योग से लेकर व्योम तक सहयोग

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डॉ दिलीप अग्निहोत्री
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा को उपलब्धियों के आधार पर ऐतिहासिक कहा जा सकता है। इसमें जल, थल और आकाश तक सहयोग बढ़ाने के करार हुए। पहली बार योग और असैन्य परमाणु तक पर साथ चलने पर सहमति बनी। समुद्री सुरक्षा में जापान खुलकर साथ देगा। चीन के विस्तारवाद के विरुद्ध अघोषित रूप में मंसूबा दिखाया गया। सांस्कृतिक रिश्तों के परिप्रेक्ष्य में बौद्ध धर्म की बात हुई। जापान के लोग भी भारत से भावनात्मक लगाव रखते हैं। उन्हें दोनों देशों के बीच मजबूत होते संबंधों को लेकर प्रसन्नता है। नागरिकों के स्तर पर शिक्षा, शोध, सांस्कृतिक, योग, चिकित्सा के समझौते हुए। उद्योग जगत आपसी सहयोग पर सहमत हुआ। दोनों देशों के शीर्ष उद्योगपतियों ने इस संदर्भ में विचार विमर्श किया।
दोनों देशों के बीच अनेक महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। भारत में रेलवे एवं परिवहन क्षेत्र में बुनियादी ढांचे के विकास, बंदरगाहों, पथकर वाली सड़कों, हवाई अड्डों के निर्माण और शहरी विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग एवं निवेश बढ़ाने के लिए समझौता किया गया। अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए दो समझौते किए गए हैं।
इसरो व जापानी एजेंसी के बीच समझौता भी बहुत महत्वपूर्ण है।  बाहरी अंतरिक्ष में उपग्रह दिशानिर्देशन और खगोलीय खोज में सहयोग बढ़ाने के लिए हुआ है। इसमें संयुक्त अंतरिक्ष अभियान मिशन और जमीन पर स्थित उपग्रह प्रणालियों के संयुक्त उपयोग हो सकेगा। भारत के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और जापान की समुद्र पृथ्वी विज्ञान एजेंसी के बीच संयुक्त सर्वेक्षण और शोध में सहयोग बढ़ाने के लिए किया गया है। अब दोनों तरफ के शोधार्थी और विशेषज्ञ एक दूसरे की संस्थाओं की यात्राएं कर सकेंगे।
असैन्य परमाणु सहयोग पर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। इससे कंपनियों को भारत में परमाणु संयंत्र लगाने में मदद मिलेगी। इस असैन्य परमाणु समझौते से जापान भारत को परमाणु तकनीक का निर्यात कर सकेगा। परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं करने वाला भारत पहला ऐसा देश है जिसके साथ जापान ने इस प्रकार की संधि की है। पिछले दो सालों में भारत में पचपन अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश आया है। यह भारत में अब तक का सबसे अधिक एफडीआई निवेश है। मेक इन इंडिया, कृषि, कौशल विकास  संबन्धी समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
पचहत्तर सौ करोड़ डॉलर का द्विपक्षीय करेंसी स्वैप एग्रीमेंट भी हुआ। इस कदम से भारत के फॉरेन एक्सचेंज और कैपिटल मार्केट्स में ज्यादा बड़ी स्थिरता लाने में मदद मिलेगी। यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूती प्रदान करेगा। दोनों देश  बेहतर संचार और कनेक्टिविटी ,प्रत्येक क्षेत्र में  डिजिटल ,पार्टनरशिप साइबरस्पेस, स्वास्थ्य, रक्षा, समुद्र और अंतरिक्ष हर क्षेत्र में डिजिटल पार्टनरशिप, स्मार्ट शहर, बुलेट ट्रेन पर सहयोग बढ़ाने पर सहमत हुए।  समग्र स्वास्थ्य एवं कल्याण के लिये पहली बार योग एवं आयुर्वेद जैसी भारतीय परंपरागत चिकित्सा प्रणाली के क्षेत्र में सहयोग का फैसला भी किया है।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जापान दौरे के दौरान भारत के आयुष आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्धा और होम्योपैथी क्षेत्र में मिल कर कार्य किया जाएगा।
 दोनों नेताओं ने हिन्द प्रशांत क्षेत्र  की स्थिति पर गम्भीरता से विचार किया। इसमें चीन के विस्तारवादी कदमों पर चिंता व्यक्त गई। जापान और भारत इस क्षेत्र में साझा रणनीति बनाने और उसके क्रियान्वयन पर सहमत हुए। यह चीन को सीधा जबाब है। यह माना जा रहा है, इसमें अमेरिका सहित यूरोप के देश भी सहयोग करेंगे। चीन की गतिविधियां इस क्षेत्र की शांति को भंग करने वाली है। इसका माकूल जबाब देना होगा। पर्यावरण की सुरक्षा, आर्थिक असंतुलन दूर करने के लिए और विश्व शांति के लिए भारत की भूमिका अग्रणी है।
 नरेंद्र मोदी ने उचित कहा कहा कि भारत और जापान के बीच संबंधों की जड़ें पंथ से लेकर प्रवृति तक हैं। हिंदू और बौद्ध मत की हमारी विरासत साझा है।  हमारे आराध्य से लेकर अक्षर तक में इस विरासत की झलक मिलती है। जापान के साथ भारत की विशेष सामरिक और वैश्विक साझेदारी है। जापान के साथ आर्थिक और सामरिक सहयोग में हाल के वर्षो में पूरी तरह से परिवर्तन आया है। एक्ट ईस्ट नीति और मुक्त, खुले व समावेशी हिन्द प्रशांत क्षेत्र के प्रति साझी प्रतिबद्धता पर आधारित है। जाहिर है कि नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा बहुत उपयोगी साबित हुई है। भारत और जापान के रिश्ते पहले के मुकाबले अधिक मजबूत हुए है।

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