लखनऊ के पीजीआई थाना क्षेत्र में वरिष्ठ पत्रकार संजय यादव पर हुए जानलेवा हमले ने पत्रकार समुदाय में गुस्सा और आक्रोश पैदा कर दिया है। संजय यादव, जो विश्व नायक इंडिया न्यूज़ और एक दैनिक अखबार में लखनऊ मंडल ब्यूरो चीफ हैं, सरोजिनी नगर बिजनौर तहसील में कवरेज के लिए जा रहे थे। इस दौरान तीन युवकों ने उनकी स्कॉर्पियो गाड़ी रोककर गाली-गलौज और मारपीट की। यादव ने किसी तरह भागकर कल्ली पश्चिम चौकी में शिकायत दर्ज की।
पत्रकार संजय यादव ने बताया कि हमलावरों ने उनके घर पर भी हमला किया, जिसकी सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध है। इसके बावजूद, पुलिस ने अभी तक किसी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया है। इस घटना से पत्रकार संगठनों में नाराजगी बढ़ गई है, और कई संगठनों ने प्रशासन पर कार्रवाई में ढिलाई का आरोप लगाया है।
प्रशासन और नेताओं की प्रतिक्रिया
- थाना प्रभारी पीजीआई, धीरेंद्र सिंह ने कहा कि “मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।”
- मोहनलालगंज विधायक अमरेश रावत ने कहा कि “पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तंभ हैं। उनके साथ किसी भी प्रकार का उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।”
पत्रकार संगठनों में आक्रोश
- आल प्रेस एंड राइटर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सर्वजीत सिंह सूर्यवंशी: “अगर दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो संगठन बड़े स्तर पर घेराव करेगा।”
- लखनऊ जिला अध्यक्ष मलिक मोहम्मद: “प्रशासन की लापरवाही से पत्रकारों का मनोबल टूट रहा है। कार्रवाई न हुई तो धरना दिया जाएगा।”
- मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अशोक मिश्रा: “मुख्यमंत्री के निर्देशों के बावजूद पुलिस कार्रवाई में लापरवाही बरत रही है, जिससे पत्रकारों पर हमले बढ़ रहे हैं।”
- प्रदेश अध्यक्ष सत्रोहन लाल रावत: “पत्रकारों पर हमले आम जनता की आवाज को दबाने की साजिश हैं। पुलिस को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए, वरना अपराधियों के हौसले और बुलंद होंगे।”
पत्रकारों पर हमलों की घटनाएं बढ़ी :
पत्रकारों पर हमलों की घटनाएं हाल के दिनों में बढ़ी हैं। कवर्धा में भी इसी तरह की एक घटना में पुलिस की देरी से एफआईआर दर्ज करने पर सवाल उठे थे। लखनऊ में इस घटना ने एक बार फिर प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं। क्या पत्रकारों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे, या ये हमले यूं ही जारी रहेंगे?
बता दें कि पत्रकार संजय यादव पर हमला न केवल एक व्यक्ति पर हमला है, बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर भी प्रहार है। पत्रकार संगठनों की मांग है कि दोषियों पर त्वरित और कठोर कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकी जा सकें। फिलहाल अब प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।







