देश में प्रदूषण के लिहाज से प्लास्टिक को एक बड़ी समस्या माना जाता रहा है। जब भी पर्यावरण संरक्षण की बात चलती है तो सबसे पहले प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने की बात ही कही जाती है। इसी नीति पर चलते हुए देश के कई राज्य में पॉलिथीन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। यह अलग बात है कि प्रतिबंध लगने के बाद कुछ ही दिन तक तो पॉलिथीन के उपयोग पर प्रतिबन्ध लगती है, लेकिन बाद में खुलेआम हर जगह पॉलिथीन नजर आने लगती है। यही कारण है कि लंबे समय से पर्यावरण और देश के नीति निर्धारक ऐसी योजना बनाने में लगे हुए थे जिससे कि प्लास्टिक व पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाने की जगह उन्हें रिसाइकिल कर किसी अन्य कार्य में उपयोग किया जा सके। इसी सोच विचार का परिणाम है कि अब देश में प्लास्टिक को रिसाइकल करके सड़क निर्माण करने की योजना सामने आई है।
कहा जा रहा है कि रिसाइकिल प्लास्टिक से बनने वाली सड़क तारकोल और सीमेंट से बनने वाली सड़क से ज्यादा मजबूत होगी। देश में फिलहाल सबसे अधिक सड़क तारकोल और गिट्टी पत्थर के इस्तेमाल से बनाई जाती हैं। इसके बाद दूसरा स्थान सीमेंट की सड़कें बनाने का है लेकिन यह दोनों सड़कें एक दूसरे से विपरीत प्रकृति वाली होती हैं। तारकोल की सड़क पर पानी का बहाव उसे बर्बाद कर देता है, क्योंकि सीमेंट से बनने वाली सड़क पर अक्सर शुरुआती दौर में ढंग से पानी ना पड़े तो उसकी मजबूती नहीं आ पाती। साथ ही सीमेंट से बनने वाली सड़क पर गाड़ी के पहियों का तापमान तेजी से बढ़ता है। अगर थोड़ी भी आसावधानी हुई तो सीमेंट से बनी सड़कों पर गाड़ियों के फटने की वजह से हादसों की आशंका बनी रहती है।
कहा जा रहा है कि प्लास्टिक को रिसाइकल कर सड़क का निर्माण करने से पानी से होने वाली क्षति का नुकसान पर काबू पाया जा सकेगा। सीमेंट की सड़कों पर बढ़ते तापमान में होने वाली बढ़ोतरी की समस्या से निपटा जा सकेगा। तो यह भी हो सकता है कि प्लास्टिक से बनी सड़कें आंखों से ज्यादा मजबूत होंगी इसी तरीके से सड़क बनाने के लिए प्लास्टिक का उपयोग किया जा सकेगा और सुरक्षा भी की जा सकेगी पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक कदम बता रहे हैं।
प्लास्टिक पर प्रतिबंध मुश्किल:
इसमें कोई शक नहीं है कि प्लास्टिक आम जन जीवन में काफी असर डालने लगता है। प्लास्टिक और पॉलिथीन के बिना रोजमर्रा के कामकाज करने की कल्पना भी कठिन लगती है। असली समस्या तो यह है कि आप जड़ से लेकर दूध और दही तक तथा खाने के सामान आदि तमाम चीज प्लास्टिक पॉलिथीन की पैकिंग में ही मिलती हैं। सब्जी बाजार और किराने की दुकान पर भी दुकानदार पॉलिथीन में ही सामान देते हैं। ऐसे में प्लास्टिक पर पूरी तरह से रोक लगाना संभव तो नहीं है, लेकिन कठिन जरूर है, ऐसे में अगर रिसाइकिल बनाने के काम में उसका उपयोग कर लिया जाए तो निश्चित रूप से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में यह एक बड़ा काम हो सकता है, लेकिन इसके साथ ही कुछ आशंकाएं भी है जिन का निवारण किया जाना बहुत जरूरी है प्लास्टिक से बनी सड़क मजबूत हो सकती है दिखाओ भी हो सकती है और उसे उपयोग के बाद कूड़े में फेंके गए प्लास्टिक का पूर्व प्रयोग भी किया जा सकता है।
