नहरों की सफाई का नाम तो बहुत लिया जाता है लेकिन इस बारे में विस्तृत विवरण की बात कभी नहीं की जाती। इस बारे में यूपी के जल शक्ति मंत्री का कहना है कि अभी तक नहरों की सफाई भले ही कागजों में दर्ज होती थी लेकिन भाजपा सरकार के कार्यकाल में साफ-सफाई के कार्यों में पूरी तरह पारदर्शिता दिखाई देगी। सच तो यह है कि इस मामले में यही सबसे बड़ी जरूरत है। मंत्री ने तो बाकायदा इसकी डेडलाइन देते हुए कह दिया है कि 15 दिसम्बर तक उत्तर प्रदेश की सभी नहरों की सफाई हो जायेगी। यदि किसी भी नहर की सफाई न होने की शिकायत मिली तो सम्बन्धित अधिकारी दण्डित किया जायेगा।
वास्तव में नहरें ग्रामीण जीवन का ऐसा महत्वपूर्ण अंग बन चुकी हैं जिनका रखरखाव, देखरेख तथा अनुरक्षण यदि ठीक तरह से किया जाय तो कई समस्याएं पैदा ही न हों लेकिन दुख की बात है कि ऐसा होता नहीं है। उपेक्षापूर्ण रवैया सदैव हावी रहता है जिसके नतीजे में अधिकांश नहरें भी अनुपयोगी बनकर पड़ी रहती हैं। कहने को तो खर्च होता है लेकिन वह किसी उपयोग का नहीं होता। यही कारण है कि अब नहर सफाई का भुगतान ठेकेदार को तभी करने का निर्णय लिया गया है जब क्षेत्र के पांच किसान, प्रधान, विधायक और सांसद की रिपोर्ट लगी होगी।
यह कदम नहर सफाई के काम में अधिक उत्तरदायित्व भरने का काम करेगा क्योंकि तब उसमें किसी एक व्यक्ति के हिसाब से काम होने की जगह सभी क्षेत्रीय लोगों की तस्दीक जरूरी होगी। इसका फायदा क्षेत्रीय जनता को होगा जिसके पैसे पर प्रदेश चलता है लेकिन वही अपात्र बनी रहती है।
जल शक्ति मंत्री ने इस परिपाटी को बदलने का जो निर्णय लिया है, वह स्वागतयोग्य है। अन्य विभागों में भी इसी तरह की कड़ाई को लागू किया जाय तो उनकी परफारमेंस में भी बढ़ोत्तरी हो सकेगी और यूपी अधिकाधिक खुशहाल होने की ओर तेजी के साध बढ़ सकेगा। यही आज की सबसे बड़ी जरूरत है।







