तेहरान: ईरान ने अपनी सैन्य क्षमता को लेकर एक बार फिर बड़ा दावा किया है, जबकि दूसरी ओर चीन के चार कार्गो विमानों के गुपचुप लैंडिंग की रिपोर्ट्स ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने कहा कि उनके बलों ने करीब 180 ड्रोन निष्क्रिय किए और अमेरिकी एफ-35 स्टेल्थ फाइटर जेट को भी निशाना बनाया।
ईरान का सैन्य दावा: 180 ड्रोन और एफ-35 पर निशाना
- ईरानी स्पीकर गालिबाफ ने वाशिंगटन के साथ चल रही अप्रत्यक्ष वार्ताओं के बीच यह बयान दिया। उन्होंने कहा कि एफ-35 जैसे आधुनिक जेट को निशाना बनाना कोई एक बार की घटना नहीं, बल्कि ईरान की तकनीकी और रणनीतिक क्षमता का प्रमाण है।
- ईरान के अनुसार, उसके बलों ने अमेरिका और सहयोगियों से जुड़े लगभग 180 ड्रोन मार गिराए या निष्क्रिय किए।
- गालिबाफ ने दावा किया कि यह कार्रवाई कई स्तरों पर योजनाबद्ध थी और इससे दुनिया को ईरान की रक्षा प्रौद्योगिकी में तेज प्रगति का संदेश गया।
- उन्होंने अमेरिका के साथ बातचीत में कुछ मुद्दों पर सहमति बनने की बात कही, लेकिन बड़े मतभेद अभी बाकी हैं। गालिबाफ ने हालिया बुद्धविराम (सीजफायर) को ईरान की रणनीतिक जीत बताया और कहा कि अमेरिका शासन परिवर्तन या ईरानी सैन्य क्षमता खत्म करने में असफल रहा।

चीन के चार कार्गो विमान गुपचुप तरीके से ईरान पहुंचे
- इसी बीच, मिडिल ईस्ट में तनाव के दौरान एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले 48 घंटों में चीन के चार विशाल कार्गो विमान ईरानी हवाई अड्डों पर गुप्त रूप से उतरे।इन विमानों ने ईरानी हवाई क्षेत्र में प्रवेश से पहले अपने ट्रांसपॉन्डर्स बंद कर दिए थे, ताकि रडार और सार्वजनिक ट्रैकिंग से उनकी लोकेशन छिपी रहे।
- खुफिया सूत्रों का अनुमान है कि इनमें उन्नत मिसाइल प्रणालियां, ड्रोन, सैन्य तकनीक और भारी सामान लदा हो सकता है।
यह घटना चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दिए वादे के विपरीत मानी जा रही है, जिसमें चीन ने ईरान को हथियार न देने का आश्वासन दिया था। - इसके अलावा, ईरान को चीन के बीडू सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम का एक्सेस और हाई-रेजोल्यूशन उपग्रहों का इस्तेमाल इजरायली-अमेरिकी ठिकानों की निगरानी के लिए दिए जाने की भी रिपोर्ट्स हैं।
बता दें कि ये दोनों घटनाएं एक साथ ऐसे समय आई हैं जब क्षेत्र में ड्रोन और एयर ऑपरेशंस युद्ध का मुख्य हिस्सा बन चुके हैं। ईरान अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन कर रहा है, जबकि चीन की कथित अदृश्य मदद से उसकी मिसाइल और ड्रोन क्षमता और मजबूत हो रही है। अमेरिका ने चीन की इस कथित मदद पर सख्त रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। फिलहाल दोनों घटनाए मिडिल ईस्ट में तनाव को नया मोड़ दे रही हैं।






