लखनऊ, 11 जुलाई 2018: यूपी में बागपत के जिला जेल में सोमवार को गोलियों से छलनी कर की गयी कुख्यात अपराधी प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी की हत्या, यूपी कानून व्यवस्था को तार-तार करता है वो भी तब- जब मुन्ना बजरंगी की पत्नी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मीडिया को इस अनहोनी की आशंका को पहले ही जगजाहिर कर दिया था। अब सरकार पर राजनैतिक आछेप लगने स्वभावविक हैं।
इस घटना को लेकर अखिलेश यादव ने कहा है कि ऐसा कुशासन व अराजकता का दौर पहले कभी भी नहीं देखा। इस सनसनीखेज घटना को लेकर अब जनता भी सवाल खड़े कर रही है कि जब लोग जेलों में सुरक्षित नहीं है तो लोग बाहर कैसे सुरक्षित रह सकते है! लोगों के मन में इस गैंगवार को लेकर अब एक ही सवाल तेजी से कौंध रहा है कि अब अगला निशाने पर कौन?
20 साल पहले भी मरकर ज़िंदा हो चुका मुन्ना बजरंगी
लखनऊ, 12 जुलाई 2018: यूपी में बागपत के जिला जेल में सोमवार को गोली का शिकार हुए के कुख्यात अपराधी प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी को करीब 20 साल पहले दिल्ली में हुई एक मुठभेड़ में 7 गोली लगने के बाद पुलिस ने मृत समझ कर उसे पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया था। अस्पताल में चिकित्सकों को उसकी साँस चलती मिलने पर उसका उपचार किया और वह स्वस्थ हो गया। इस मुठभेड़ में 7 गोलियां लगी थी।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुन्ना बजरंगी का नाम करीब ढाई दशक पहले सुर्ख़ियों में आया था। तब उसे मुन्ना नाम से जाना जाता था। पश्चिम में उसका दोस्त यतीन्द्र था। गाजियाबाद के महावर गांव के रहने वाले यतीन्द्र की दोस्ती इसके दोस्त अजय से थी।
अजय भी अपराध की दुनिया में सक्रिय था हालांकि उसके पिताजी एन सिंह उस समय उत्तर प्रदेश पुलिस क्षेत्र अधिकारी के पद पर तैनात हैं। गाजियाबाद के भोपुरा गांव निवासी राकेश ने साहिबाबाद क्षेत्र के राजेंद्रनगर में एक प्लाट ही लौट दो लोगों को बेंच दिया था। हालांकि इसमें हेराफेरी दिल्ली के बदमाश ने की थी। लेकिन फ्रंट पर राकेश ही था। खरीदार की रिस्तेदारी सुशील मूंछ के साथी यशपाल राठी से और दूसरे के संबंध अजय सिंह से थी। इसी प्लाट पर हुई गोलीबारी में अजय सिंह की मौत हो गई और यशपाल राठी गोली लगने से घायल हो गया। यशपाल का साथी संजीव ढाका भी मौके पर मारा गया था।

इस मौके पर पुलिस ने त्यागी ट्रांसपोर्टर को मौके से गिरफ्तार भी किया था। हलाकि अदालत ने उसे निर्दोष माना था। इसके 3 दिन बाद ही भोपुरा के राकेश गुर्जर और उसके पिता को गांव से अलग-अलग जगहों पर एक ही दिन गोलियों से भून दिया गया। इस मामले में मुन्ना बजरंगी का नाम आया था। यही वह घटना है जिसमें पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बजरंगी का नाम पहली बार सुना गया था, हालाँकि यह दोनों हत्या यतेंद्र गुर्जर ने की थी। इसके बाद भी डीपी यादव के भाई राम सिंह और उनके गनर को गाजियाबाद के रामनगर में अंधाधुंध गोलियां बरसाकर मौत के घाट उतार दिया गया था। इस मामले में बताया जाता है कि सतवीर गुर्जर के अनुयाई जतिन ने अपने एक साथी के साथ मिलकर इस घटना को अंजाम दिया था। हालाँकि ये मामला पुलिस ने अनट्रेस लिस्ट में डाल दिया था। इस मामले में भी बजरंगी का नाम आया था।
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