छात्रा बार-बार गिड़गिड़ाती रही, चीखती रही कि “मैं चोर नहीं हूं, लेकिन किसी ने नहीं सुना
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है, जहां नोएडा में पढ़ाई करने वाली नेपाल की एक छात्रा को चोर समझकर भीड़ ने बेरहमी से पीट दिया। यह घटना किला थाना क्षेत्र के बारादरी मोहल्ले में शुक्रवार देर रात की है। छात्रा अपने दोस्त से मिलने बरेली आई थी, लेकिन स्थानीय लोगों ने उसे चोर समझकर बिजली के खंभे से बांध दिया और उसकी पिटाई की। इस दौरान वह बार-बार गिड़गिड़ाती रही, चीखती रही कि “मैं चोर नहीं हूं,” लेकिन भीड़ का दिल नहीं पसीजा। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसने कानून-व्यवस्था और सामाजिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, पीड़ित छात्रा नोएडा में पढ़ाई करती है और अपने परिचित रेशम सिंह और विनय गंगवार के बुलावे पर बरेली आई थी। देर रात करीब ढाई बजे वह उनके घर की छत पर फोन पर बात कर रही थी। उस समय मोहल्ले के कुछ लोग ड्रोन चोरों की अफवाहों के चलते पहरेदारी कर रहे थे। अंधेरे में एक अनजान लड़की को छत पर देखकर उन्होंने चोर होने का शक किया और शोर मचाना शुरू कर दिया। डर के मारे छात्रा ने छत से छलांग लगा दी, जिसके बाद भीड़ ने उसे पकड़ लिया। इसके बाद उसे बिजली के खंभे से बांधकर बेरहमी से पीटा गया। पिटाई इतनी जोरदार थी कि उसके कपड़े तक फट गए, और वह लगातार अपनी बेगुनाही की गुहार लगाती रही।
पुलिस की कार्रवाई और गांव की भूमिका
घटना की सूचना मिलते ही किला थाना पुलिस मौके पर पहुंची और छात्रा को भीड़ से बचाकर जिला अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस ने वायरल वीडियो के आधार पर चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और अन्य की तलाश जारी है। एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि मामले में गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है, और कानून को अपने हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, पीड़िता ने अभी तक लिखित शिकायत दर्ज करने से परहेज किया है, जिसके कारण पुलिस वीडियो के आधार पर ही कार्रवाई कर रही है।
इस घटना ने गांव के सामाजिक ढांचे पर भी सवाल उठाए हैं। क्या गांव में कोई बुजुर्ग, प्रधान या जिम्मेदार व्यक्ति नहीं था, जो इस भीड़ को रोकता और छात्रा की बात सुनता? यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऐसी घटनाएं अक्सर अफवाहों और भीड़ की मानसिकता के कारण होती हैं। स्थानीय स्तर पर नेतृत्व की कमी और जागरूकता का अभाव इस तरह की बर्बरता को बढ़ावा देता है।
सोशल मीडिया पर गुस्सा और तालिबानी विचारधारा की आलोचना
सोशल मीडिया पर इस घटना ने लोगों का गुस्सा भड़का दिया है। कई यूजर्स ने इसे “तालिबानी विचारधारा” करार देते हुए भीड़ की क्रूरता की कड़ी निंदा की है। एक यूजर ने लिखा, “क्या हम सब अब खुद ही कानून बन गए हैं? बिना जांच के किसी को खंभे से बांधकर पीटना कहां का इंसाफ है?” कई लोगों ने पुलिस और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। यह वीडियो न केवल बरेली बल्कि पूरे देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठा रहा है।
ड्रोन चोर की अफवाह और सामाजिक जिम्मेदारी
बरेली में हाल के दिनों में ड्रोन चोरों की अफवाहों ने लोगों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया है। इसके चलते ग्रामीण और शहरी इलाकों में लोग रात में पहरेदारी कर रहे हैं। इस घटना से पहले भी हाफिजगंज थाना क्षेत्र के उदरनपुर गांव में एक युवक को चोर समझकर खंभे से बांधकर पीटा गया था, जिसका वीडियो भी वायरल हुआ था। इन घटनाओं से साफ है कि अफवाहों ने लोगों में अविश्वास और हिंसा को बढ़ावा दिया है।
पुलिस को बुलाकर मामले की जांच करानी चाहिए थी
इस मामले में गांव वालों को तुरंत पुलिस को बुलाकर मामले की जांच करानी चाहिए थी। बिना सबूत के किसी को चोर मानकर सजा देना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि यह मानवता के खिलाफ भी है। गांव के प्रधान या बुजुर्गों को स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आगे आना चाहिए था। अगर भीड़ ने शांति से मामले को पुलिस के हवाले किया होता, तो यह बर्बरता टल सकती थी।
बता दें कि यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था की विफलता को दर्शाती है, बल्कि सामाजिक जागरूकता और संवेदनशीलता की कमी को भी उजागर करती है। अफवाहों पर आधारित हिंसा और भीड़ द्वारा कानून को अपने हाथ में लेना समाज के लिए खतरनाक है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई इस मामले में सराहनीय है, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जागरूकता अभियान और सख्त कानूनी कदम जरूरी हैं। यह समाज के हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह अफवाहों पर विश्वास करने के बजाय कानून का सहारा ले और मानवता को सर्वोपरि रखे।