लेकिन जिस महत्वपूर्ण तथ्य पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वह यह है कि इस सड़क की वजह से होने वाले प्रदूषण का क्या होगा और उस पर कैसे रोक लगेगी। जब सड़क पर गाड़ी चलती है। तो घर्षण होता है इस घर्षण की वजह से सड़कों पर क्षरण भी होता है स्वभाविक रूप से प्लास्टिक रीसाइक्लिंग कर बनाई जाने वाली सड़क का भी ध्यान रखना होगा और यह स्थान काफी छोटे कण के रूप में होगा, उपयोग करने के बाद इसे कूड़े में फेंक दिया जाता है। ऐसे प्लास्टिक आमतौर पर बड़े ही आसानी से दिखने वाले टुकड़े के रूप में होता है ठीक है कि वह हजारों वर्षों तक पूरी तरह नष्ट नहीं होता, लेकिन देखने योग्य आकार में होने की वजह से उन्हें समेट कर एकत्र किया जा सकता है।
उन्हें रीसाइक्लिंग द्वारा उपयोग में लाया जा सकता है लेकिन प्लास्टिक के सड़क या पहियों के घर की वजह से होने वाला झाड़ चुकी काफी छोटे छोटे रूप में होगा इसलिए उन्हें भारतीय वायुमंडल में खट्टा कर पाना संभव नहीं हो सकेगा इस तरह की सड़कें शहरी क्षेत्र में तो बनेगी ही हाईवे के निर्माण में भी प्लास्टिक को लेकर सड़क बनाने का काम किया जाएगा।
कैंसर जैसी घातक बीमारियों को बढ़ावा देता है प्लास्टिक
शोधकर्ताओं का मानना है कि प्लास्टिक की सड़क के क्षरण से जो प्लास्टिक के कण वातावरण में निकलेंगे फिर सांस के साथ लोगों के शरीर में जाएंगे लंबे अंतराल में यह कल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की वजह बन सकते हैं। इसी तरह हाईवे पर रीसाइकिल्ड प्लास्टिक से सड़क बनाने पर खेती के उपजाऊ जमीन की उर्वरता प्रभावित हो सकती है।
आमतौर पर हाईवे के दोनों और खेत होते हैं और पहिए के घर्षण से होने वाले क्षरण की वजह से जो प्लास्टिक के कण उड़ेंगे वह सड़क के किनारे की खेतों की मिट्टी में मिल जाएंगे। लंबे दौर में इनकी वजह से धीरे-धीरे खेत की मिट्टी की उत्पादकता कम होने लगेगी। मतलब चाहे रीसाइकिल प्लास्टिक से शहरों में सड़के बनाई जाए या फिर हाईवे की बनाई जाए दोनों ही जगह लंबे समय में नुकसान ही पहुंचाएगा।
फिलहाल जरूरत इस बात की है कि प्लास्टिक को पूरी तरह से नष्ट करके करने की दिशा में चल रहे शोध को और तेज किया जाए। पिछले साल मई में खबर आई थी कि जर्मनी में ऐसे बैक्टीरिया को तैयार करने में सफलता मिली है जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना ही प्लास्टिक को 80 घंटे में पूरी तरह नष्ट कर देता है। इस तरह के शोध को और बढ़ावा दिए जाने की जरूरत है ताकि प्लास्टिक को पूरी तरह से नष्ट किया जा सके और पर्यावरण को दूषित प्रभाव से बचाया जा सके। प्लास्टिक की समस्या से छुटकारा पाने के लिए कभी भी स्थाई समाधान नहीं हो सकती यह तत्कालीन प्रबंध जरूर हो सकता है लेकिन इस समस्या का अंत नहीं और जरूरत इस समस्या के स्थाई समाधान की है।







