आत्मनिर्भर बनाएगी नई शिक्षा नीति

0
384

पंकज चतुर्वेदी

33 साल बाद देश के लिए बनी नई शिक्षा. नीति का दर्शन भारतीय लोकाचार में निहित एक ऐसी शिक्षा प्रणाली का विकास करना है जो कि जो “इंडिया” को “भारत” में बदलने की शक्ति बन सके। कोई तीन साल तक देश के हजारों लोगों से विमर्श के बाद तैयार इस दस्तावेज में शिक्षा को डिग्री से कहीं ज्यादा व्यावसायिक कौशल से जोड़ने और समतामूलक और जीवंत ज्ञान समाज के निर्माण की बात कही गई है। सभी को उच्च-गुणवत्ता की शिक्षा मिले, ताकि भारत एक वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बन सके, इसके लिए ढेर सारे प्रायोगिक, ई-लर्निंग और आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस जैसी तकनीक के इस्तेमाल के साथ शिक्षण संस्थाओं को साधन संपन्न बनाने पर ज्यादा ध्यान दिया गया है।

हमारे संस्थानों के पाठ्यक्रम और शिक्षाशास्त्र इस तरह हों ताकि मौलिक कर्तव्यों और संवैधानिक मूल्यों के प्रति सम्मान की गहरी भावना, अपने देश के साथ अटूट संबंध, और एक बदलती दुनिया में अपनी भूमिकाओं और जिम्मेदारियों के बारे में जागरूकता विकसित की जा सके। न केवल विचार में, बल्कि आत्मा, बुद्धि और कर्मों में, बल्कि भारतीय होने में एक गहन-गर्वित गर्व पैदा करने के लिए, साथ ही साथ ज्ञान, कौशल, मूल्यों और प्रस्तावों को विकसित करने के लिए, जो मानव अधिकारों के लिए जिम्मेदार प्रतिबद्धता का समर्थन करते हैं, सतत विकास और जीवन और वैश्विक कल्याण, जिससे वास्तव में एक वैश्विक नागरिक प्रतिबिंबित हो।

नई शिक्षा नीति में प्रौद्योगिकी के उपयोग और एकीकरण पर सर्वाधिक जोर दिया गया है। विद्यालयीन और उच्च शिक्षा दोनों के लिए, एक स्वायत्त निकाय, राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी फोरम (एनईटीएफ) का गठन होगा जो , सीखने, मूल्यांकन, नियोजन, प्रशासन, आदि के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग पर विचारों के मुक्त आदान-प्रदान के लिए एक मंच प्रदान करेगा । एनईटीएफ ,शैक्षिक प्रौद्योगिकी में बौद्धिक और संस्थागत क्षमता का निर्माण, अनुसंधान और नवाचार के लिए नई दिशाओं को विकसित करना जैसे कार्य करेगी। सीखने-सिखाने की प्रक्रिया में तकनीकी हस्तक्षेप के साथ मूल्यांकन, टीचर- ट्रैनिंग और वंचित और अभी तक शिक्षा से दूर समुदाय तक अक्षर ज्योति पहुंचाने का कार्य किया जाएगा।

इस नई नीति में शिक्षकों के अत्याधुनिक तकनीक के साथ प्रशिक्षण, उन्हें विभिन्न दूरस्थ शिक्षा उपकरणों पर काम करने, ई लर्निंग के नए पाठ्यक्रम खुद तैयार करने, स्थानीय भाषा बोली में शिक्षा और एक से अधिक भाषा के ज्ञान के लिए सॉफ्टवेयर के प्रयोग के सतत प्रशिक्षण की बात की गई है।

