यातायात की समस्याओं के बारे में बात करें तो डग्गामार वाहनों का नाम तेजी के साथ उभरकर सामने आता है। शहर हो या देहात, सभी जगहों पर इनकी मौजूदगी होती है। जब ये मौजूद हों तो समस्याओं का होना जरूरी और स्वाभाविक है। हालांकि इनको सभी लोग देखते हैं और इनके बारे में जानते भी हैं पर दिक्कत ये है कि इनका चलन खत्म करने की स्थिति ही नहीं आ पा रही है।
पहले माना जाता था कि वाहनों की संख्या कम होने से यह समस्या बढ़ी है लेकिन बाद में पर्याप्त वाहन होने के बावजूद इनकी तादाद में कोई कमी नहीं आई। अब हालत यह है कि कुछ मार्गों पर चलने वाले वाहनों का मुकाबला डग्गामार वाहन कर रहे हैं। परमिट लेकर चल रहे या सरकार नियन्त्रण में चल रहे वाहनों के बावजूद इनकी आवाजाही पर कोई असर नहीं पड़ रहा है।
तमाम मार्गों पर बड़ी संख्या में चल रहे इन खटारा वाहनों से जनता को परेशानियां अलग से होती हैं जिसे ये भूसे की तरह वाहनों में भरकर मनमाना किराया वसूल करते हैं। ताज्जुब की बात यह है कि इतना सब खुलेआम होने के बावजूद इनके ऊपर कोई आंच नहीं आ रही है तो सवाल भी उठता है कि आखिर ऐसा क्यों सम्भव हो पा रहा है।
इन वाहनों के संचालकों ने व्यवस्था के किस अंग को अपनी ओर मिलाने में सफलता प्राप्त कर ली है कि नियमों का खुलेआम उल्लंघन करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है और इनका संचालन धड़ल्ले के साथ हो रहा है। नतीजा यह है जहां एक ओर इनकी मनमानी से आम जनता परेशान है तो वहीं सरकारी राजस्व को अच्छा-खासा चूना भी लगता जा रहा है। व्यवस्था अलग भंग हो रही है। ऐसे में यह जरूरी है कि इनके संचालन पर प्रभावी रोक लगे जिसके लिये परिवहन विभाग को आवश्यक कदम उठाने होंगे। ऐसा होने पर यातायात की तमाम समस्याओं के एक बड़े भाग का समाधान हो सकेगा।







