31 दिसंबर को तो पार्टी मनाना ही चाहिये..

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एक बार इंद्र भगवान ने गुस्से मे आकर सभी को श्राप दे दिया के 12 साल वो बरसात नही करेंगे जिससे लोग पानी को तरसेंगे…

लोगो मे हाहाकार मच गया बडे बडे देवो ने समझाया पर इंद्र भगवान नही माने….

बरसात का महीना आया इंद्रदेव ने बरसात नही किया पर एक किसान अपने बच्चो के साथ खेत मे गया और खेती के वो सभी काम करने लगा जो बरसात से पहले किये जाते है साथ मे वो अपने बच्चो को भी समझा रहा था के काम कैसे किया जाये…

इंद्रदेव को देख कर बहुत आश्चर्य हुआ कि 12 साल तक पानी नही बरसेगा फिर भी ये काम क्यों कर रहा है…????

इंद्रदेव ब्राह्मण का रूप धर के उसके पास गये और कहा हे किसान क्या तुमने श्रापित आकाशवाणी नही सुनी थी कि 12 साल बरसात नही होगी??? फिर तुम क्यों खेत जोत रहे हो???

किसान ने कहा सुनी थी, ब्राह्मणदेवता… पर अगर मै और मैरे बेटे 12 साल काम नही करेंगे तो हम भूल जायेगे के खेती कैसे करते है फिर बारिश होगी तो भूखो मर जायेंगे इसलिये हम खेती कर रहे है….

इंद्रदेव की आंखे खुल गयी वो सोचने लगे 12 साल मे तो शायद मैं भी अपना बारिश गिराने का कौशल भूल जाउंगा…… उन्होने तुरंत श्राप वापस लिया और बारिश करवा दी…

मोरल:- इस कहानी से हमे ये सीख मिलती है की….
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हमको कितनी भी कडकी लगी हो या पैसे की तंगी हो ..
31 दिसंबर को तो पार्टी मनाना ही चाहिये.. नही तो जिस दिन पैसे आयेंगे हम पार्टी करना भूल गये होंगे…..

एक आदमी की छत टपक रही थी ठीक डायनिंग टेबल के ऊपर….

सुधारने आए प्लम्बर ने पूछा : आपको कब पता चला ??

आदमी: कल रात को, जब मेरा एक पैग तीन घंटे तक खत्म ही नही हुआ !!

ज़रा पूंछ कर देखो:

एक बात पूछनी थी~
ये जो इज्ज़त का सवाल होता है….

ये कितने नम्बर का होता है ¿?

किसी को पता है,गलतियों पर डालने वाला पर्दा कहाँ मिलता है..?

और कितना मीटर लेना पड़ेगा..??

 

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