Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Monday, August 17
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»आर्ट एंड कल्चर

    पुतुल कला का समाकालीन दस्तावेज छायानट विशेषांक प्रकाशित

    ShagunBy ShagunJuly 26, 2023Updated:July 26, 2023 आर्ट एंड कल्चर No Comments4 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 839

    लखनऊ, 26 जुलाई। लुप्तप्राय पुतुल कला पर उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की त्रैमासिक पत्रिका ‘छायानट’ का अंक-167 विशेषांक रूप में प्रकाशित हो गया है। इसमें विश्व भर में हो रहे समकालीन पुतुल कला से सम्बंधित लेखों के साथ ही उत्तर-दक्षिण, उत्तर-पूर्व की परम्परागत भारतीय कठपुतली कला पर पुतुल विशेषज्ञों ने अपनी दृष्टि डाली है। विशेषांक में अंतर्राष्ट्रीय पुतुल कला मंच के अध्यक्ष पद्मश्री दादी डी.पद्मजी से बातचीत सम्यक है तो मुखपृष्ठ पर उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र की एकल कला विधा गुलाबो-सिताबों की तस्वीर के साथ यह अंक प्रदेश की इसी कला विधा को समर्पित है।

    अंक में पहला सारगर्भित शोधपरक लेख प्रदेश के नवाबी दौर में विकसित हुए ‘गुलाबो-सिताबो’ के खेल पर विधा की धमक विदेशों तक पहुंचाने वाले चार दशकों के अनुभवी प्रदीपनाथ त्रिपाठी का है। उदयपुर के अपने आप में एक संस्था रहे वयोवृद्ध विद्वान डा.महेन्द्र भानावत ने गुलाबो-सिताबो की व्याख्या के साथ ही विभिन्न भारतीय और कई अन्य देशों की पुतुल कला पर अपनी दृष्टि दी है। दुनियादारी और फनकारी की दहलीज पर खड़े एक लोक कलाकार के असल हालात और त्रासदी को परम्परागत गुलाबो-सिताबो के कलाकार नौशाद पर शबाहत हुसैन विजेता से साक्षात्कार के बाद अपने लेख में इस तरह समाहित कर सामने लाए है कि वह सब लोक विधाओं के संस्कृति संवाहकों के बीच विचारणीय बिंदु होकर उभरे। कला समीक्षक राजवीर रतन के संपादन में निकले इस अंक के सम्पादकीय में भी गुलाबो-सिताबो से जुड़े तथ्य है तो उन्हीं के स्वच्छता अभियान पर लिखे पुतुल नाटक ‘जब जागा तभी सवेरा’ में गुलाबोे-सिताबो की नांेक-झोंक की एक आधुनिक रोचक झलकी का भी समावेश अंक के गुलाबो-सिताबो पर केन्द्रित होने की तस्दीक करता है।

    विशेषांक संपादक राजवीर रतन

    दक्षिण भारत की पुतुल कलाओं के रवायती और समकालीन प्रयोगों को रामचन्द्र पुलवर-राहुल पुलवर ने अपने लेख में समेटा है। बंगलुरु की अनुभवी पुतुलकर्मी अनुपमा होसकेरे ने परम्परा में प्रयोगशीलता को पिरोते हुए यक्षगान से सम्बंधित कर्नाटक की अनूठी सजीली पुतुल कला के बारे में उन्होंने अपने लेख में अतीत के संग भविष्य को टटोला है ओर वर्तमान को तर्कसंगत रूप में सामने रखा है। बंगाल के चमत्कृत करने वाले पुतुलकर्मी सुदीप गुप्ता ने बंगाल की पुतुल कला को अपनी दृष्टि से लेख में उकेरा है। विद्वान लोकनाथ शर्मा ने अनेक संस्कृत सूत्र प्रस्तुत किये हैं। पुतुल कला की संरक्षक के तौर पर जानी गई श्रीमती वेल्दीफिशर और उनके लखनऊ में बसाए साक्षरता निकेतन से जुड़े लायकराम मानव का लेख पुतुल कला के शैक्षिक आयाम प्रस्तुत करता है। लोककला विशेषज्ञ ज्योति किरन रतन का लेख केरल में पुतुल परम्परा का जीवंत दस्तावेज बनी पद्मश्री मुजक्किल पंकजाक्षी पर है। विदुषी डा.मौसुमी भट्टाचार्जी ने अपने लेख में असम की पुतुल कला के परम्परा से आधुनिकता की ओर बढ़ते कदमों की व्याख्या की है।

