अनिरुद्धाचार्य के लिव-इन रिलेशनशिप बयान पर विवाद: मीडिया और समाज में तीखी बहस
लखनऊ, 7 अगस्त 2025: जाने-माने कथावाचक अनिरुद्धाचार्य अपने एक हालिया बयान को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने लिव-इन रिलेशनशिप पर तल्ख टिप्पणी करते हुए इसे “वैश्यावृत्ति” से जोड़ा, जिसके बाद सोशल मीडिया और समाचार चैनलों पर विवाद गहरा गया है। उन्होंने एक धार्मिक सभा में कहा कि आज समाज में सच बोलना गुनाह बन चुका है। लिव-इन रिलेशनशिप को “वैश्यालय” की संज्ञा देते हुए उन्होंने टिप्पणी की कि इसमें रहने वाली महिलाओं को “वेश्या” कहने पर अब आपत्ति जताई जा रही है, क्योंकि समाज इसे सामान्य मानने लगा है।
उनके बयान का एक हिस्सा यह भी था कि पहले समाज में महिलाओं के कपड़े पहनने को लेकर विवाद होता था, लेकिन अब “कपड़े उतारने” पर महाभारत हो रही है। यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई, जिसके बाद कई लोगों ने उनकी आलोचना की, तो कुछ ने उनके विचारों का समर्थन किया।
यूजर बोला आईना तो सही दिखाया लेकिन
सोशल मीडिया पर एक यूजर, आफाक हामिद ने इस मामले पर अपनी राय व्यक्त करते हुए लिखा कि अनिरुद्धाचार्य ने वही बात कही, जो कई लोग निजी तौर पर मानते हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से कहने से बचते हैं। उन्होंने इसे अनिरुद्धाचार्य की “गलती” करार दिया कि उन्होंने यह बात खुलकर और सबके सामने कह दी। यह टिप्पणी दर्शाती है कि समाज में इस मुद्दे पर विचार दो ध्रुवों में बंटे हुए हैं।

मीडिया महाभारत करा रही है : अनुरूद्धाचार्य
वायरल वीडियो में लिव-इन रिलेशनशिप पर अनुरूद्धाचार्य बोलें – अब मीडिया खुद कह रही है वेश्या को वेश्या मत कहिए इस पर बहस चल रही है उन्होंने मीडिया पर आरोप लगते हुए कहा कि इनको चिंता है लिवइन वालों को वेश्या मत कहिए। उन्होंने कहा कि पहले कपड़े पहहने पर महाभारत होते थे अब कपड़े उतरने पर महाभारत हो रही है।
इस मामले पर एक यूजर आफाक हामिद ने लिखा कि – अनिरुद्धाचार्य जो बात कह रहे हैं, वह लगभग सभी लोग कहते हैं ,लेकिन निजी रूप से, चुपचाप। अनिरुद्धाचार्य की “ग़लती” बस यही रही कि उन्होंने वही बात सबके सामने, सार्वजनिक रूप से कह दी।
महिला आयोग ने लिया संज्ञान
इससे पहले, अनिरुद्धाचार्य के एक अन्य बयान में लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर की गई टिप्पणी, जिसमें उन्होंने कुछ लड़कियों को “चार जगह मुंह मारने” जैसा विवादित शब्द इस्तेमाल किया था, पर राष्ट्रीय महिला आयोग ने संज्ञान लिया था। इसके बाद अनिरुद्धाचार्य ने सफाई दी थी कि उनका इरादा सभी महिलाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था, बल्कि वे केवल “कुछ” लोगों की बात कर रहे थे।
समाज में मीडिया की भूमिका संदिग्ध
अनिरुद्धाचार्य ने अपने ताजा बयान में मीडिया पर भी निशाना साधा। उनका कहना था कि मीडिया इस मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रही है और “वेश्या” शब्द पर आपत्ति जताने वालों को बढ़ावा दे रही है। उनके मुताबिक, समाज में पारंपरिक मूल्यों की बात करने वालों को अब “कट्टरपंथी” करार दिया जाता है। इस बयान ने न केवल सामाजिक मंचों, बल्कि टीवी चैनलों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर भी तीखी बहस को जन्म दिया है। जहां एक पक्ष का मानना है कि अनिरुद्धाचार्य ने समाज की सच्चाई को उजागर किया है, वहीं दूसरा पक्ष इसे महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक और रूढ़िगत सोच मानता है।
क्या कहती है कानूनी प्रक्रिया
लिव-इन रिलेशनशिप भारत में कानूनी रूप से मान्य है, बशर्ते इसमें शामिल दोनों पक्ष बालिग और सहमति से साथ रह रहे हों। सुप्रीम कोर्ट ने भी कई बार इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा माना है। हालांकि, सामाजिक स्तर पर इसे लेकर अब भी कई तरह के पूर्वाग्रह मौजूद हैं, और अनिरुद्धाचार्य का बयान इन्हीं पूर्वाग्रहों को हवा देता दिख रहे हैं।
विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा
फ़िलहाल यह विवाद अभी थमने का नाम नहीं ले रहा। अनिरुद्धाचार्य के समर्थक उनके बयान को सनातन मूल्यों की रक्षा के रूप में देख रहे हैं, जबकि आलोचक इसे आधुनिक समाज की स्वतंत्रता पर हमला बता रहे हैं। इस बीच, सोशल मीडिया पर यह बहस और तेज होती दिख रही है, जहां लोग अपनी-अपनी राय खुलकर रख रहे हैं। इस मामले में अनिरुद्धाचार्य की ओर से कोई नया बयान या माफी अभी तक सामने नहीं आई है, लेकिन यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद किस दिशा में जाता है और समाज में लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मुद्दों पर बहस को कैसे प्रभावित करता है।







