युवाओं को सेंट्रल जेल में बनाया जा रहा कट्टरपंथी

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श्रीनगर की उच्च सुरक्षा वाली केंद्रीय जेल में धड़ल्ले से हो रहा मोबाइल फोन का इस्तेमाल

श्रीनगर, 25 फरवरी। श्रीनगर की उच्च सुरक्षा वाली केंद्रीय जेल में करीब 300 अनाधिकृत मोबाइल फोन इस्तेमाल किए जाने का पता चला है। स्पष्ट है कि कैदियों के लिए यह काफी सुगम है. एक आधिकारिक रिपोर्ट में यह भी पता चला है कि जेल के भीतर मामूली अपराधियों और विचाराधीन कैदियों को कट्टरपंथी बनाया जा रहा है. यह भी एक बढ़ता खतरा है। इस रिपोर्ट को समय-समय पर जम्मू-कश्मीर के गृह विभाग भेजा गया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गयी। बीते छह फरवरी को लश्कर ए तैयबा का एक आतंकी, पाकिस्तान का रहने वाला मोहम्मद नवीद जाट दो पुलिसकर्मियों की हत्या करके व्यस्त एसएमएचएस अस्पताल से पुलिस हिरासत से भाग निकला था। इस घटना के बाद हुई आतंरिक जांच में ये मुद्दे सामने आये।

राज्य के गृह विभाग को सौंपी गयी राज्य की खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक मामूली अपराधों के लिए जेल में बंद युवाओं को कट्टरपंथी बनाने का अड्डा बन गए जेल परिसर में करीब 300 मोबाइल फोनों का संचालन हो रहा है। तत्कालीन महानिदेशक (कारावास) एसके मिश्रा ने इस रिपोर्ट के बारे में कहा कि जेल में भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स निगम लिमिटेड (ईसीआईएल) ने जो मोबाइल जैमर लगाए थे वह काम नहीं कर रहे. उन्होंने कहा, ‘‘ईसीआईएल ने जो प्रौद्योगिकी अपनायी वह चलन से बाहर हो चुकी लगती है. जैमर अब सिग्नल या मोबाइल फोनों को रोक नहीं पा रहे।’’