दस दिवसीय ग्रीष्मकालीन कला कार्यशाला का समापन, कार्यशाला में कक्षा केजी से फ़ाइन आर्ट्स तक के विद्यार्थियों ने भाग लिया, विषय विशेषज्ञ अनुभवी कलाकारों द्वारा प्रशिक्षित किया गया
लखनऊ, 31 मई 2025: फ्लोरेसेंस आर्ट गैलरी और लखनऊ पब्लिक स्कूल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दस दिवसीय ग्रीष्मकालीन कला कार्यशाला ने बच्चों की कलात्मक प्रतिभा को निखारने में शानदार सफलता हासिल की। 21 मई से शुरू हुआ यह शिविर सहारा स्टेट, गोमती नगर और ए-ब्लॉक राजाजीपुरम में आयोजित किया गया, जिसमें कक्षा केजी से लेकर फाइन आर्ट्स तक के छात्रों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया।
इस कार्यशाला में अनुभवी कलाकारों ने बच्चों को वॉश पेंटिंग, राकु और टेराकोटा मूर्तिकला, पेपर मेशी मुखौटा निर्माण जैसी विविध कला विधाओं से परिचित कराया। प्रख्यात वॉश चित्रकार राजेंद्र प्रसाद ने जल रंग की बारीकियों को सिखाया, जबकि सिरेमिक कलाकार प्रेम शंकर प्रसाद ने मिट्टी के बर्तनों की कला के माध्यम से बच्चों को रचनात्मकता का अनुभव कराया। सुश्री शुचिता सिंह और संध्या यादव ने पारंपरिक मुखौटा निर्माण सत्रों में भारतीय लोक परंपराओं को जीवंत किया।
यह कला कार्यशाला केवल एक शृंखला ही नहीं बल्कि एक परिवर्तनकारी शिक्षण अनुभव था : नेहा सिंह
आर्ट गैलरी की निदेशक सुश्री नेहा सिंह ने इसे एक परिवर्तनकारी अनुभव बताते हुए कहा, “यह शिविर सिर्फ कला सिखाने का मंच नहीं, बल्कि बच्चों में सांस्कृतिक संवेदनशीलता और आत्मविश्वास जगाने का माध्यम बना। हमारा लक्ष्य न केवल अकादमिक उत्कृष्टता, बल्कि सांस्कृतिक और रचनात्मक विकास है।”
अंतिम दिन बच्चों की बनाई कृतियों की प्रदर्शनी ने दर्शकों का दिल जीत लिया। वॉश पेंटिंग्स, मिट्टी के बर्तन और जीवंत मुखौटों ने अभिभावकों, शिक्षकों और स्थानीय कलाकारों से खूब प्रशंसा बटोरी। स्कूल की प्रधानाचार्याओं में में भारती गोसाईं, अनीता चौधरी और मीना तांगड़ी ने विशेषज्ञ कलाकारों को सम्मानित किया और प्रतिभागी बच्चों को प्रमाणपत्र प्रदान किए।
कला शिक्षकों सरोज सिंह, सविता विश्वकर्मा और जैसवार अभिषेक जयराम ने कार्यशाला को सुचारु रूप से संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गैलरी के क्यूरेटर भूपेंद्र कुमार अस्थाना ने बताया कि बच्चों ने न केवल कौशल सीखा, बल्कि भारतीय कला की गहरी सांस्कृतिक समझ भी विकसित की।
प्रतिभागी बच्चों जैसे हर्षविक सूरी, तन्वी सिंह, अनमोल यादव और अन्य ने उत्साह के साथ कला की विभिन्न विधाओं में अपनी प्रतिभा दिखाई। अभिभावकों और शिक्षकों ने बच्चों के आत्मविश्वास और रचनात्मकता में आए बदलाव की सराहना की।
इस शानदार सफलता के साथ, आयोजक अगले वर्ष संगीत, नृत्य और डिजिटल कला को शामिल कर कार्यक्रम को और विस्तार देने की योजना बना रहे हैं। इस पहल ने न केवल बच्चों को समृद्ध किया, बल्कि आधुनिक शिक्षा में सांस्कृतिक और कलात्मक शिक्षा के महत्व को भी रेखांकित किया।