उच्च शिक्षा संस्थान न केवल ऐसी समर्थ प्रौद्योगिकियों पर अनुसंधान करने में, बल्कि अनुदेशात्मक सामग्री के प्रारम्भिक संस्करण तैयार करने और स्पर्धा के अनुरूप ऑनलाइन सहित पाठ्यक्रम तैयार करने का काम करेंगे , साथ ही वे पेशेवर शिक्षा जैसे विशिष्ट क्षेत्रों पर उनके प्रभाव का आकलन करने में एक सक्रिय भूमिका निभाएंगे। विश्वविद्यालयों का उद्देश्य मशीन लर्निंग के साथ-साथ बहु-विषयक क्षेत्रों ओर स्वास्थ्य देखभाल, कृषि और कानून जैसे पेशेवर क्षेत्र में पीएचडी ओर स्नातकोत्तर कार्यक्रमों का संचालन करना होगा। ये संस्थान कम विशेषज्ञता वाले कार्यों जैसे डेटा एनोटेशन, छवि वर्गीकरण और भाषण प्रतिलेखन का प्रशिक्षण भी दे सकेंगे।

इस नीति के मूल में शिक्षक को बदलती दुनिया के मुताबिक प्रशिक्षित करने पर बहुत अधिक और समयबद्व जोर दिया गया है। कहा गया है कि स्कूलों में शिक्षकों के लिए ऐसे उपयुक्त उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि वे सीखने-सीखाने के तरीकों का ई-सामग्री के साथ सामंजस्य बैठा सकें और ऑन लाइन ओर डिजिटल शिक्षा-तकनीक का उचित इस्तेमाल सुनिश्चित कर सर्कें । ऑनलाइन शिक्षण मंच और उपकरण, मौजूदा ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म जैसे स्वयं, दीक्षा आदि को इस तरह विस्तारित किया जाएगा ताकि शिक्षकों को शिक्षार्थियों की प्रगति की निगरानी के लिए एक संरचित, उपयोगकर्ता के अनुकूल, समृद्ध माध्यम मिल सके।

स्कूली स्तर पर शारीरिक शिक्षा, फिटनेस, स्वास्थ्य और खेल; विज्ञान मंडलियाँ, गणित, संगीत और नृत्य, शतरंज ,कविता , भाषा, नाटक , वाद-विवाद मंडलियां ,इको-क्लब, स्वास्थ्य और कल्याण क्लब , योग क्लब आदि की गतिविध्यिां, प्राथमिक स्तर पर बगैर बस्ते के ज्यादा दिन की येाजना भी है।

मौजूदा जन संचार, जैसे टेलीविजन, रेडियो, और सामुदायिक रेडियो का विभिन्न भाषाओं में प्रसारण के लिए चौबीसों घंटे हर समय प्रसारण और बड़े पैमाने पर उपयोग, वर्चुअल लैब बनाने के लिए मौजूदा ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म का सहयोग लिया जाएगा। जब आनलाईन व ईलर्निंग पर इतना जोर है तो देश के डिजिटल बुनियादी ढाँचे के दूरस्थ अंचल तक निर्माण में निवेश की योजना भी इस नीति का हिस्सा चूंकि देश की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा में हर समय मूलभूत सुविधा का अभाव व पर्याप्त धन की कमी आड़े आती रही है, इसी लिए इस नई नीति में बुनियादी ढांचे और संसाधनों से संबंधित एकमुश्त व्यय के अलावा, एक शिक्षा प्रणाली को उन्नत बनाने के लिए वित्तपोषण के लिए दीर्घकालिक क्षेत्रों की पहचान की गई है ताकि विभिन्न मंत्रालय इस दिाा में में काम कर सके। चूंकि शिक्षा संमवर्ति सूची का विशय है और इसी लिए इसमें राज्यों के साथ बेहतर समन्वय के लिए खास व्यवस्था रखी गई है और यह विश्वास जताया गया है कि सन 2030-40 तक यह नीति पूरी तरह काम करने लगेगी और फिर उसकी समीक्षा की जाएगी।

उच्च शिक्षा संस्थानों में जरुरी पुस्तकालयों, कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, प्रौद्योगिकी, खेल ,मनोरंजन क्षेत्र, छात्र चर्चा स्थान, और भोजन क्षेत्र जैसे उपयुक्त संसाधन और बुनियादी ढाँचे प्रदान करने के साथ, यह सुनिश्चित करने के लिए कई पहल की आवश्यकता होगी सीखने का माहौल सकारात्मक ओर आकर्षक हो, और सभी छात्रों की सफलता सुनिश्चित करे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here