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गंगा की सफाई काम जितना बड़ा हो, उसमें निरन्तरता भी उतनी ही जरूरी होती है। विशेष रूप से जब वह काम सार्वजनिक महत्व का हो। ऐसे महत्व के विषयों में ही गंगा भी है जिसे प्रदूषण मुक्त करने के लिये लम्बे समय से अभियान चलाया जा रहा है। करीब एक माह पहले कानपुर में इस विशेष अभियान के तहत ही कराए गए काम के बाद गंगा के निर्मलीकरण की उपलब्धता पर स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वहां आए थे। यह ऐसी उपलब्धि थी जिसे बनाए रखा जाना चाहिए था। यानी गंगा की साफ-सफाई के लिए जरूरी कदम उठाने का क्रम जारी रहना चाहिये।

साफ-सफाई वैसे भी निरन्तरता बनाए रखने का काम है क्योंकि इसके जो भी तमाम कारण हैं, वे किसी एक दिन का नहीं बल्कि बराबर चलने वाले काम हैं। अब एक खबर यह बताती है कि गुरुवार को हुई बारिश के दौरान सीसामऊ नाला उफनाया व गंगा में सीवेज गिरता रहा। ऐसे में सवाल उठता है कि एक अच्छे-भले काम को करने के बाद उसको स्थायित्व देने में किस तरह की परेशानी आ रही थी। यह तथ्य सर्वविदित है कि नदियों के प्रदूषण में सीवेज में प्रमुख भूमिका निभाते हैं तो उनसे नदी को बचाए रखने के लिए तो अतिरिक्त कदम उठाए जाने चाहिये थे। यदि ऐसा होता तो पहली बात यह कि गंगा भी साफ-सुथरी रहती, उसमें स्नान-ध्यान आदि कार्यों का आनन्द बढ़ता तथा अन्य जगहों के लिये एक ठोस सन्देश भी जाता कि असम्भव लगने वाला काम किस सुभीते के साथ किया जा सकता है।
दरअसल यह स्थिति केवल गंगा ही नहीं बल्कि लोकहित के तमाम मामलों में सामने आती है लेकिन चूंकि इनका किसी हस्ती से व्यक्तिगत जुड़ाव नहीं होता तो इनकी ओर बस औपचारिकता निभाने यानी समारोह में मुख्य अतिथि का स्वागत करने तक की ही रुचि रखी जाती है। यही हाल रहा तो गंगा कभी स्थायी रूप से प्रदूषण मुक्त हो ही नहीं सकेगी।







