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    सकारात्मक पत्रकारिता की सार्थकता

    By June 3, 2019 Current Issues 2 Comments6 Mins Read
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    डॉ दिलीप अग्निहोत्री
    भारत में प्राचीन काल से ही सामाजिक संवाद की सुनियोजित व्यवस्था रही है। संवाद सम्प्रेषण के भी अनेक उदाहरण मिलते है। पहले पश्चिमी विचारक इन पर विश्वास करने को तैयार नहीं थे, लेकिन आज विश्व में यह चरितार्थ हो रहे है। देवर्षि नारद ने समाचार सम्प्रेषण में समय, विश्वसनीयता और सामाजिक हितों की अवधारणा का प्रतिपादन किया। चौरासी नारद सूत्र आज की पत्रकारिता के संदर्भ में भी प्रासंगिक है। महाभारत में तो सजीव प्रसारण का प्रमाण उपलब्ध है। धृतराष्ट्र को संजय महाभारत युद्ध की सजीव जानकारी राजमहल में बैठ कर देते है। आज सजीव या लाइव प्रसारण सामान्य बात है।
    आधुनिक युग में हिंदी में उद्दंड मार्तंड समाचार पत्र कोलकाता से तीस मई को शुरू हुआ था। देवर्षि नारद जयंती हो या तीस मई के दिन, भारत के पत्रकार उसे उत्साह पूर्वक मनाते है। लखनऊ में अखिल भारतीय हिंदी पत्रकार संघ और रंग भारती के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पत्रकारिता दिवस मनाया गया। जिसमें राज्यपाल राम नाईक, विधानसभा अध्यक्ष हृदयनारायण दीक्षित, हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार, कैबिनेट मंत्री बृजेश पाठक सहित बड़ी संख्या में पत्रकार व अन्य लोग शामिल हुए। शांता कुमार के अलावा अनेक वरिष्ठ पत्रकारों को सम्मानित भी किया गया।
    राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि श्याम कुमार द्वारा आयोजित उक्त कार्यक्रम तीस मई को होना था। किन्तु प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के शपथ ग्रहण में सम्मिलित होने के कारण तिथि का परिवर्तन करना पड़ा। राज्यपाल ने सभी सम्मान प्राप्त पत्रकारों को शुभकामना देते हुये कहा कि उनकी कलम नई ऊंचाई हासिल करे। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता एक दायित्व है जिसका बहुत महत्व है। हिन्दी पत्रकारिता को आगे बढ़ाने में गैर हिन्दी भाषी लोगों का बहुत योगदान है। समाचारों में सकारात्मक विचार हों। पत्रकारिता का उद्देश्य पूर्व में देश को आजादी दिलाने का था। आजादी के बाद देश में विकास कैसे हो, इस प्रकार का चित्र पत्रकारिता में बनना चाहिए। पत्रकार वास्तव में जनतंत्र के प्रहरी हैं।
    पत्रकार लोकतंत्र का चैथा स्तम्भ होने के नाते समाज का प्रबोधन करें। उन्होंने कहा कि समाज को आगे बढ़ाने का उद्देश्य ही पत्रकारिता का संकल्प होना चाहिए। नाईक ने कहा कि वह भी  उन्नीस सौ पचपन छप्पन में  पत्रकार के रूप में कार्य कर चुके हैं। हिन्दुस्थान समाचार में उन्होंने प्रेस नोट लिखने का कार्य किया है। उस समय साइक्लोस्टाईल या फोटोकापी जैसी सुविधा नहीं थी। इसलिये कार्बन कापी से काम चलता था।
    राजनीति में जब गया तो विभिन्न भाषाओं जैसे मराठी, गुजराती, हिन्दी, अंग्रेजी एवं उर्दू में प्रेस नोट तैयार करके अखबारों को स्वयं भेजा करते थे। विभिन्न भाषाओं में प्रेस नोट बनाने के कारण उनके समाचार प्रमुखता से छपते थे। अन्य राजनैतिक पार्टी वाले शिकायत करते तो समाचार सम्पादक कहते कि राम नाईक जैसे प्रेस नोट अनुवाद करके लाओ। उन्होंने कहा कि सकारात्मक घटनाओं को समाज के सामने लाने का दायित्व तथा देश निर्माण में योगदान पत्रकारों से अपेक्षित है। सकारात्मक पत्रकारिता से समाज और देश दोनों का लाभ होता है। पत्रकारों को यह दायित्व संभालना चाहिए।