    वंदना कन्नन के लेख में अंगुल पुतुल के साथ ही वैश्विक स्तर पर हुए प्रयोगों के साथ कम्प्यूटर और डिजिटल तकनीक से आए बदलावों-तकनीकों का जिक्र किया है। अनिल मिश्रा गुरुजी के लेख में मुख्य रूप से पुतुल कला के साथ अन्य लोक कलाओं में उपस्थित विसंगतियों को उकेरा गया है। पुतुल कलाकार मिलन यादव ने पुतुल समारोहों में आखों देखे प्रयोगशील पुतुल कलाकारों और अपने अनुभव साझा किए हैं। मेराज आलम ने लेख में समझाया कि बच्चों का खेल समझा जाने वाली पुतुल कला का आनन्द लेने वाले वास्तव में वयस्कजन हैं। आनंद अस्थाना ने संगीत नाटक अकादमी के प्रयासों को रेखांकित करने का यत्न किया है। पुतुल कला संचालन से कई दशकों से जुड़ी कलाकार दीपा मित्र का लेख पुतुल कला की विभिन्न आयामों और विस्तृत फलक को रूपायित करता है। अभिनेत्री, भरतनाट्यम नृत्यांगना, गायिका और बीएचयू की पीएचडी स्कॉलर डॉ. नन्दिनी मेहता की वाराणसी में हुए राष्ट्रीय पुतुल महोत्सव पर समीक्षात्मक दृष्टि दी है। अतीत से कॉलम में प्रो.रामनिरंजन लाल श्रीवास्तव के कठपुतली थियेटर के वर्णन कोयहां फिर प्रकाशित किया गया है। पुस्तक समीक्षा में रंगअध्येता भारतरत्न भार्गव की पुस्तक की सारगर्भित समीक्षा दिल्ली के संस्कृति लेखक अनिल गोयल ने की है। चिकित्सा के अंतर्गत युवा संगीत विद्वान विभा सिंह ने रागों की चिकित्सा में महत्ता को अपने संक्षिप्त लेख में सहज ढंग से सामने रखा है।

    Shagun

    Keep Reading

    Is God helpless, or is it our understanding? A new theory of hurt sentiments.

    ईश्वर असहाय या हमारी समझ? आहत भावनाओं की नई थ्योरी

    दोस्त : इस ज़माने में दोस्ती ले – दे के बची है थोड़ी-बहुत

    Tribute and Discussion Session at RLD Headquarters on Munshi Premchand's Birth Anniversary

    मुंशी प्रेमचंद जयंती पर रालोद मुख्यालय में श्रद्धांजलि एवं विचार गोष्ठी

    Stunning victory for an Indian short film at the Stuttgart Film Festival.

    स्टटगार्ट फिल्म महोत्सव में भारतीय लघु फिल्म की शानदार जीत

    देह से परे, आत्मा के समीप; एक निष्काम प्रेम-यात्रा

    Sarnath becomes a UNESCO World Heritage Site! A cultural victory for India.

    सारनाथ बना यूनेस्को विश्व धरोहर! भारत की सांस्कृतिक जीत

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    India Moves Toward ‘One India–One FIP’ as IMIA Strengthens Its Sustainable Fisheries Mission

    IMIA ने महाराष्ट्र-गोवा FIP को राष्ट्रीय फ्रेमवर्क में शामिल किया

    August 17, 2026
    Shankesh Jewellers' ₹347 crore IPO will open on August 18.

    शंकेश ज्वेलर्स का ₹347 करोड़ का आईपीओ 18 अगस्त से खुलेगा

    August 17, 2026
    2378 women set a world record by dancing together to Sawan songs.

    2378 महिलाओं ने एक साथ सावन गीतों पर थिरककर बनाया विश्व रिकॉर्ड

    August 17, 2026
    ‘Dulhania Le Jayegi’ enters its third week; holds its ground on screens despite competition from Hollywood films.

    ‘दुल्हनिया ले आएगी’ तीसरे हफ्ते में पहुंची, हॉलीवुड फिल्मों के बीच भी स्क्रीन्स पर कायम

    August 17, 2026

    AIM Congress 2026 से पहले AIM Global Foundation का भारत दौरा, UAE-भारत निवेश बढ़ाने पर जोर

    August 14, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading