राम भरोसे आज की गोदी मीडिया?

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गोदी मीडिया पर उठे सवाल:

जी के चक्रवर्ती

मीडिया से अभिप्राय क्या है? इसका अर्थ है कि जिसमें प्रिंट मीडिया यानि कि समाचार पत्र, टेलीविजन, रेडियों या सोशल मीडिया जो इंटरनेट के माध्यम से संचालित समाचार प्रस्तुत करने का मंच। ऐसे सभी माध्यम मीडिया के अंतर्गत आते हैं। इस में छह ककार जैसे ‘कब, कहां, कौन, किसने, क्यों और कैसे इन सभी प्रश्नों के उत्तर तलाश करने की उत्सुकता एवं जिज्ञासों का लगातार बना रहना परम आवश्यक है, और यही मीडिया का मूल मंत्र भी है।

किसी भी समाचार की प्रस्तुति के दो खंड होते हैं। जिनमे से प्रथम ‘समाचार’ एवं दूसरा ‘विचार’ होता है। समाचार में विचारों का विलय पत्रकारिता में स्वीकार नहीं किया जाता है। विचारों की प्रस्तुति अलग से किया जाता है। इसे मिलाकर किसी समाचार को बनाया नही जाना चहिये। इसके उदाहरण स्वरूप किसी भी घटना के चित्रण में उसका विवरण एवं शब्दों के चयन से उसकी प्रस्तुतिकरण एवं उस घटनास्थल का चित्रण एवं प्रतिक्रियाएँ उस घटना के आधार के मूल तत्व होते हैं। यदि इसमें संपादक या पत्रकार द्वारा किसी भी तरह की अपनी बात को जोड़ा जाता है तो उसे किसी भी रूप में स्वीकार किया नहीं जा सकता है। लेकिन अक्सर समाज या जनहित में छोटी सी घटना को बहुत बड़ी बना देना और देश हित में बड़ी से बड़ी घटना को क्षुद्र बना देना, पत्रकारिता में अब इसकी आजादी बन गयी है।

जैसा कि हम सब अन्ना हजारे के आंदोलन से अच्छी तरह वकीफियत रखते हैं जोकि कोई जन आंदोलन नहीं था वल्कि सोशल मीडियाऔर मीडिया द्वारा प्रायोजित आंदोलन था, जो छोटे-छोटे लोगों के समूह की बातों को इस प्रकार पेश कर रहे थे कि मानो देश में एक भूचाल पैदा हो जाएगा। वहीं पर सही अर्थों में जयप्रकाश नारायण द्वारा किया गया आंदोलन वास्तव में एक जन आंदोलन था।

अब आते हैं मूल मुद्दे पर, जैसा कि हम सभी लोग मीडिया शब्द से अच्छी तरह वाकिफ हैं और इस शब्द को लोगों ने बहुत सुना एवं पढ़ा है लेकिन यह ‘गोदी मीडिया’ क्या है? यह मीडिया और फेक समाचार शब्द का चलन मौजूदा पिछले पांच वर्षों के दौरान देखने को मिला। हम लोगों को यह बहुत अच्छी तरह से याद होगा कि जब भाजपा के अध्यक्ष ने एक टीवी चैनल को दिये गये अपने एक साक्षात्कार के दौरान यह स्वीकार किया था कि ‘‘चुनाव के वक्त मोदी जी के द्वारा 15-15 लाख रुपये देश के प्रत्येक नागरिक के बैंक खातों में आयेगें। उस वक्त जनसाधारण ने इसका क्या-क्या अर्थ निकाला! यह एक अलग विषय है लेकिन यह मात्र एक जुमला था।

केंद्र सरकार बनने के बाद जीएसटी, नोटबन्दी, बैंक में जमा लोगों का पैसा नहीं निकाल पाने और राज्य सरकार से निकले गए होमगॉर्ड और आर्थिक मंदी से बेरोजगार हुए बदहाल लोग और शिक्षित वर्ग को नौकरी न मिलने के कारण लोग आये दिन सोशल मीडिया पर अपनी त्रासदी और बदहाली के बारे में पोस्ट डालकर अपनी पीड़ा जाहिर करते हैं। उनका कहना हैं कि यह मीडिया हमेशा सरकार की उपलब्धि दिखाती हैं लेकिन हमारी समस्या नहीं दिखाती, वह कहते हैं कि यह गोदी मीडिया नहीं तो और क्या है?

वहीं हम जब वर्तमान समय की बात करते हैं तो इन दिनों मीडिया का एक बड़ा धड़ा या वर्ग पत्रकारिता को फेक न्यूज परोसने का माध्यम बना लिया है। मुख्यतः इलेक्ट्रोनिक मीडिया में इसने अपने पांव बहुत तेजी से पसारे हैं। मौजूदा समय मे ऐसे ही ऐंकर न्यूज चैनलों में दिखायी दे रहें है जो झूठ का साथ देने एवं अपने सम्मान को गिरवी रख कर, पत्रकारिता की मर्यादा को ताक पर रख कर रोजमर्रे की रोजी-रोटी के व्यवस्था में लगे हुये हैं।

मीडिया का प्रथम धर्म होता है कि वह उन छः ककारों को ध्यान में रखकर उन तथ्यों की खोज करे जो समाचार की सत्यता की प्रमाणिकता है लेकिन ‘गोदी मीडिया’ की पत्रकारिता के इन मूल सिद्धांतों की छः ककारों के उलट बात कर रहे हैं। मौजूदा वक्त में इस पत्रकारों का समूह स्पष्ट रूप से अपने आप को गोदी मीडिया का पर्यायवाची बना चुके हैं। इन सबका काम केवल झूठ को समाज के लोगों के मध्य इस प्रकार परोस कर फैलाना है कि वह सच लगे। अर्थात गोदी मीडिया- झूठ, छद्म राष्ट्रवाद, नकली देश भक्ति व विपक्ष के प्रत्येक बात को कमतर आंकना इनकी दिनचर्या का अटूट हिस्सा बन चुका है।

यदि हम वर्तमान समय चल रही पत्रकारिता की बात करें तो पत्रकारिता के क्षेत्र में बड़े एवं प्रसिद्ध नाम एवं सम्मान की नजरों से देखे जाने वाले ऐसे पत्रकारों को देख कर हैरानी होती है उनके द्वारा किये जा रहे पत्रकारिता का स्तर इस हद तक नीचे गिर जायेगा शायद ही किसी ने कल्पना की होगी। वही कुछ ऐसे भी उदहारण सामने आये हैं जिसमें गरीब मजलूमों कि आवाज उठाकर मीडिया ने अपने बेबाकी से लोगों का दिल भी जीत लिया, जिसे लोग सच्ची पत्रकारिता कहते हैं।

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