि भी नहीं है।
सिद्धू ने लिटफेस्ट सम्मेलन में पाकिस्तान की यात्रा को दक्षिण भारत से बेहतर करार दिया। कहा कि पाकिस्तान में न भाषा बदलती है और न ही लोग बदलते हैं। जबकि दक्षिण भारत में जाने पर भाषा से लेकर खानपान तक सब कुछ बदल जाता है। आपको वहां रहने के लिए अंग्रेजी या तेलुगु सीखनी पड़ेगी लेकिन पाकिस्तान में ये जरूरी नहीं है।
सिद्धू का यह बयान भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय अवधारणा को अपमानित करने वाला है। भारत में भाषा और खान पान की विविधता है। लेकिन सांस्कृतिक चेतना एक जैसी है। यही चेतना दक्षिण के लोगों को स्वर्ण मंदिर और उत्तर के लोगों को तिरुपति तक ले जाती है। लेकिन सिद्धू जैसे लोगों को खाने पीने की समानता ज्यादा आकर्षित करती है। इसके लिए वह पाकिस्तान के आतंकी स्वरूप को भी नजरअंदाज करने को तैयार है। सिद्धू पंजाब के मंत्री है। उन्हें अपने दसितवों पर पर्याप्त ध्यान देना चाहिए। लेकिन इधर ऐसा लग रहा है, जैसे पाकिस्तान में उनकी दिलचस्पी ज्यादा हो गई है।

पाकिस्तान उन्हें बहुत पसंद आने लगा है। क्या इस आधार पर यह माना जाए कि उन्हें सीमापार के आंतकवाद पर कोई आपत्ति नहीं है। पाकिस्तान की तारीफ में इतना बोलने के बाद उन्हें सीमा पार के आतंकवाद की निंदा से परहेज क्यों है। क्यों वह भारत की इस नीति का दलगत सीमा से ऊपर उठकर समर्थन नहीं करते कि वार्ता के लिए पाकिस्तान को आतंक रोकना होगा। वह वार्ता की ऐसे हिमायत कर रहे है ,जैसे यह भारत की गलती है।
सिद्धू ने इस सम्मेलन में पाकिस्तान के सेना प्रमुख को गले लगाने का कारण बताया। कहा कि यह झप्पी राफेल डील की तरह नियोजित नहीं थी। यह सब कुछ अचानक ही हुआ। बातचीत के दौरान पाकिस्तान सेना प्रमुख ने सिखों के तीर्थस्थल करतारपुर साहिब कॉरिडोर को खोलने की बात कही। इसके बाद वे अपने आप को रोक नहीं पाए और उन्हें गले लगा लिया। लेकिन यह सच्चाई नहीं है। पाक सेना प्रमुख इमरान के शपथ ग्रहण में सभी से मिलते हुए चल रहे थे। सिद्धू उनके गले पड़ गए। सिद्धू कह रहे हैं कि उनसे बात हुई, जावेद वाजबा कह रहे है कोई बात नहीं हुई।
सिद्धू ने पाक यात्रा के बाद कहा था कि भारत-पाक सीमा से ढाई किमी. दूर करतार साहब के दर्शन के लिए द्वार खोलने को लेकर उनकी पाक आर्मी चीफ से बात हुई। पाकिस्तान की तरफ से स्पष्टीकरण जारी कर कहा गया है कि एक घटना से इसका फैसला नहीं हो सकता है। इसकी एक लंबी प्रक्रिया है और दोनों देशों के बीच बातचीत के बाद ही इस पर फैसला हो सकता है। सिद्धू ने गलत जानकारी दी है। सिखों के लिए यह कॉरिडोर खुलना आस्था का विषय है। सिद्धू ने इसके साथ खिलवाड़ किया है।
करतारपुर में गुरु नानक देव ने अपने जीवन के अठारह वर्ष व्यतीत किये थे। भारत और पाकिस्तान के बीच करतारपुर से लेकर गुरदासपुर जिले में स्थित डेरा बाबा नानक तक कॉरिडोर बनाए जाने का प्रस्ताव है, जो लंबे समय से अटका हुआ है। चार किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर सिख श्रद्धालुओं की यात्रा को आसान बना देगा। लेकिन पाकिस्तान इसमें अड़ंगा लगा रहा है। लगता है कि सिद्धू को ऐसी अड़ंगेबाजी, आतंकवादी करतूतें पसंद है।







