मोना मिश्रा ने राज्यपाल को लिखा खत, जल्द रिहाई की मांग की
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने नेपाल के दुस्साहस को समझने की दी सलाह
लखनऊ, 01 जून 2020: कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू की गिरफ्तारी के खिलाफ प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को पत्र भेजा है। उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा की गयी गिरफ्तारी को राजनीतिक विद्वेषपूर्ण बताते हुए कहा है कि शासन द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने सोमवार को राज्यपाल से जल्द अजय कुमार लल्लू के रिहाई की मांग की।

उन्होंने लिखा है कि अजय कुमार लल्लू को गिरफ्तारी के दौरान सिंचाई विभाग के गेस्ट हाउस लाया गया, उन्हें किसी से मिलने नहीं दिया गया और वकील से भी नहीं मिलने दिया। दूसरे दिन उन्हें लखनऊ जेल भेज दिया गया, जहां उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा है। बार-बार मैं भी मिलने का प्रयास कर रही हूं लेकिन वहां जाने नहीं दिया जा रहा है।
मोना ने लिखा है कि अजय कुमार लल्लू विधान सभा के वरिष्ठ सदस्य हैं। एक राष्ट्रीय राजनैतिक दल के प्रदेश अध्यक्ष हैं। उनके साथ किया जा रहा अमानवीय आचरण दोष से परिपूर्ण है। उत्तर प्रदेश के ‘‘प्रथम नागरिक’’ होने के कारण आप संविधान की संरक्षक है, आप हमारे अधिकारों की रक्षा करेंगी। इसकी हमें पूर्ण आशा है। मोना ने मांग की है कि अजय कुमार लल्लू के खिलाफ दर्ज मुकदमा तत्काल वापस लिया जाय और उन अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाय, जिन्होंने आगरा से लखनऊ उन्हें घसीट कर लाया।
कांगे्रस वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी ने कहा है कि आज भारत के इतिहास का भारत – नेपाल सम्बन्धों का दुर्भाग्यपूर्ण दिन है। भारत के तीन भूभाग लिपुलेख, कालापानी, लिम्पियाधुरा को नेपाल असंवैधानिक और छद्म रूप से अपना भाग बता रहा है, जबकि ये भारत का अभिन्न अंग है। तिवारी ने कहा है कि नेपाल में इतना साहस नहीं है कि वह अपने बल पर भारत को चुनौती देने का दुस्ससाहस करने की जुर्रत करता, इसे दूर तक पढ़ने और समझने की जरूरत है। अब समय आ गया है कि मोदी सरकार अपनी विदेश नीति और पड़ोसी देशों से सम्बन्ध पर पुनर्विचार करे।







