मुंबई, 05 अगस्त, 2021: वोडाफोन आइडिया का संकट गहराता जा रहा है। फंड जुटाने की कोशिशें नाकाम रही हैं। कुमार मंगलम बिड़ला ने नॉन-एग्जिक्यूटिव चेयरमैन पद से इस्तीफा भी दे दिया है। ऐसे में कंपनी दिवालिया हुई तो इससे दो प्राइवेट बैंकों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। दोनों बैंक अभी बैड लोन की समस्या से उबरने की कोशिश कर रहे हैं। वोडाफोन आइडिया के प्रमोटरों ने कंपनी में पूंजी लगाने से इनकार कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) के कैलकुलेशन में गलती सुधारने की कंपनी की याचिका ठुकरा चुका है। नई पूंजी जुटाने की कंपनी की कोशिश कामयाब होने की उम्मीद कम है। बिड़ला के इस्तीफे से भी निवेशकों पर असर पड़ा है। ऐसे में वोडाफोन आइडिया के 1.8 लाख करोड़ रुपये के कर्ज को चुकाने की कम ही उम्मीद है। वोडाफोन आइडिया ने सरकारी और प्राइवेट बैंकों से कम से सम 28,700 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। उसने सबसे ज्यादा 11,000 करोड़ रुपये का कर्ज स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से लिया है। यस बैंक से भी 4,000 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। उसने इंडसइंड बैंक से 3,500 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है।
हालांकि, लोन बुक के लिहाज से वोडाफोन आइडिया के डूबने का सबसे ज्यादा असर आईडीएफसी फर्स्ट बैंक पर पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि उसकी लोनबुक में वोडाफोन आइडिया के लोन की हिस्सेदारी 2.9 फीसदी है। इसके बाद यस बैंक की लोन बुक में वोडाफोन आइडिया की हिस्सेदारी 2.4 फीसदी है। इंडसइंड बैंक की लोन बुक में उसके लोन की हिस्सेदारी 1.65 फीसदी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक वोडाफोन आइडिया के लोन को दबाव वाले लोन की कैटेगरी में डाल चुका है। उसने कुल लोन के 15 फीसदी का प्रोविजन किया है। वोडाफोन आइडिया के डूबने का आने वाली तिमाहियों में इन बैंकों के प्रदर्शन पर खराब असर पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि उन्हें इस लोन के लिए बड़ा प्रावधान करना पड़ेगा। एसबीआई सहित कई बैंकों के शेयरों पर गुरुवार को दबाव देखने को मिला। एसबीआई का शेयर 3.28 फीसदी गिरकर 441.95 रुपये पर बंद हुआ। यस बैंक का शेयर 1.58 फीसदी गिरकर 12.45 रुपये पर बंद हुआ। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक का शेयर 4 फीसदी से ज्यादा की कमजोरी के साथ कारोबार के अंत में 47.75 रुपये पर रहा।







