लखनऊ/दिल्ली, 30 अगस्त 2025: बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने एक बड़ा कदम उठाते हुए अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त किया है। यह पद मायावती के बाद बीएसपी में दूसरा सबसे महत्वपूर्ण पद माना जा रहा है। दिल्ली में 29 अगस्त को आयोजित राष्ट्रीय समन्वयकों की बैठक में यह फैसला लिया गया। इस नियुक्ति के साथ ही मायावती ने आकाश को पार्टी के सभी सेक्टरों, केंद्रीय और राज्य कोऑर्डिनेटरों, और प्रदेश अध्यक्षों की गतिविधियों की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी है। आकाश सीधे मायावती को रिपोर्ट करेंगे।
आकाश आनंद ने इस नियुक्ति पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मायावती को धन्यवाद देते हुए लिखा, “आदरणीय बहन जी का हृदय से आभार। मैं बाबासाहेब डॉ. अंबेडकर और मान्यवर कांशीराम के आंदोलन को पूरे समर्पण से आगे बढ़ाऊंगा। जय भीम, जय भारत।” बीएसपी यूपी अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने भी इसकी पुष्टि की और आकाश को बधाई दी।
पार्टी से निष्कासन से वापसी तक का सफर:
गौरतलब है कि मार्च 2025 में मायावती ने आकाश को पार्टी से बाहर कर दिया था, कारण थे उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ की कथित गुटबाजी और आकाश के आक्रामक भाषण, जिनमें उन्होंने 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी सरकार को “आतंकवादी” कहा था। हालांकि, अप्रैल 2025 में माफी के बाद उनकी वापसी हुई और मई में उन्हें चीफ नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाया गया। अब राष्ट्रीय संयोजक की नई भूमिका आगामी बिहार और 2027 यूपी चुनावों के लिए बीएसपी की रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
पार्टी में अन्य बदलाव: मायावती ने राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटरों की संख्या तीन से बढ़ाकर छह की, जिनमें रामजी गौतम, राजाराम, रणधीर सिंह बेनीवाल, लालजी मेधांकर, अतर सिंह राव, और धर्मवीर सिंह अशोक शामिल हैं। इसके अलावा, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, हरियाणा, पंजाब जैसे राज्यों में नए प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं।
रणनीति और भविष्य: मायावती (69) की यह नियुक्ति पार्टी में युवा नेतृत्व को स्थापित करने की दिशा में एक कदम है।
X पर वायरल पोस्ट्स के मुताबिक, बीएसपी अब “भाईचारा समिति” के जरिए दलित-ओबीसी गठजोड़ को मजबूत कर रही है। आकाश की अगुवाई में पार्टी 2025 के बिहार और 2027 के यूपी चुनावों में नई रणनीति के साथ उतरने की तैयारी में है।
बता दें कि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम बीएसपी को नए सिरे से संगठित करने और चंद्रशेखर आजाद जैसे उभरते दलित नेताओं के प्रभाव को कम करने की कोशिश है। हालांकि, 2024 में पार्टी का वोट शेयर 9.3% तक गिरने के बाद आकाश के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं।