    उस समय कार्बन कागज लगा कर कॉपी निकली जाती थी। उसको ही राम नाईक लिखते थे। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के लेखन से भविष्य में बहुत लाभ मिला। जब वह जनसंघ में सक्रिय हुए तो अन्य भाषाओं के कुछ लोगों को जोड़ा। वह प्रमुख भाषाओं में प्रेस नोट बना कर उन भाषाओं के अखबारों को भेजते थे। वह प्रकाशित भी होते थे। इससे आमजन के बीच जनसंघ के विचार पहुंचना आसान हो गया। आज टेक्नालॉजी बहुत आगे बढ़ गई। फिर भी संपादको व पत्रकारों को सकारात्मक समाचारों को वरीयता देनी चाहिए  इसका समाज व राष्ट्र को लाभ होगा। पत्रकार लोकतंत्र के प्रहरी है। इसी लिए मीडिया को चौथा स्तंभ कहा गया।
    अध्यक्षता विधान सभा हृदय नारायण दीक्षित ने समारोह की अध्यक्षता की। उन्होंने कहा कि राष्ट्र जीवन मे अच्छे कार्यो के लिए सम्मानित करने की प्राचीन परंपरा रही है। समाज की गति को संचालित करने श्रेष्ठ जनों का कर्तव्य है। योद्धाओं व सांस्कृतिक कार्यो के लिए सम्मान के अलग विधान है।
    हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने कहा कि छांछठ वर्ष के चुनावी जीवन को विराम देने के बाद यह सम्मान समारोह मेरे जीवन का स्मरणीय पल है। हिंदी पत्रकारिता दिवस राष्ट्र सेवा के संकल्प का अवसर है। उदण्ड मार्तंड हिंदी समाचार पत्र ब्रिटिश काल मे राष्ट्र गौरव की अलख जगाने वाला था। इस भावना को समझना चाहिए।  देश से राजनीतिक प्रदूषण हटाना होगा। राजनीति का अवमूल्यन व सम्पूर्ण जीवन का राजनीतिककरण अनुचित है। पत्रकार इस संकट से बचा सकते है। अन्यथा सभी संस्थाओं पर राजनीतिक प्रदूषण का प्रतिकूल प्रभाव होगा। हिंदी की दशा पर भी विचार करना होगा। शांत कुंमार ने अंग्रेजी में निमंत्रण पत्र नहीं होने चाहिए। हिंदी को पूरा सम्मान करना होगा।
    उन्होंने अपने मुख्यमंत्री काल की चर्चा की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में मैने हिंदी में कार्य करने की घोषणा की थी। जबकि अधिकारी इसके लिए तैयार नहीं थे। नौकरशाह दो दिन की छुट्टी पर चले गए। लौटे तो कहा कि हिंदी में हस्ताक्षर करने का अभ्यास कर रहा था। फिर वही अधिकारी हिंदी में कार्य करने को तैयार हुए। हिंदी के प्रति हीनभावना मिटनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अब मैं साहित्य के क्षेत्र में अधिक समय देना चाहता हूं। ऐसे में इस सम्मान से उत्साहवर्धन हुआ है। उत्तर प्रदेश के विधि मंत्री बृजेश पाठक ने इस प्रकार के आयोजन को सराहनीय बताया।
    राम नाईक ने साहित्यकार व हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शान्ता कुमार को ‘अमीर खुसरो रंग भारती सम्मान’ देकर सम्मानित किया। डॉ  दिलीप अग्निहोत्री को ‘बाबू राव विष्णु पराड़कर रंग भारती सम्मान’, रामेश्वर पाण्डेय को ‘लक्ष्मी नारायण गरदे रंग भारती सम्मान’, प्रभात रंजन दीन को ‘गणेश शंकर विद्यार्थी रंग भारती सम्मान’, सद्गुरू शरण को ‘रामकृष्ण रघुनाथ खडिलकर रंग भारती सम्मान’  सुमन्त पाण्डेय को ‘अज्ञेय रंग भारती सम्मान’ देकर सम्मानित किया गया। प्रणय विक्रम सिंह, आनन्द सिन्हा, भास्कर दुबे, सुश्री शिल्पी सेन, राजबहादुर सिंह, शेखर पण्डित, शिवशरण सिंह,  एसएमपारी को ‘हेरम्ब मिश्र सम्मान’ से तथा उत्तर प्रदेश विधान सभा के पूर्व अध्यक्ष  सुखदेव राजभर को ‘राजर्षि टण्डन सम्मान’ से सम्मानित किया गया। रंग भारती के अध्यक्ष श्याम कुमार ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने संविधान से इंडिया शब्द हटाने के लिए प्रधानमंत्री को लिखा गया ज्ञापन राज्यपाल को सौंपा।

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