मायावती को राज्यसभा भेजने के लिए तैयार हुआ MP में नया प्लान

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मध्यप्रदेश से उम्मीदें, 50 सीट से अधिक जीतने का है टारगेट 


रीवा, 11 दिसम्बर। बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती के राज्यसभा जाने का रास्ता उत्तर प्रदेश में मिली करारी हार के बाद बाधित हुआ है। उनका कार्यकाल 2019 तक होने के बावजूद त्यागपत्र दिए जाने के बाद अब राज्यसभा जाने की राह मुश्किल हो रही है। रीवा में आयोजित पार्टी के जोन स्तरीय सम्मेलन में राज्यसभा सांसद एवं प्रदेश प्रभारी अशोक सिद्धार्थ ने कहा कि प्रदेश में 50 सीट से अधिक जीतने का टारगेट है। सभी 230 सीटों पर पार्टी चुनाव लड़ेगी।

मध्यप्रदेश से ही टिकी उम्मीदें

नए प्लान में यदि पार्टी सफल हुई तो राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती को मध्यप्रदेश से ही राज्यसभा भेजा जाएगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि वह अपने-अपने बूथ पर पूरी ताकत के साथ काम करें और अधिक से अधिक सीट जिताने में सहयोग करें। उत्तर प्रदेश से लगे जिलों में पार्टी मजबूत स्थिति में है। अन्य जिलों में भी अच्छे प्रत्याशियों का चयन किया जाएगा। यह चुनाव प्रदेश की भाजपा सरकार के विदाई का है।

कमजोर बूथ पर सदस्य बढ़ाएं

विधानसभा के पूर्व प्रत्याशियों और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से प्रदेश प्रभारी ने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में जिन बूथों पर पार्टी को हार का सामना करना पड़ा था, वहां पर सदस्यों की संख्या बढ़ाने के साथ ही नियमित कार्यक्रम आयोजित कर लोगों से संवाद स्थापित किए जाएं। पुराने नेताओं से भी कहा है कि वह फील्ड में निकलें और पार्टी के लिए समय देकर संगठन को मजबूत बनाएं।

15 जनवरी को प्रदेश भर में भव्य कार्यक्रम

बसपा का अगला बड़ा कार्यक्रम 15 जनवरी को प्रदेश भर में होगा। मायावती का इस दिन जन्मदिन भी है, इस कारण हर विधानसभा क्षेत्र में बड़े कार्यक्रम होंगे। संभाग स्तर पर कार्यक्रम की रूपरेखा बाद में तय की जाएगी। जहां पर पार्टी के बड़े नेताओं को पहुंचना है।

इन्होंने भी किया संबोधित

शहर के युवराज गार्डन में आयोजित जोन स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन में प्रदेश प्रभारी के साथ ही सह प्रदेश प्रभारी अंतर सिंह राव, प्रदीप अहिरवार, रामलखन पटेल, प्रदेश अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद अहिरवार, जोनप्रभारी रामसखा वर्मा, विधायक शीला त्यागी, ऊषा चौधरी, पूर्व सांसद देवराज सिंह पटेल आदि ने संबोधित किया। सभी ने पूरी ताकत के साथ विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटने का आह्वान किया।

पुराने नेताओं को मिलेगी तरजीह

बसपा के पुराने नेताओं ने पार्टी को स्थापित करने में कड़ी मेहनत की थी। अब वह हासिए पर धकेल दिए गए हैं। पार्टी अब ऐसे नेताओं को तरजीह देकर उनकी ऊर्जा का इस्तेमाल करेगी। कुछ नेता भाजपा में चले गए हैं तो कुछ अब कांग्रेस में जाने की तैयारी कर रहे हैं, ऐसे में डैमेज कंट्रोल भी पार्टी के लिए जरूरी माना जा रहा है।

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