कमलेश तिवारी हत्याकांड : एक नया दहशतगर्द संगठन तैयार होने का अंदेशा, लंबी साजिश के तहत हुई हत्या

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  • राम मंदिर मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसला आने से पूर्व माहौल बिगाड़ने के लिए साजिश
  • अब तक की जांच में हो चुका है साबित, हत्यारों के लंबी-चौड़ी गैंग

उपेन्द्र नाथ राय

लखनऊ, 22 अक्टूबर, 2019: हिन्दू समाज पार्टी के नेता कमलेश तिवारी की हत्या एक गहरी साजिश का हिस्सा है। अभी इस मामले के परत-दर-परत खुलासा होने में समय लग सकता है। अब पुलिस व खुफिया एजेंसिंयों में भी यह चर्चा होने लगी है कि इसका खुलासा जितना आसान माना जा रहा था, उतना है नहीं। जानकारों का मानना है कि यह अयोध्या में राम मंदिर विवाद पर सुप्रीम फैसला से पहले माहौल बिगाड़ने की एक साजिश का हिस्सा हो सकता है। यही कारण है कि लखनऊ, लखीमपुर, बरेली, शाहजहांपुर, कानपुर जहां भी मुख्य आरोपित जा रहे हैं, उन्हें स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों का सहयोग मिलता दिख रहा है। इसको देखकर खुफिया एजेंसियों के भी कान खड़े हो गये हैं और भविष्य में ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सतर्कता बढ़ा दी गयी है।

इस पूरे घटनाक्रम पर ध्यान दें तो 18 को दोपहर में दो लोग कमलेश तिवारी के आफिस आते हैं और मिठाई के डिब्बे में हथियार रखकर ले जाते हैं। वहीं पर पहले फायर करते हैं और फिर चाकूओं से वार करते हैं। सबसे बड़ी बात है कि सूरत से खरीदी मिठाई का डिब्बा भी उन्होंने सुबूत के तौर पर वहीं छोड़ दिया, जिससे पुलिस तुरंत सूरत पहुंच गयी। इस संबंध में एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि यहीं से संदेह शुरू हो जाता है, क्योंकि या तो कोई नादान अपन सुबूत छोड़ सकता है या कोई बहुत बड़ा शातिर ही छोड़ सकता है। इसमें ये नादान तो हैं नहीं, इस कारण इनके लंबे तार होने का अंदेशा पुष्ट होती है।

कोई नया दहशतगर्दी संगठन तैयार होने की आशंका:

इस हत्याकांड के तार कर्नाटक, गुजरात, महाराष्ट्र, नेपाल के साथ ही इन राज्यों के कई जिलों से जुड़ते हुए दिख रहे हैं। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि अब तक के आतंकवादी संगठनों से इतर कोई नया दहशतगर्दी संगठन तैयार हो चुका है। यह भी संभावना जताई जा रही है कि यह संगठन एक-दो दिनों में तो तैयार हुआ नहीं होगा। यह बहुत दिनों से माड्यूल के रूप में काम कर रहा होगा। यह भी संभावना जताई जा रही है कि इस संगठन को किसी पुराने संगठन का बरदहस्त हासिल हो।

केंद्रीय एजेंसी से जांच की बढ़ गयी संभावना:

सभी पहलुओं को देखते हुए इस मामले की किसी केंद्रीय एजेंसी से पूरे मामले की जांच कराये जाने की संभावना बढ़ती जा रही है। सोमवार को डीजीपी ओमप्रकाश सिंह ने भी कहा कि किसी भी संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। गुजरात एटीएस ने अक्टूबर 2017 में आतंकी संगठन आईएसआईएस के संदिग्धों को गिरफ्तार किया था। उनसे पूछताछ में ही आतंकियों द्वारा कमलेश की हत्या की साजिश की बात सामने आई थी।

आरोपितों को कई जगह से मिल रही मदद:

अब तक के जांच में यह सामने आ चुका है कि फरार आरोपित पठान मोइनुद्दीन अहमद व शेख अशफाक हुसैन जहां भी गए, वहां स्थानीय स्तर पर उन्हें मदद मिली है। इसी तरह से इनकी मदद के लिए दूसरे राज्यों से भी आगे आने की बात सामने आ रही है। इससे यह लगने लगा है कि यह संगठित ढंग से की हत्या है। इसके लिए लंबी प्लानिंग बनाई गयी होगी। इन जानकारियों पर यूपी एटीएस ने अन्य राज्यों की एटीएस से संपर्क बनाया हुआ है और इस पूरे नेटवर्क की तह तक जाने की कोशिश हो रही है। विभिन्न राज्यों की जांच एजेंसियों की पड़ताल भी इस पूरे मामले के पीछे किसी संगठन का हाथ होने की दिशा में बढ़ रही हैं।

