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    Home»ब्लॉग»Current Issues

    नेता प्रतिपक्ष पर उल्टे पड़े प्रहार

    By March 7, 2018Updated:March 7, 2018 Current Issues No Comments6 Mins Read
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    डॉ. दिलीप अग्निहोत्री

    विधायिका में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद चर्चा सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों को विशेष अवसर देती है। इस कारण धन्यवाद प्रस्ताव अपने में महत्वपूर्ण हो जाता है। यह संसदीय प्रजातन्त्र की स्थापित परंपरा भी है। जिसमें राज्यपाल संवैधानिक मुखिया होते है। संवैधानिक शब्दावली में सरकार उन्हीं की ही मानी जाती है। ऐसे में उनका अभिभाषण निर्वाचित सरकार की विचारों को प्रकट करता है। विपक्ष उससे असहमति व्यक्त करता है। अभिभाषण के मामले में स्वभाविक तौर पर सत्ता पक्ष तैयार रहता है। जबकि विपक्ष अपनी बात को तभी प्रभावी बना सकता है, जब वह अभिभाषण को सुने और पढ़े। चर्चा के अंत में पहले नेता प्रतिपक्ष बोलते है, अंत में मुख्यमंत्री चर्चा का जबाब देते है।

    लेकिन राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान लगातार हंगामा करके विपक्ष ने अपना ही नुकसान किया है। यह बात नेता प्रतिपक्ष के भाषण से प्रमाणित हुआ। उन्होंने बिल्कुल सतही तौर पर आरोप लगाए। राजनीतिक क्षेत्र में भाजपा पर ऐसे आरोप पहले भी लगाए जाते थे। इनमें न कुछ नया था, न इसके समर्थन में तर्क थे। अभिभाषण से इसका कोई लेना देना नहीं था।

    लगता है कि नेता प्रतिपक्ष ने भाषण से पहले पर्याप्त होमवर्क नहीं किया। जब राज्यपाल बोल रहे थे, तब वह हंगामे और कागज के गोले फेंकने का आनन्द ले रहे थे। बोलने का अवसर आया तो फैशन बने आरोपो को दोहरा दिया। विपक्ष की यह लापरवाही राहत पक्ष को राहत देने वाली थी। फिर भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरी तैयारी के साथ जबाब दिया।

    मतलब साफ है, अभिभाषण पर चर्चा के अवसर का योगी ने पूरा लाभ उठाया, वही विपक्ष सरकार को घेरने में चूक गया। नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी ने घिसे पीटे अंदाज में आरोप जड़ दिए। वह करीब डेढ़ घण्टे बोले। लेकिन मुख्य फोकस यह बना की भाजपा की गलत नीतियों से देश बटने के कगार पर पहुंच जाएगा। दूसरा यह कि भाजपा दलितों, पिछड़ों और मुसलमानों के अरमानों से खिलवाड़ कर रही है।

    तीसरी बात साम्प्रदायिक रंग देने के लिए थी। कहा कि योगी मथुरा में होली, अयोध्या में दीपावली मना चुके है, लेकिन ईद कहा मनाऐंगे, इसके जबाब से कन्नी काट लेते है। फिर योगी पर आरोप लगाया। कहा कि वह हेलीकाप्टर पर चलते है, इसलिए सड़क के गड्ढे दिखाई नही देते। नेताप्रतिपक्ष ने सपा बसपा गठबन्धन का भी बचाव किया। कानून व्यवस्था खराब होने का आरोप लगाया।

    जाहिर है कि इनमें से कोई आरोप ऐसा नहीं था, जिससे सरकार को परेशानी होती। कई बार तो नेता प्रतिपक्ष के आरोप उन्हीं के गले पड़ गए। उन्होंने सड़क पर गड्ढा का विषय उठाया। लेकिन इस बात पर कोई विश्वास नहीं कर सकता कि सारे गड्ढे दस महीने में हो गए। मतलब यह कि सपा सरकार गड्ढा छोड़ कर गई है, योगी सरकार उसे भर रही है। चौधरी ने मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर पर चलने का आरोप लगाया। लोगों को यह कहने का अवसर मिला कि मुख्यमंत्री के रूप में अखिलेश क्या साइकिल से चलते थे। योगी मुख्यमंत्री होने के साथ सबसे बड़ी राष्ट्रीय पार्टी के स्टार कंपेनर भी है। हेलीकॉप्टर से चलना उनका शौक नहीं जरूरत है।

