- नेतराम के आवासों पर 100 करोड़ से अधिक की सम्पत्ति के कागजात मिले
- गाढ़ा भंडार के दो शो-रूम के प्रतिष्ठानों में आयकर विभाग ने की छानबीन
नई दिल्ली, 13 मार्च 2019: लोकसभा चुनाव के ठीक पहले मायावती सरकार में प्रमुख सचिव रहे रिटार्यड आईएएस नेतराम व लखनऊ के प्रसिद्ध कपड़ा व्यवसायिक प्रतिष्ठान गाढ़ा भंडार के यहां दिल्ली से आयी आयकर विभाग की टीमों ने मंगलवार को छापेमारी की है। सूत्रों के अनुसार नेतराम पर 100 करोड़ रुपये से अधिक फंड के हेराफेरी का आरोप है। उनके आवासों पर 100 करोड़ रूपये से अधिक सम्पत्ति के कागजात मिले हैं। साथ ही एसबीआई की एक शाखा में नेतराम व बेटी पूनम के दो अकाउंट सीज किए गये। जबकि आयकर विभाग ने छापे की कार्रवाई की अभी तक कोई पुष्टि नहीं की।
लखनऊ में नेतराम के गोमतीनगर स्थित विशाल खण्ड आवास सं. 3/175 व विपुलखंड के आवास में आयकर टीम ने छानबीन की। एक टीम कोलकाता की एक कम्पनी को पहुंचाए गए फायदे की जांच कर रही है। नेतराम के दिल्ली और लखनऊ स्थित आवासों व बेटी के कार्यालयों पर छानबीन के तहत मिले दस्तावेजों को सील कर दिया गया है। छापे में मिले आभूषण एवं लॉकर को आयकर विभाग ने अपने कब्जे में लेकर उसकी पड़ताल कर रहा है।
इस बीच लखनऊ से एक खबर है कि गाढ़ा भंडार के मालिक विष्णु बल्लभ रस्तोगी (गुड्डू भइया) के स्टेशन रोड स्थित उनके घर में आयकर विभाग की टीम ने छापा डाला। गाढ़ा भंडार के कपूरथला में दो शो-रूम, इंदिरानगर, गोमतीनगर और अमीनाबाद प्रतिष्ठानों में छानबीन कर रही है। विभाग की टीमों ने भारी मात्रा में आय-व्यय की किताबें और रसीद बुकों को इकट्ठा कर उसकी पड़ताल कर रही है।
छापे की कार्यवाही से नाराज व्यापारी नेता संदीप बंसल अपने समर्थकों के साथ रेलवे स्टेशन रोड स्थित उनके आवास पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया और वार्ता करने की कोशिश की। परन्तु आयकरअधिकारियों ने एक नहीं सुनी। सूत्रों के मुताबिक नेतराम बसपा से लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। तफ्तीश के बाद नेतराम पर शिकंजा कंस सकता है।
मीडिया ख़बरों के अनुसार माना जा रहा है कि आयकर छापे के बाद कई अन्य केंद्रीय आर्थिक जांच एजेंसियां भी कार्रवाई कर सकती हैं। सत्ता के गलियारों में मंगलवार को चर्चा रही कि इन अधिकारियों के जरिए मायावती और अखिलेश यादव को घेरने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। बताया जा रहा कि एक दर्जन से अधिक आईएएस अधिकारियों की सूची बनायी गयी है जो सपा और बसपा के अत्यंत चहेते हैं। ऐसे अधिकारियों के फोन रिकार्ड से लेकर जमीन जायदाद तक की रेकी की गयी है।







