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जिसके साथ खून का रिश्ता हो’, वह मुस्लिम महिलाएं हज यात्रा पर जा सकेंगी: सुप्रीम कोर्ट

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मुस्लिम महिलाओं को एक और बड़ा तोहफा, मिली हज यात्रा की आजादी, नई नीति में खास बात ये है कि पहली बार मुस्लिम महिलाओं को स्वतंत्र रूप से हज यात्रा करने की सुविधा दी गई है। इसके पहले कोई भी महिला अपने खून के रिश्ते वाले रिश्तेदार के बिना हज पर नहीं जा सकती थीं। मुस्लिम महिलाओं के लिए यह बड़ा बंधन था।

नई दिल्ली 8 अक्टूबर। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से महिलाओं को तीन तलाक पर मिली राहत के बाद केंद्र सरकार ने मुस्लिम महिलाओं को एक और बहुत बड़ा तोहफा देने जा रही है। नई हज नीति के मुताबिक मुस्लिम महिलाएं अब बिना किसी मेहरम यानि ‘जिसके साथ खून का रिश्ता हो’, के साथ हज यात्रा पर जा सकेंगी।

नई नीति के तहत मोदी सरकार हज सब्सिडी के खत्म होने के बाद गरीब मुसलमानों को हज यात्रा का सस्ता विकल्प देने पर भी विचार कर रही है। इस संबंध में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, कि नई नीति के तहत हज यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। ज्ञात हो कि इसी साल सरकार ने पूर्व आइएएस अधिकारी अफजल अमानुल्ला की अध्यक्षता में नई हज नीति पर सुझाव देने के लिए समिति बनाई थी, जिसने अपनी रिपोर्ट दे दी है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अमल करते हुए नई हज नीति में सब्सिडी की व्यवस्था खत्म करने को भी हरी झंडी मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने साल 2022 तक धीरे-धीरे हज सबसिडी खत्म करने का आदेश दिया था। लेकिन हज सब्सिडी खत्म होने के बावजूद सरकार हज यात्रा का सस्ता विकल्प मुहैया कराने पर विचार कर रही है।

नई नीति में खास बात ये है कि पहली बार मुस्लिम महिलाओं को स्वतंत्र रूप से हज यात्रा करने की सुविधा दी गई है। इसके पहले कोई भी महिला अपने खून के रिश्ते वाले रिश्तेदार के बिना हज पर नहीं जा सकती थीं। मुस्लिम महिलाओं के लिए यह बड़ा बंधन था।

नई नीति के तहत 45 साल की उम्र पार चुकी चार या उससे मुस्लिम महिलाएं एक साथ हज यात्रा पर जा सकती हैं। इसके लिए उन्हें किसी मेहरम के साथ जरूरत नहीं होगी। सऊदी अरब भी 45 और इससे अधिक उम्र की महिलाओं को हज के लिए प्रवेश की अनुमति देता है।

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