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    रामलीला से जीवंत होती आस्था

    By October 21, 2018 Current Issues No Comments3 Mins Read
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    डॉ दिलीप अग्निहोत्री
    मानवीय क्षमता की सीमा होती है। वह अपने ही अगले पल की गारंटी नहीं ले सकता। इसके विपरीत नारायण की कोई सीमा नहीं होती। वह जब मनुष्य रूप में अवतार लेते है, तब भी आदि से अंत तक कुछ भी उनसे छिपा नहीं रहता। लेकिन वह अनजान बनकर अवतार का निर्वाह करते है। भविष्य की घटनाओं को देखते है, लेकिन प्रकट नहीं होते देते। इसी की उनकी लीला कहा जाता है।
    रामलीला इसी भाव की रोचक प्रस्तुति होती है। समय बदला, तकनीक बदली ,लेकिन सदियों से रामलीला की यात्रा जारी है। भारत ही नहीं विश्व के पैसठ देशों में रामलीला होती है। प्रत्येक स्थान की अपनी विशेषता होती है। रामलीला के भी अनगिनत रूप है। यह इंडोनेशिया, मलेशिया जैसे देशों में भी खूब प्रचलित है। जहां लोग मजहबी रूप से मुसलमान है ,लेकिन सांस्कृतिक रूप में अपने को श्री राम का वंशज मानते है। यह मॉरीशस, त्रिनिदाद, फिजी,आदि अनेक देशों में प्रचलित है, जहाँ भारतीय श्रमिक राम चरित मानस की छोटी प्रति को पूंजी के रूप में लेकर गए थे। रामलीला उनकी भावनाओं से जुड़ी रही। भारत में रामलीला के विविध रूप रंग हैं। लखनऊ में पिछले दिनों इस संबन्ध में चर्चा हुई।
    उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने इसका उद्घाटन किया। रामलीला की नौटंकी शैली पर विशेष रूप से विचार किया गया। भारत के सुदूर व वनवासी क्षेत्रों तक इसे देखा जा सकता है।  रामायण एक अद्भुत ग्रंथ है। इसे लोग कथा, गीत, प्रवचन, कहानी तथा अन्य किसी न किसी रूप में प्रदर्शित कर आनन्दित होते हैं। राम कथा सुनना तथा देखना सागर में डुबकी लगाने जैसा होता है। विश्व की अनगिनत भाषाओं में राम कथा का लेखन हुआ है।
    रामलीला लोक नाटक का एक रूप् है। यह गोस्वामी तुलसीदास की कृति रामचरितमानस पर आधारित है। रामलीला का मंचन तुलसीदास के शिष्यों ने सबसे पहले किया था। ऐसा भी कहा जाता है कि उस दौरान काशी नरेश ने रामनगर में रामलीला कराने का संकल्प लिया था, तभी से रामलीला का प्रचलन देशभर में शुरू हुआ। नृत्य की विभिन्न शैलियों में भी  रामलीला होती है। दुनिया के पैंसठ देशों में रामलीला का मंचन होता है। इन सबका भाव एक है लेकिन प्रस्तुति विधि अलग अलग है।
    राम नाईक ने रामायण को अद्भुत कथा बताते हुए कहा कि राम का व्यक्तित्व हिमालय से ऊंचा एवं समुद्र से भी अधिक गहराई लिये हुए है। इसे सभी ने अपने-अपने ढंग से व्यक्त किया है। पुरानी एवं विलुप्त होती संस्कृति के माध्यम से रामायण का मंचन एवं नाट्य द्वारा प्रस्तुतिकरण अत्यन्त अनुकरणीय है। यह आश्चर्य का विषय है कि इनकी कथाएं इण्डोनेशिया तथा थाइलैण्ड जैसे अन्य देशों में भी प्रचलित एवं लोकप्रिय हैं। नौटंकी एवं कथक का संगम दिखाने का अद्भुत प्रयास है। कला के माध्यम से जीवन में सम्मान एवं ऊंचाईयों को प्राप्त किया जा सकता है। श्री राम मर्यादा पुरुषोत्तम थे। उनकी कथा का मंचन मनोरंजन के साथ ही प्रेरणादायक होता है।

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