आपकी शिकायत: -सुभाष, ई-मेल से
सर बंधुआ मजदूर सिर्फ ईंट के भट्टों और खेतों में नहीं हैं। आज के दौर में औद्योगिक इकाइयों में बंधुआ मजदूर देखे जा रहे हैं। इसलिए हमारी मांग है कि बंधुआ मजदूरी विरोधी कानून का दायरा विस्तृत किया जाए। यह एक सराहनीय प्रयास हे जिसका देशभर में स्वागत किया जाना चाहिये!
अभी हालत यह है कि मप्र सहित समूचे देश के सभी प्रांतों में बड़े ही नहीं बच्चे व महिलाएँ तक चंद रुपये कि खातिर बन्धुआ रख कार उनसे जानवरों कि तरह काम करवाया जाता हे! जहां एक सामन्य मजदूर कि दिहाड़ी 300रु से अधिक है वही इन्हे मातृ 90रु दिए जाते जिससे इनके परिवार को दो जून कि रोटी भी दोनो वक्त नहीं मिलती हैं ! कई बार तो इन्हें भूखे पेट ही बच्चो को सुलाना पड़ता है ! बेखबर प्रशाशन तंत्र को इसके खिलाफ सख्त अभियान छेड़ना चाहिये !