क्या-क्या हुआ अब तक:

सूरत से ही साजिशकर्ताओं फैजान, मौलाना मोहसिन शेख व रशीद अहमद पठान को गिरफ्तार किया गया। लखीमपुर के पलिया से किराये पर इनोवा कार बुक की गई। फरार हत्यारोपी उसी से शाहजहांपुर पहुंचे। चर्चा है कि आरोपियों के मददगार बरेली में भी हैं, क्योंकि जब वे वहां पहुंचे तो उन्हें इलाज में मदद पहुंचाई गई। कमलेश की हत्या से जुड़े एक संदिग्ध सैयद आसिम अली को नागपुर से गिरफ्तार किया गया। महाराष्ट्र एटीएस ने बताया कि उसकी हत्याकांड में महत्वपूर्ण भूमिका थी। वह हत्यारोपियों से लगातार चर्चा में था। यूपी एटीएस सोमवार को उसकी ट्रांजिट रिमांड हासिल कर लखनऊ ला रही है।

दोनों आरोपियों पर ढाई-ढाई लाख का इनाम:

कमलेश के हत्यारों की गिरफ्तारी पुलिस के टेढ़ी खीर साबित होती जा रही है। इसी कारण डीजीपी ओपी सिंह ने ढाई-ढाई लाख रुपये का इनाम घोषित किया है। डीजीपी ने सोमवार को कहा कि इस हत्याकांड में पुलिस और एसआईटी छोटी-छोटी चीजों को जोड़ने की कोशिश कर रही है। कई ऐसी जानकारियां मिली हैं, जिसे साझा नहीं किया जा सकता।

नेपाल भागने की फिराक में थे, बॉर्डर पर चौकसी देख लौटे:

संदिग्ध हत्यारे रविवार रात शाहजहांपुर में भी दिखाई दिये। इसका पता चलते ही एसटीएफ और एटीएस ने होटलों और मदरसों में ताबड़तोड़ छापे मारे। दोनों लखीमपुर जिले के पलिया से किराये पर इनोवा बुक कर शाहजहांपुर पहुंचे थे। एसटीएफ ने ड्राइवर को हिरासत में ले लिया है। उसने बताया कि दोनों नेपाल बॉर्डर पार करना चाहते थे, लेकिन चौकसी देख शाहजहांपुर गए और टैक्सी छोड़ दी। जांच एजेंसियां यह जानने में जुटी हैं कि आरोपी अभी शाहजहांपुर में ही छिपे हैं या कहीं और भाग निकले हैं।

गुजरात से हत्यारों के लिए बुक कराई गई थी टैक्सी:

हत्या आरोपितों को नेपाल पहुंचाने के लिए गुजरात से फोन किया गया था। पुलिस सूत्रों ने बताया कि टैक्सी चालक के मालिक लखीमपुर के पलिया में रहते हैं, जबकि उनके रिश्तेदार गुजरात में हैं। हत्यारों के लिए उन्हीं ने टैक्सी मालिक को फोन किया था। पुलिस सूत्रों ने बताया कि टैक्सी का भाड़ा 5000 रुपये था, जिसका भुगतान भी गुजरात से ही हुआ था। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि हत्यारे रविवार रात करीब 12 बजे टैक्सी से शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। चौकी के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में हत्यारों के फोटो मिले हैं।

सरेंडर करने के फिराक में भी हैं आरोपित, वकील से किया संपर्क:

इधर यह भी जांच में पता चला है कि आरोपित अशफाक व मोइनुद्दीन ने ठाकुरगंज के एक वकील को फोन कर कोर्ट में सरेंडर करने के बारे में बातचीत की। आरोपितों का फोन आने के बाद तुरंत वकील ने इसकी जानकारी पुलिस को दी। जिस मोबाइल नंबर से फोन आया था, वह लखीमपुर के पलिया के टैक्सी चालक का था। आरोपितों ने उसी से वकील को मोबाइल नम्बर मांगकर फोन किया था।

एसटीएफ देख रही सीसीटीवी फुटेज:

एसटीएफ ने कुछ जगहों की सीसीटीवी फुटेज को अपने कब्जे में ले लिया है और उसका बारिकी से अध्ययन कर रही है। सोमवार को सदर कोतवाली पुलिस ने रोडवेज के कंट्रोल रूम में बैठकर सीसीटीवी फुटेज देखा, जिसे पेन ड्राइव में डाउनलोड किया गया।

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