पहली जॉब में न करें ये ‘गलतियां’

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बिंदिया सिंह

पहली जॉब पाना एक सपने के सच होने जैसा होता है। हालांकि नए माहौल व नए लोगों के साथ काम करना जितना रोचक है, उतना ही कठिन भी। शुरुआती दिनों में नए लोगों के साथ तालमेल करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, लेकिन अगर कुछ बातों का ध्यान रखा जाए, तो धीरे-धीरे यह सब आसान हो जाता है। जिंदगी में पहली जॉब का उत्साह, जहां मेहनत से मन लगाकर काम करने में मदद करता है, वहीं शुरू-शुरू में थोड़ा नर्वस होना भी स्वाभाविक सा है।

इस समय एक ओर तो नियमों को अपनाकर अपने काम को अच्छे से करना जरूरी होता है, वहीं बॉस सहित अपने सभी सहयोगियों के साथ सामंजस्य बिठाना भी जरूरी होता है। यह सब एक कला की तरह है।

बड़े ब्रांड की जगह अपनी रुचि पर ध्यान दें। ऐसा काम करें, जो आपकी रचनात्मकता को रूप दे, फिर चाहे कंपनी बड़ी हो या छोटी। ऐसा भी देखा जाता है कि युवा अपने माता-पिता या सीनियर्स की सलाह पर अधिक चलते हैं और विशेषज्ञों की कम, जबकि होना इसका उल्टा चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार अगर आपको सीखने का मौका मिल रहा है, तो यही काफी है। कुछ लोग पहली जॉब से जरूरत से ज्यादा उम्मीदें पाल लेते हैं, लेकिन यह गलत है। पहली जॉब में आपको कितनी सैलरी मिल रही है, यह बहुत ज्यादा मायने नहीं रखता। कुछ समय अपने काम को समझने में लगाना चाहिए और अपनी क्षमता को और अधिक मजबूत बनाना चाहिए। पहली जॉब एक घर की नींव की तरह होती है।

जॉब बदलने की रेस में न भागें:

अक्सर देखने में आता है कि पहली जॉब मिलते ही दूसरी जॉब तलाशने की रेस सी लग जाती है। ये आपकी गलतफहमी है कि अगर आप जल्दी जल्दी कंपनी बदलेंगे, तो आपका प्रोफाइल मजबूत होगा। अगर आप पांच साल में सात नौकरियां बदलते हैं और इसके बारे में कोई सवाल पूछा जाता है, तो आपके पास कोई उचित जवाब नहीं होता है। इससे आपकी स्थिरता पर ही सवाल उठते हैं। दरअसल जल्दी-जल्दी जॉब बदलना निगेटिव प्रोफाइल को दर्शाता है, इसलिए इस आदत से परहेज करें। आपने किस कम्पनी में कितने समय काम किया और क्या सीखा, यह बहुत मायने रखता है। हर कंपनी कर्मचारी की ट्रेनिंग पर अपने रिसोर्स खर्च करती है और अगर आप जल्दी ही कंपनी छोड़ देते हैं, तो न तो उन स्किल्स का आप इस्तेमाल कर पाते हैं और न ही वह सब आपकी प्रोफाइल में जुड़ पाता है।
कुछ लोग यह मानते हैं कि ग्रेजुएशन या प्रोफेशनल डिग्री के बाद सीधे कैम्पस प्लेसमेंट से विकास रुक जाता है। लेकिन ऐसा नहीं है। अगर आपने ग्रेजुएशन या प्रोफेशनल डिग्री के बाद जॉब ज्वॉइन की है, तो आप इसके आगे की पढ़ाई करके भी प्रमोशन पा सकते हैं। कुछ कम्पनियां तो अपने कर्मचारियों के लिए कई तरह के स्टडी प्रोग्राम भी चलाती हैं, ताकि आप कमाई के साथ-साथ पढ़ाई भी कर सकें। हाल ही में हुए एक सर्वे में देश भर के एक हजार से अधिक सीईओ के विचार जाने गए, जिससे पता चला कि 80 प्रतिशत सीईओ अपनी पहली जॉब में करीब पांच वर्ष टिके रहे थे। इससे पता चलता है कि पहली जॉब किस तरह आपके कॅरियर की नींव मजबूत करने के लिए जरूरी होती है।
पहली जॉब को अपनी सफलता की सीढ़ी बनाने के लिए जरूरी है कि आप में धैर्य जरूर हो। आपका सीनियर कुछ कह रहा हो, तो आप बीच में टोका-टाकी कतई न करे, इसे आपकी उत्सुकता नहीं, बल्कि अनुशासन-हीनता माना जाएगा। आपसे जब कोई बात पूछी जाए, तभी आप बोलें।
कंपनियां फ्रेशर्स को काम के गुर सीखने का पूरा मौका देती हैं। ऐसे में फ्रेशर्स को इनका पूरा फायदा भी उठाना चाहिए। एक और अहम बात यह है कि झूठ, अनुशासनहीनता या गलत व्यवहार आपकी शुरुआत को अंत में भी बदल सकता है। इसलिए इन चीजों से हमेशा बचकर रहना चाहिए और समझदार प्रोफेशनल की तरह काम करना चाहिए।