    योगी आदित्यनाथ ने इन आरोपों की हवा निकालने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने तथ्यों के आधार पर जहाँ चौधरी के प्रहारों को बेअसर कर दिया, वही अपनी सरकार की उपलब्धियां भी बयान की। योगी की बातों से लगा कि वह मात्र ग्यारह महीने की अपनी सरकार की उपलब्धियों की तुलना सपा बसपा दोनों से करने का जज्बा रखते है।

    देश को तोड़ने के आरोप से योगी व्यथित ही नहीं नाराज भी हुए। रामगोविंद चौधरी का यह आरोप आपत्तिजनक भी था। देश के करीब अड़सठ प्रतिशत भूभाग पर जनादेश लेकर शासन करने वाली पार्टी के बारे में ऐसा कहना वस्तुतः करोड़ो नागरिकों का अपमान है। अब तो पूर्वोत्तर तक भाजपा पहुंच गई है। समाजवादी पार्टी कभी इस स्वरूप की कल्पना भी नहीं कर सकती। रामगोविंद चौधरी को यह समझना चाहिए कि ऐसे आरोप से अंततः भाजपा को ही फायदा मिलता है। आमजन भी ऐसे आरोपों को महत्वहीन समझता है। योगी ने ठीक कहा कि भाजपा सरकार देश तोड़ने की बात करने वालों को ही तोड़ देगी। भाजपा राष्ट्रीय एकता और अखण्डता को सर्वोच्च वरीयता देती है। इसीलिए एकीकरण के शिल्पी बल्लभभाई पटेल को पूरा सम्मान देती है।

    इसके विपरीत वोटबैंक की राजनीति देश के लिए खतरनाक है। कांग्रेस, कम्युनिस्ट, तृणमूल,जैसी पार्टियों ने अनेक सीमावर्ती प्रदेशो की स्थिति बिगाड़ी है। इनके शासन में बांग्लादेशियों की घुसपैठ हुई। इन्हें नागरिकता तक दिला दी गई। मतदाता सूची में इनके नाम दर्ज हो गए। देश की एकता को इन बातों से खतरा है। क्या यह सही नहीं कि उत्तरप्रदेश की सपा सरकार ने कई संदिग्धों को छोड़ने का प्रयास किया था। इसे न्यायपालिका ने रोका था।

    वोटबैंक की राजनीति के चलते ही रामगोविंद चौधरी ने ईद का विषय उठाया। क्या चौधरी ने अपने साथ मंत्री रहे आजम खान से कभी पूंछा था कि वह होली, दीपावली कहा मनाएंगे। तब वह भी संवैधानिक पद पर थे। इस संबन्ध में दोहरे मापदंड और आडंबर दोनों गलत है। दोहरे मापदंड के तहत ही योगी से यह पूंछा गया कि ईद कहा मनाऐंगे। अयोध्या में होली, मथुरा में दीपावली मानना भी धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के अनुरूप था। प्रत्येक व्यक्ति अपने धर्म, संस्कृति का पालन करे , सत्ता में बैठे लोग सबका साथ सबका विकास के अनुरूप कार्य करें, यह जरूरी है। योगी ने दावा भी किया कि भाजपा इसी विचार पर कार्य कर रही है।

    ऐसा नहीं होना चाहिए कि सत्ता के दौरान जातिविशेष को वरीयता मील जाए। विपक्ष में हो तो मुसलमान,पिछड़ा, दलित की बात होने लगे। योगी ने इस पर भी निशाना साधा।

    भाजपा को जिस प्रकार का राष्ट्रीय स्तर समर्थन मिल रहा है, उसकी सत्ता कायम हो रही है, उसमें पिछड़ा, दलित ,सबका योगदान है। ऐसी पार्टी को दलित, पिछड़ा, गरीब,मुसलमान, वीरोधी बताना शरारत है। योगी ने इस आरोप पर भी रामगोविंद चौधरी को आइना दिखा दिया। उन्होंने ग्यारह महीने में दलितों, पिछडो,गरीबों ,मुसलमानों के लिए हुए कार्यों का ब्यौरा दिया। सपा, बसपा, ने इनसे संबंधित जी योजनाओं को रोका था, उसे भी योगी सरकार ने शुरू कर दिया है। योगों ने कानून व्यवस्था, आर्थिक गड़बड़ी पर भी सपा बसपा का रिकार्ड दिखाया। वह सरकार निवेश की नीति तक नहीं बना सकी। योगी ने सफल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया। पारदर्शी और सिंगलविंडो सिस्टम से निवेश प्रस्तावों पर कार्यवाई भी शुरू हो गई। जाहिर है कि राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा का योगी आदित्यनाथ ने उचित उपयोग किया। सरकार को घेरने के चक्कर में नेता प्रतिपक्ष खुद घिर गए।

    .लेखक वरिष्ठ पत्रकार है

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