आत्मकेंद्रित होना अनुचित

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डॉ दिलीप अग्निहोत्री

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल अपने संवैधानिक दायित्वों के प्रति सजग है। इसी के अनुरूप वह लगातार सक्रिय रहती है। राजधानी से बाहर की उनकी यात्रा बहुआयामी होती है। वह विकास से लेकर शिक्षा तक अनेक पहलुओं पर ध्यान देती है। सिद्धार्थनगर का उनका दौर ऐसा ही था। यहां विश्विद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल हुई। इसके अलावा अधिकारियों के साथ बैठक करके अनेक तथ्यों का जायजा लिया। केंद्र द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का जायजा लिए। इसमें बेहतरी के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। सिद्धार्थनगर एनजीओ,रेडक्रास एसोसिएशन, टीबी एसोसिएशन, रोटरी क्लब के अधिकारियों के बैठक की। इसमें भारत सरकार की योजनाएं जन धन योजना, आयुष्मान योजना के अन्तर्गत गोल्डेन कार्ड की प्रगति, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, पोषण अभियान की गतिविधियां, उज्ज्वला योजना,आपरेशन कायाकल्प, प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण शहरी, दीनदयाल अन्त्योदय योजना, प्रधाानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना, प्रधानमंत्री सड़क योजना ग्रामीण, अटल पेंशन योजना,पाइप पेय जल योजना आदि के बारे में जनपद में कराये गये सभी योजना की प्रगति के बारे में प्रजेन्टेशन प्रस्तुत किया गया।

राज्यपाल ने कहा कि भारत सरकार के नीति आयोग के अन्तर्गत उप्र के आठ जनपदों में सिद्धार्थनगर भी सम्मिलित है। इस कार्यक्रम के अन्तर्गत स्वास्थ्य, शिक्षा, स्वच्छता पर विशेष बल दिये जाने की आवश्यकता है। इसके लिए जनसहयोग व जनजागरूकता आवश्यक है। प्राचार्यो को निर्देश दिया कि छात्र छात्राओं को शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाकर उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाये। कक्षाओं दस पढ़ने में अच्छे बच्चों का चयन करें,उनके माध्यम से अन्य बच्चों को भी अच्छी पढ़ाई के लिए प्रेरित करें।

राज्यपाल ने कपिलवस्तु बौद्ध संग्रहालय में पुरातत्व विभाग द्वारा कपिलवस्तु की खुदाई के दौरान मिले अवशेषो देखा, व कपिलवस्तु स्तूप के दर्शन किये। बच्चो के लिए निर्मित हास्टल का उद्घाटन किया। राज्यपाल ने सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षान्त समारोह को सम्बोधित किया। कहा कि इस विश्वविद्यालय का अति संक्षिप्त इतिहास है। इसने अपने कम समय में ऊंचाईयों को छुआ है। विश्वविद्यालय द्वारा ई टेण्डरिंग प्रणाली का कार्य शुरू कर दिया गया है। पाठयक्रम में कामन कोर्सेज चलाने का कार्य किया जा रहा है। सरकार द्वारा रोजगार परक शिक्षा देने का भी कार्य किया जा रहा है।

महात्मा गौतम बुद्ध का बचपन का नाम सिद्धार्थ था। उन्हीं के नाम पर जनपद तथा विश्वविद्यालय का नाम सिद्धार्थ रखा गया है। बच्चों का ऐसी शिक्षा दी जानी चाहिए जो उनके जीवन में खुशहाली लाये। शिक्षा ऐसी हो जो ईश्वर तुल्य देश और समाज को खण्डित न करने की प्रेरणा दे। सभी लोगो को अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए। आदर्शो का प्रचार प्रसार होना चाहिए। वित्तीय पारदर्शिता का कार्य सराहनीय है। विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सेवायोजन का कार्य किया जा रहा है। अपने आप में केन्द्रित होने से बचने की आवश्यकता है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा अनेक योजनायें चलायी गयी है। स्वच्छ भारत, स्वस्थ्य भारत योजनाओं के संबध में जानकारी दी गयी है। स्वच्छता को अपनाकर हम अपने जीवन को स्वस्थ्य बना सकते है। सम्पूर्ण भारत में दो हजार पच्चीस तक टीबी रोग से मुक्त करने का संकल्प लिया गया है। इस दिशा में प्रयास तेज करने की आवश्यकता है। आनंदीबेन पटेल विश्वविद्यालय के शिक्षक व कर्मचारियों द्वारा एक एक टी बी रोगियों को गोद लेकर इस रोग से मुक्त कराने का आहवान किया गया है।

सिद्धार्थ विश्वविद्यालय द्वारा बच्चों को बैग और उसमें रखी गयी पुस्तके दी गयी। उन्हे विद्यालय के पुस्तकालय में रखे और उन्हें पढ़ने के लिए बच्चों को प्रेरित करे। यूपी बोर्ड व उच्च शिक्षा की परीक्षा में नकल विहीन परीक्षा कराकर व्यापक सुधार लाया गया है। महिलाओं को शिक्षा में भागीदारी लाने के लिए आगे आना चाहिए। महिलाओं द्वारा संचालित किये गये स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं में बदलाव आया है। महिलाओ को आज के परिवेश में आगे पढ़ाने या पढ़ने की आवश्यकता है। देश को आगे लाने के लिए प्रदेश भारत सरकार शिक्षा के क्षेत्र में अधिक कार्य कर रही है। आंगनबाड़ी गांव में रहती है उनका दायित्व है कि कुपोषित बच्चों को पोषित बच्चो की श्रेणी में लायें। जब तक हमारी बेटियां स्वस्थ्य नही होगी तब तक हमारा समाज तथा उससे पैदा होने वाले बच्चे स्वस्थ्य नही होगें।

उन्होंने सभी बेिटयों को अपने स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी गयी, आप स्वस्थ्य रहेंगी तो भारत स्वस्थ्य रहेगा। समाज के अन्दर सबसे बड़ा अभिशाप दहेज प्रथा है इस प्रथा को मिटाने की आवश्यकता है। उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में बहुत सुधार किया गया है। नकल विहीन परीक्षा सुनिश्चित हुई है, सत्र नियमित हो चुके है। अब गुणवत्ता पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है।

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