जी क़े चक्रवर्ती
अब वह समय भी दूर नही जब हमारी पृथ्वी के धरातल पर भूमि अंश मात्र नही बचेगी ऐसी स्थिति में हमारे समाज के लोगों विशेष कर किसानों को अन्न उगाने में बहुत परेशानी होना स्वाभाविक सी बात होगी। और अगर हम शहरों की बात करें तो शहर में बसे आबादी के उदर पूर्ति के लिए अन्न की जरूरत तो होगी ही ऐसे में हम अपने लिए अन्न को कैसे और कहां पर पैदा करेंगे! इस बारे में हमारे वैज्ञानिकों को अभी से ही इस विषय मे सोचना अवश्य पड़ेगा कि और इस के लिए वे पहले से ही तैयार रहें।
इसी परिपेक्ष्य में वैज्ञानिकों ने इसका हल भी शायद ढूंढ ही लिया है कि ऐसी अवस्था में हम इस परेशानी से कैसे निपटेंगे। हो सकता है कि आपने कभी पानी से भरे ग्लास में या किसी बोतल में किसी पौधे की टहनी रख दी हो और कुछ दिनों के बाद देखने पर हमें यह दिखाई दिया कि उस टहनी में जो हिस्सा पानी मे डूबा हुआ है उसमें जड़ें निकल आईं हैं और धीरे-धीरे उस टहनी के ऊपरी भाग में पत्तियों के कोंम्पलें फूट रही हो और इस तरह से वह पौधा बढ़ने लगता है। जबकि हम हमेशा से यह देखते चले आ रहे हैं कि समान्यतया पेड़-पौधे जमीन पर ही उगाए जाते एवं फसलों को जमीन पर ही उगाया जाता हैं और पेड़-पौधे उगाने और उनके बड़े होने के लिये खाद, मिट्टी, पानी और सूर्य का प्रकाश की आवश्यकता होती है। लेकिन वास्तविक सच्चाई यह है कि पौधे या फसलों को उगाने या उनके उत्पादन के लिये केवल तीन चीजों की ही आवश्यकता नही होती ही वल्कि पानी, पोषक तत्व एवं सूर्य के प्रकाश की आवश्यकता मुख्य रूप से होती है।
यदि हम ऐसा कल्पना करें बिना भूमि में बीज लगाए ही अन्न पैदा किया जा सके तो क्या ऐसा संभव है? जिसका उत्तर होगा नही, लेकिन हमारे वैज्ञानिकों ने यह सिद्ध कर दिया है कि हम बिना मिट्टी के ही पेड़-पौधों को किसी और तरीके से पोषक तत्व जो उनको मिट्टी से प्राप्त होती है उसे किसी अन्य प्रकार से पौधों को उपलब्ध करा दें तो बिना मिट्टी के भी पानी और सूरज के प्रकाश की उपस्थिति में पेड़-पौधे उगाये जा सकते हैं।
दरअसल, बढ़ते शहरीकरण और बढ़ती आबादी के कारण फसलें उगाने एवं पौधों के लिये लगातार जमीन कम होती जा रही हो तो बिना मिट्टी के पौधे उगाने वाली यह तकनीक काफी उपयोगी सिद्ध हो सकती है। इस तकनीक से हम अपने फ्लैट में या घर में भी बिना मिट्टी के पौधे और सब्जियाँ आदि उगाने जैसा काम कर सकते हैं। बिना मिट्टी के किसी भी पौधे को उगाने की इस तकनीक को हाइड्रोपोनिक्स कहते हैं। अब यहां हमारे मष्तिष्क में यह प्रश्न उठना लाजमी है कि हाइड्रोपोनिक्स क्या है? यह हमारे लिये कैसे उपयोगी हो सकती है और हमारे देश में कहाँ-कहाँ इसका इस्तेमाल किया जा सकता है या जा रहा है।

हाइड्रोपोनिक्स क्या है? इसके उत्तर स्वरूप यह कह सकते है कि केवल पानी में, बालू अथवा कंकड़ों के बीच नियंत्रित जलवायु में बिना मिट्टी के पौधे उगाने की तकनीक को हाइड्रोपोनिक कहते हैं। हाइड्रोपोनिक शब्द की उत्पत्ति दो ग्रीक शब्दों जैसे ‘हाइड्रो’ (Hydro) तथा ‘पोनोस (Ponos) से मिलकर बनी है। हाइड्रो का अर्थ है पानी, जबकि पोनोस का अर्थ है कार्य। हाइड्रोपोनिक्स में पौधों एवं चारे वाली फसलों को नियंत्रित परिस्थितियों में 15 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान पर लगभग 80 से 85 प्रतिशत आर्द्रता में उगाया जा सकता है। साधारणतः पेड़-पौधे अपने बढ़ोत्तरी के लिए आवश्यक पोषक तत्वों को जमीन से प्राप्त करते हैं, लेकिन हाइड्रोपोनिक्स तकनीक में पौधों के लिये आवश्यक पोषक तत्वों को उपलब्ध कराने के लिये पौधों में एक विशेष तरह का घोल डाला जाता है। इस घोल में पौधों की बढ़ोत्तरी के लिये आवश्यक खनिज एवं पोषक तत्वों को मिलाया जाता हैं। पानी, कंकड़ों या बालू आदि में उगाए जाने वाले पौधों में इस घोल की महीने में एक-दो बार मात्र कुछ बूँदें ही डाली जाती हैं। इस घोल में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, मैग्नीशियम, कैल्शियम, सल्फर, जिंक एवं आयरन आदि जैसे तत्वों को एक खास अनुपात में मिलाया जाता है, ताकि पानी मे उगाये जाने वाले पौधों को आवश्यक पोषक तत्व मिलता रहें। हाइड्रोपोनिक्स तकनीक का कई पश्चिमी देशों में इस तकनीक का प्रयोग कर फसलें उत्पादित किया जा रहा है।
हमारे देश में भी हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से कई क्षेत्रों में बिना जमीन और मिट्टी के पौधे उगाए जा रहे हैं और फसलें पैदा की जा रही हैं। देश के राजस्थान जैसे रेगिस्तान के शुष्क क्षेत्रों में जहाँ चारे के उत्पादन के लिये विपरीत जलवायु वाली परिस्थितियाँ मौजूद हैं विशेष कर ऐसे क्षेत्रों में यह तकनीक वरदान सिद्ध हो सकती है। वेटरनरी विश्वविद्यालय, बीकानेर में मक्का, जौ, जई और उच्च गुणवत्ता वाले पशुओं के हरे चारे वाली फसलें उगाने के लिये इस तकनीक का पृयोग किया जा रहा है। यहाँ के वैज्ञानिकों ने बिना मिट्टी के नियंत्रित वातावरण में इस तकनीक का प्रयोग कर सेवण घास की पौध तैयार करने में सफलता प्राप्त की है।
दिन प्रतिदिन वैज्ञानिक खोजों एवं चमत्कारों को एवं वैज्ञानिकों की सफलताओं से हमें यह सोचने पर मजबूर कर देता हैं कि आगे आने वाले भविष्य में धीरे-धीरे हमारी प्रकृति प्रदत्य सभी वस्तुएं विज्ञान प्रदत्य हो जाएगी।








2 Comments
खूबसूरत ््््
Nice information.