लखनऊ, 09 नवंबर 2018: दीपावली की अगली सुबह केंद्रीय प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड ने आंकड़े जारी कर दिल्ली की औसत वायु गुणवत्ता एक्यूआई (एवरेज एयर क्वालिटी इंडेक्स) को 329 मापा जोकि छटे स्तर का प्रदूषण है और बहुत घातक स्तर का माना जाता है।
अंतरराश्ट्रीय संस्था ‘सफर यानी सिस्टम आफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फॉरकास्टिंग एंड रिसर्च’ का कहना था कि दिल्ल एनसीआर के हालात एक्यूआई के मापदंड से कही बहुत अधिक खराब हैं। यह बात इस लिए भी सच लगती है क्योंकि मध्य दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के मेजर ध्यानचंद स्टेडियम के पास और दिल्ली की सीमा से सटे आनंद विहार पर हवा की गुणवत्ता बराबर थी – 999 अर्थात वायु में जहर के आपातकाल की सीमा से भी कई गुणा ज्यादा। चाणक्यपुरी जैसे हरियाली और कम आबादी वाले इलाके की हवा 459 स्तर पर जहरीली थी। गाजियाबाद और नोएडा में तो प्रदूशण का स्तर इतना ऊंचा था कि वहां मापने वाली मशीनों की सीमा समाप्त हो गई।
गैर ज़िम्मेदाराना बयान:
इस पर संघी विचारधारा के लोगों की टिप्पणियाँ बानगी है समीर मोहन खुद को पर्यावरण प्रेमी कहते हैं लोगो को वृक्षारोपण की सलाह देते हैं। उनके विचार: -“कोर्ट सदैव मूर्खता पूर्ण बात करती है दही हांडी की ऊंचाई पटाखे का समय सुप्रीम कोठा है कोर्ट वोर्ट कुछ नहीं”।
सचिन गोयल अपने को मोदी समर्थक कहने में गर्व महसूस करते हैं, वे कहते हैं – “मुझे कुछ कहने की आवश्यकता नही है ये बताने के लिये कि कोर्ट का निर्णय एक अव्यवहारिक, असंगत और पक्षपाती था
न्याय सिर्फ होना ही काफी नही है, न्याय होता हुआ दिखना भी अनिवार्य होता है ‘जिसे आप भीड़ तंत्र का नाम दे रहे हैं।
उस भीड़ तंत्र के जन्मदाता भी यही संस्थान हैं। एक हद से ज्यादा अगर इलास्टिक भी खींचा जाए तो परिणाम टूट ही होता है
यह बानगी है कि दिल्ली एन सी आर को जहरीली गेस का घुटनभरा इलाका बनाने वाले किस विचारधारा के लोग है, यह चित्र आज सुबह केन्द्रीय दिल्ली का है, देख लें ये किस दुनिया के लिए प्रतिबद्ध हैं।
- पंकज चतुर्वेदी की वॉल से







